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पटाखों की रात

Posted: अप्रैल 1, 2021

क्या खूब लगती हैं शादियों वाली रातें, जब रौशनी पटाखों से होती है, दुल्हन को अंगारों से जलाकर नहीं।

उस रात आसमान से
तारे बरस रहे थे,
झिलमलाते, चटखते,
नीले, पीले, बैंगनी।

इससे पहले कि वो
गिर कर बिखर पाते,
एक दूसरी लकीर,
शूं कर
खींच जाती आस्मां में,
फिर और तारों की
बरसात होती।

पूरी रात ऐसे ही बरसते रहे,
तारे ये झिलमिलाते।
क्या खूब लगती हैं
शादियों वाली रातें।
जब रौशनी पटाखों से होती है,
दुल्हन को अंगारों से
जलाकर नहीं।

मूल चित्र: via youtube 

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Vartika Sharma Lekhak is a writer based in India. She is the author of the

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