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आजकल मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता…

इन दिनों हम में से कई लोग सोचते हैं कि मेरे पास तो सब है, मैं भाग्यशाली हूँ, मैं अपने पूरे परिवार के साथ हूँ तो भी मैं खुश क्यों नहीं?

इन दिनों हम में से कई लोग सोचते हैं कि मेरे पास तो सब है, मैं भाग्यशाली हूँ, मैं अपने पूरे परिवार के साथ हूँ तो भी मैं खुश क्यों नहीं?

क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट आरती सेलवन के साथ हुए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि ये डिसाइड करना बहुत मुश्किल हो गया है कि ये वायरस का पेंडेमिक है या स्ट्रेस का। और इसे हम सब नकार नहीं सकते।

कोरोना की दूसरी लहर के बाद से तो जैसे अच्छे दिनों की उम्मीदें ही नज़र नहीं आ रही है। इसमें हम से कई लोगों ने बहुत कुछ खो दिया है। और इन का सीधा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

कई बार बहुत अज़ीब सा महसूस होता है। बहुत सारे विचारों से मन में उलझा सा रहता है और फिर अचानक से सुन्न हो जाता है। हम चाहकर भी दूसरों को मना नहीं कर पाते और फिर ज़रूरत से ज़्यादा कामों में घिर जाते हैं। ऐसे में ओवर्वेल्मिंग  यानि बहुत ही दवाब, जैसे कोई घेरता जा रहा है और हम निकल नहीं पा रहे, महसूस होता है। तो कई बार हम परेशानियों में खुद को मजबूत करने के कोशिश में लगे रहते हैं।

और ये लिस्ट बहुत लम्बी है लेकिन मुझे यकीन है कि हमसे ज़्यादातर लोगों को ये भावनाएँ कोरोना के बाद से बार-बार आने लगी है।

इन्हीं परेशानियों को अच्छे से समझने के लिए और उनसे कैसे निबटें, इसके लिए विमेंस वेब ने मित्रा ट्रस्ट की फाउंडर और सायकोलॉजिस्ट भैरवी प्रकाश के साथ बात की थी।

यहां उनके द्वारा सुझाए कुछ विकल्प साझा कर रहे हैं।

क्या आपको भी कई बार बहुत उदासीनता या ऊब महसूस होती है? आखिर ये है क्या?

जब बहुत सारे इमोशंस, बहुत सारे विचार चल रहे होते हैं और इन सबकी वज़ह से आप बिलकुल सुन्न सा महसूस करते हैं या बहुत उदासीनता या ऊब सा हो जाते हैं तो इसे ही अग्रेंजी में मेह फीलिंग कहते हैं। इस पर आप खुलकर बात करें। मित्रा ट्रस्ट ने इन भावनाओं को समझने के लिए मेह सेशंस कंडक्ट करता है।

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हम सब कई बार इसे महसूस करते हैं लेकिन मदद लेने में हिचकते हैं। सायकोलॉजिस्ट से परामर्श नहीं करते। अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या ये इतना सीरियस है कि मैं सायकोलॉजिस्ट से मदद लूं? तो इस फेज़ में मेह किट आपको अपनी भावनाएँ, अपने विचारों को समझने में मदद करता है।

कई लोगों ने इसकी मदद ली है। ये कोई थेरेपी का रिप्लेसमेंट टूल नहीं है और ना ही कोई दवाई है। ये बस आपको खुद को समझने के लिए एक किट की तरह शुरुवाती समय की भावनाओं को समझने में आपकी मदद करता है।

ओवर्वेल्मिंग फीलिंग से कैसे डील करें?

जब भी आपको किसी भी चीज़ से ओवर्वेल्मिंग फील हो तो सबसे पहले रुकें और गहरी सांस लें। कुछ देर के लिए सब छोड़कर अपनी खिड़की से बाहर देखें और अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। अगर आप जा सकते हैं तो टहलने निकलें। पर्यावरण को देखें। धीरे-धीरे अपने आप बेहतर और शांत महसूस करेंगे। या फिर जो भी चल रहा है उसे रोकर निकाल दें। सच में, आप हल्का महसूस करेंगे।

खुद के लिए बॉउंड्रीज़ कैसे निर्धारित करें?

कई बार हम से कई लोग एक साथ बहुत सारी चीज़ों में उलझ जाते हैं क्योंकि हम ना नहीं कह पाते। तो पहले ये समझें कि नहीं कहने का मतलब ये नहीं कि आप लॉयल नहीं हैं। अपने अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए ना कहना ज़रूरी है। आप हमेशा उन्हें बतायें कि आप ना क्यों कह रहे हैं। जो लोग आपकी इज़्ज़त करते हैं वो समझेंगे। और यही बॉउंड्री सेटिंग है।

अपने करीबियों को खोने के गम से कैसे डील करें?

हम में से कई लोगों ने इस कोरोना वायरस से अपने करीबियों को खो दिया है। ऐसे में सब हमें मजबुत रहने की सलाह देते हैं। लेकिन आपको हर समय मजबुत रहने की ज़रूरत नहीं है। गम को पूरी तरह से महसूस करें। अपने आप को वक़्त दें। आप ठीक नहीं हैं, इस बात को स्वीकार करें। यही स्ट्रांग रहना होता है।

कई बार हमें कुछ भी करने का मन नहीं करता, ऐसे में क्या करें?

आप ये समझें कि अभी हमारी बॉडी एक नए माहौल में खुद को ढ़ाल रही है जिसे हम न्यू-नार्मल कहते हैं। इसीलिए दिमाग को समझने में समय चाहिए।  तो आप इस चीज़ का तनान न लें। सबके साथ ऐसा हो रहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर देखते हैं कि कुछ लोगों ने कितना कुछ नया सीख लिया है। किसी ने योगा शुरू कर दिया किसी ने कुछ और। और फिर ऐसे में हम ज्यादा विचलित हो जाते हैं कि हम ने कुछ नहीं किया। तो आप ये स्ट्रेस न लें। हमें सबसे पहले इस महामारी से जंग जितनी है। आप बस खुद के साथ काइंड, मेहरबान  रहें।

अभी भी हम से कई लोग सोचते हैं कि मेरे पास तो सब है, मैं भाग्यशाली हूँ तो मुझे बुरा महसूस नहीं करना चाहिए। मैं अपने पूरे परिवार के साथ हूँ। मुझे अकेलापन महसूस नहीं करना चाहिए। या कई बार लाचार या हेल्पलेस महसूस करते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। आपको ये सब महसूस हो सकता है। सभी के प्रोसेस करने का तरीका अलग होता है। सभी इस तरह के तनाव से लड़ रहे हैं। खुद को प्यार करने का समय है ये।

जब भी आपके मन में ये प्रश्न आये कि क्या मुझे थेरेपी की ज़रूरत है, तो आप ज़रूर लें। इसके लिए कोई ऐसी गाइडलाइन्स नहीं हैं कि जब आप बहुत ज़्यादा तनाव में हैं तभी मेन्टल हेल्थ प्रोफ़ेशनल्स की मदद ले सकते हैं।

मूल चित्र : Still from #menopauseawareness/Milan Thakar, YouTube(for representational purpose only)

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About the Author

Shagun Mangal

A strong feminist who believes in the art of weaving words. When she finds the time, she argues with patriarchal people. Her day completes with her me-time journaling and is incomplete without writing 1000 read more...

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