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जी हाँ, मैंने अपने लड़के को लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाया है…

Posted: अप्रैल 7, 2021

हर माँ की जिम्मेदारी दुगनी होती है क्यूँकि उसे सिर्फ अपनी संतान को पालना ही नहीं होता बल्कि संस्कारों की खाद से सींचना भी होता है।

घर के कामों से तनु निपटी ही थी कि फ़ोन की घंटी बजने लगी। देखा तो नंबर तनु के बेटे अनुज के स्कूल से था।

“हेलो, मिसेस माहेश्वरी आप जैसे ही हो सके स्कूल आइए, अनुज के बारे में प्रिंसिपल मैम को कुछ बात करनी है।”

“क्या बात है मैम अनुज ठीक तो है?” तनु ने घबराहट से पूछा।

“आप जल्दी आयें, अनुज ठीक है।”

जल्दी से तैयार हो तनु ने ऑटो लिया। अमित भी शहर से बाहर थे। जाने क्या बात होगी? अनुज तो बहुत होशियार बच्चा है आज तक पीटीएम में भी किसी टीचर ने कोई शिकायत नहीं की अनुज की, फिर आज सीधा प्रिंसिपल ने मिलने बुला लिया? जाने कितने विचार तनु के दिल में आ जा रहे थे। घर से स्कूल तक का बीस मिनट का रास्ता घंटों लम्बा लगा रहा था आज तनु को।

प्रिंसिपल के कमरे के बाहर पिउन को अपना नाम और अनुज का नाम बताया तो उसने इंतजार करने को कह, अंदर प्रिंसिपल के कमरे में चला गया।

“आप अंदर जाइये मैडम।” पिउन के कहने पे ईश्वर का नाम ले तनु अंदर चली गई।

“हेलो मैम, मैं मिसेस तनु माहेश्वरी, अनुज महेश्वरी की माँ।”

“बैठिये मिसेस माहेश्वरी”, प्रिंसिपल साहिबा ने अपना चश्मा साफ करते हुए एक खाली कुर्सी पे बैठने का इशारा किया।

“आपने इस वक़्त बुलाया क्या बात है मैम?” अपनी जिज्ञासा जाहिर कर तनु ने पूछा।

तभी एक महिला भी अंदर आ गई।

“इनसे मिले मिसेस माहेश्वरी, ये हैं मिसेस शुक्ला।”

अब तक तनु की घबराहट और जिज्ञासा चरम पे थी, किसी तरह मुस्कुरा कर मिसेस शुक्ला को हेलो किया।

“बताइये ना मैम अनुज की क्या शिकायत है?”

“कोई शिकायत नहीं है मिसेस माहेश्वरी।” इस बार मुस्कुराते हुए मिसेस शुक्ला ने कहा।

“बात ऐसी है की मेरी बेटी अंतरा इस स्कूल में क्लास छठी कक्षा में पढ़ती है, कल उसे स्कूल में ही फर्स्ट पीरियड आ गया था। जैसा कि आपको पता है बुधवार को स्कूल की यूनिफार्म सफ़ेद होती है। बच्ची उन धब्बों को देख परेशान हो गयी और स्कूल के पीछे वाले मैदान में छिप गई।

लंच टाइम में जाने कैसे आपके बेटे अनुज की नज़र वहाँ खड़े कुछ लड़कों पे गई, जो अंतरा को देख उसका मज़ाक बना रहे थे और परेशान अंतरा और परेशान हो गयी।

अनुज ने जब अंतरा के कपड़े और उसकी परेशानी देखी तो सब समझ गया। अनुज ने उन लड़कों को डांटा कि एक परेशान लड़की की मदद करने की बजाय तुम सब उसका मज़ाक बना रहे हो ‘शर्म आनी चाहिये।’

लड़के तो डांट खा भाग गए और अंतरा को अपना स्वेटर उसे बाँधने को दे दिया और स्कूल की नर्स मैम के पास पहुंचा दिया। स्कूल से फ़ोन आने पे मैं अंतरा को ले कर घर आ गई। शांत होने पे अंतरा ने मुझे सब कुछ बताया। इतनी ठण्ड में बिना स्वेटर के अनुज रहा लेकिन उसने अंतरा की मदद की।”

तनु दंग हो सारी बातें सुन रही थी और सोच रही थी कल ही मैंने कितना डांटा था अनुज को जब उसे इतनी ठण्ड में बिना स्वेटर के देखा था। हँसते हुए सारी डांट खा गया मेरा बच्चा।

“मुझे आपसे मिल कर आपको शुक्रिया कहना था मिसेस माहेश्वरी। अगर सभी लड़कों की माँ आप जैसी हो और अगर सभी लड़कों की परवरिश अनुज जैसी हो तो दुनिया लड़कियों के लिए बेहतर हो जाए।”

“मिसेस शुक्ला की बातों से पूरी तरह सहमत हूँ मिसेस माहेश्वरी। अनुज दसवी कक्षा का स्टूडेंट है बच्चों को साइंस में पीरियड्स के बारे में पढ़ना तो होता है लेकिन जैसी संवेदनशीलता अनुज ने दिखाई वो सिर्फ किताबी ज्ञान से नहीं मिलती उसके लिये आप जैसी माँ की जरुरत होती है जो अपने बच्चों को लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाती हैं।”

“अनुज ने हमेशा इस स्कूल का मान पढ़ाई और स्पोर्ट्स में तो बढ़ाया ही है लेकिन उसके संस्कार और उसकी परवरिश ने आज उसपे गर्व करने का एक और मौका दे दिया है हमें मिसेस माहेश्वरी।” प्रिंसिपल साहिबा ने कहा।

प्रिंसिपल साहिबा और मिसेस शुक्ला की बातें सुन तनु का सिर फ़क्र से ऊँचा हो उठा था और ऑंखें ख़ुशी से गीले हो गए।

आजकल एक बेटे को भी माँ वही संस्कार देती है जो सदियों से वो सिर्फ अपनी लड़की को देते आई। लड़का हो या लड़की सबकी इज़्ज़त करो!

एक माँ को सिर्फ अपनी संतान को पालना ही नहीं होता बल्कि संस्कारों के खाद से खींचना भी होता है, तभी तो समय आने पे वो गर्व से कह सकती है की हाँ ये मेरी परवरिश है। जैसे आज तनु को गर्व हो रहा था अपने अनुज पे, अपनी परवरिश पे।

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मूल चित्र: Mother’s Love/Meri Maa via YouTube 

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