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अब मैं नहीं आप अपनी औकात में रहेंगे…

अभी तक वह सोचती आज सोम का दिन अच्छा नहीं निकला होगा उसे ऑफिस में काम बहुत है, तो वो कहाँ अपनी भड़ास निकालेगा? 

अभी तक वह सोचती आज सोम का दिन अच्छा नहीं निकला होगा उसे ऑफिस में काम बहुत है, तो वो कहाँ अपनी भड़ास निकालेगा? 

“बेवकूफ औरत! अपनी औकात नहीं पता तुझे? औरत है औरत की तरह रह, समझी?’’ ये शब्द मोनी के कानों में पिघले सीसे से उतर गए।

अब तो उसे आदत सी हो गई है अपने पति सोम से अपशब्द सुनने की। घर में जब भी कुछ ख़राब हो जाता है या सोम का मूड बिगड़ा हो उस दिन तो मोनी की आफत ही आ जाती। पर आज जब सोम ने बच्चों के सामने उसे बुरी तरह फटकारा तो उसका दिल जार-जार रोने लगा।

क्या उसे बोलने का कोई अधिकार नहीं है? क्या वह सिर्फ़ अपशब्द सुनने के लिए इस घर में आई है? अभी तक वह सोचती आज सोम का दिन अच्छा नहीं निकला होगा उसे ऑफिस में काम बहुत है, तो वो कहाँ अपनी भड़ास निकालेगा? पत्नी से ही तो कहेगा ना।

पर कुछ दिन से वह देख रही थी कि उसके बेटे शानू में बहुत परिवर्तन आने लगा है। अब वह मोनी को बात-बात पर पलट के जबाव देने लगा है। पर उस दिन शाम से सब कुछ बदल गया।

उस दिन सोम अपने मित्रों के साथ बैठा ठहाके लगा रहा था। मोनी गर्मा-गर्म पकौड़े, दही-बड़े और ठंडाई उन्हें परोस रही थी कि तभी उसके हाथ से चटनी की कटोरी छूट गई और पूरे कमरे में चटनी फ़ैल गई।

सोम ने गुस्से में दोस्तों के सामने ही गाली देना शुरू कर दिया और जैसे ही अपना हाथ उसको मारने के लिए उठाया, मोनी ने उसके हाथ को पकड़ लिया और कहा, “सोम मैंने आज तक आपको कभी कुछ नहीं कहा पर अब और नहीं। आप मेरी बात-बात पर बेईज्ज़ती करते हैं।

मैंने भी सोचा ये तो हर पुरुष का अधिकार होता है, पर आपको देख कर हमारा बेटा शानू भी यही सब सीखने लगा है और मैं नहीं चाहती कि मेरे घर से एक और ऐसा पुरुष निकले जो महिलाओं को पैर की जूती समझे।

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जो चीज़ मेरी सास ने नहीं रोकी वो आज मैं रोकती हूँ, ताकि किसी और लड़की को वो ना झेलना पड़े जो आज तक मैं झेलती आई हूँ। तो आज के बाद हमारे घर में ये सब नहीं होगा।”

सोम का हाथ नीचे गिर गया और शर्मिंदगी और झेंप से उसकी आँखें झुक गईं। उस दिन से मोनी के घर में परिवर्तन आने लगा।

गलत बातों  को रोकना भी आवश्यक हो जाता है इसलिए गलत बातें चाहे घर में हों या बाहर उनके खिलाफ आवाज उठाइए तभी हम पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही गलत बातों को रोक पाएँगे।

मूल चित्र : Still from Double Horse Rava Ad, YouTube

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shalini verma

I am Shalini Verma ,first of all My identity is that I am a strong woman ,by profession I am a teacher and by hobbies I am a fashion designer,blogger ,poetess and Writer . मैं सोचती बहुत हूँ , विचारों का एक बवंडर सा मेरे दिमाग में हर समय चलता है और जैसे बादल पूरे भर जाते हैं तो फिर बरस जाते हैं मेरे साथ भी बिलकुल वैसा ही होता है ।अपने विचारों को ,उस अंतर्द्वंद्व को अपनी लेखनी से काग़ज़ पर उकेरने लगती हूँ । समाज के हर दबे तबके के बारे में लिखना चाहती हूँ ,फिर वह चाहे सदियों से दबे कुचले कोई भी वर्ग हों मेरी लेखनी के माध्यम से विचारधारा में परिवर्तन लाना चाहती हूँ l दिखाई देते या अनदेखे भेदभाव हों ,महिलाओं के साथ होते अन्याय न कहीं मेरे मन में एक क्षुब्ध भाव भर देते हैं | read more...

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