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ओरल सेक्स से एसटीडी नहीं होता है: एसटीडी से जुड़े ये 11 मिथक कभी ना मानें

Posted: मार्च 15, 2021

यौन संचारित रोगों के बारे में बात करना एक टेबू है जो महिलाओं में एसटीडी के मिथक को और बढ़ावा देता है। आइए इन मिथकों पर चर्चा करते हैं।

यह लेख पहले विमेंस वेब पर यहां अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ है। इसका अनुवाद अनिमा कुमारी ने किया है।

आज भी शिक्षित, जागरूक महिलाओं के बीच एसटीडी (यौन संचारित रोग) केवल फुसफुसाते हुए ही बोला जाता है। ये एक ऐसा शब्द है जिसे मुझे लगता है कि आज के परिवेश में, विशेष रूप से युवा महिलाओं के बीच बुलंद होकर बोलने की ज़रूरत है।

एक बार फैक्ट्स पर नज़रें घूमाते हैं

30 से ज्यादा बैक्टीरिया, वायरस और पेरेसाइट यौन संचारित में मौजूद है।

सबसे आम परिस्थितियों में ये गोनोरिया, क्लैमाइडिया संक्रमण, सिफलिस, ट्राइकोमोनिएसिस,  जननांग दाद, जननांग वॉर्टस, ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस  (एचआईवी) संक्रमण और हेपेटाइटिस बी संक्रमण का कारण हो सकते हैं।

महिलाओं में एसटीडी ने उन्हें जोखिम में डाल सकते हैं। ये महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ ही उनके यौन जीवन और आनंद को प्रभावित कर सकते हैं। यह कुछ मामलों में घातक हो सकते हैं, खासकर उन महिलाओं के लिए जो बच्चे पैदा करना चाहती हैं (या दुर्घटना से गर्भवती हो जाती हैं)। उनके अजन्मे बच्चों में यह संक्रमण होने का जोखिम ज्यादा होता है।

महिलाओं में एसटीडी एक ऐसा विषय है जिस पर शायद ही किसी भी मंच पर कभी चर्चा की जाती है, और उपरोक्त सभी कारणों के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि महिलाओं को उनके बारे में पता होना चाहिए।

भारत में महिलाओं में एसटीडी की समस्या के परिमाण के बारे में आंकड़े मौजूद है पर वह भी बहुत आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। 2014 की स्थिति में आईसीएमआर का अनुमान है कि लगभग 6-8% भारतीय अडल्ट आबादी में एसटीडी या रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इन्फेक्शन है। जनसंख्या के आकार को देखते हुए यह काफ़ी अविश्वसनीय संख्याएँ हैं। जिनसे हमारे देश को निपटना चाहिए। इसके अलावा, एडोलसेंट और अडल्ट में भी जोखिम बढ़ रहा है – वह भी, उनके जीवन में एक समय पर जब वे अपने भविष्य के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पूरी तरह से नहीं जानते हैं।

अब हम उन मिथकों पर चर्चा करते हैं जो एसटीडी पर मौजूद हैं:

मिथक 1: महिलाओं में एसटीडी आसानी से पहचाना जा सकता है

कई एसटीडी महिलाओं के जेनिटल और ओरल अल्सर्स एंव घावों में मौजूद रहते हैं। कई बार ऐसा होता है कि बाहरी लक्षण एंव संकेत नही पनपते हैं। इनमें से सबसे खतरनाक एचआईवी संक्रमण है जिसे एड्स का रूप लेने में वर्षों लग जाते हैं लेकिन ये वायरस व्यक्ति को परेशान कर सकता है और साथी के लिए एक संभावित खतरा बन सकता है।

मिथक 2: यह तभी फैलता है जब किसी के कई पार्टनर होते हैं

हालांकि यह सच है कि एक से ज़्यादा पार्टनर या संक्रमित पार्टनर्स के साथ कई बार सम्पर्क में आने से महिलाओं में एसटीडी का खतरा बढ़ जाता है, यहां तक की संक्रमित पार्टनर के साथ एक बार सम्पर्क में आने से ही खतरा बढ़ जाता है। ये बात फिल्म ‘फिर मिलेंगे’ में भी दिखाई गई है।

मिथक 3: डायग्नोसिस करने की प्रकिया जटिल एंव कठिन है

अधिकाश संक्रमणों का निदान एक साधारण सिम्पल ब्लड टेस्ट या यदि घाव हैं तो वहां से स्वाब लिया जा सकता है। परीक्षणों के परिणामों को मेल या एसएमएस के द्वारा रोगी तक आसानी से भेजा जाते हैं, जिससे रोगी की गोपनीयता बनी रहे। इसके अलावा कई ऑनलाइन लैब हैं, जो होम टेस्टिंग की सुविधा प्रदान करते हैं और कोई भी व्यक्ति इस सुविधा का उपयोग पूरे आत्मविश्वास के साथ  कम समय में कर सकता है।

मिथक 4: एसटीडी का कोई इलाज नहीं है

अधिकांश रोगो का इलाज एंटीबायोटिक से हो जाता है, जो की सुरक्षित भी है। स्वच्छ, सार्वजनिक और साथ ही निजी अस्पताल सेट-अप में ये असानी से उपलब्ध है। यहां तक कि एचआईवी, एक बार डायग्नोस होने के बाद, इसके इलाज़ से पूर्ण रुप से विकसित एड्स से भी बचा सकता है। सभी को एक हेल्थ केयर प्रदाता से संपर्क करना होगा और दी गई चिकित्सा सलाह का पालन करना चाहिए।

मिथक 5: एक ही व्यक्ति के साथ रिलेशनशिप में रहने से एसटीडी नहीं होता

काफी हद तक, एक ही साथी होने के कारण यह जोखिम कम हो जाता है, लेकिन यह पूर्ण रुप से सुरक्षित नहीं है। इसीलिए हर रिश्ते में सुरक्षित सेक्स करने की आवश्यकता होती है।

मिथक 6: ओरल सेक्स से एसटीडी नहीं होता है

ओरल, एनल एंव वजाइनल सेक्स रोग प्रसारित कर सकते हैं। हालांकि योनि सेक्स में संचरण की संभावना अधिक होती है। एक ही यौन संबंध में होने पर भी सेफ सेक्स ही करना अनिवार्य है। किसी भी तरह के यौन संबंध, चाहे समलैंगिक हो या विषमलैंगिक – सभी में यौन संचारित रोगों की संभावना होती है।

मिथक 7: संक्रमण अपने आप दूर हो जाएगा

कई संक्रमण थोड़े समय बाद कम हो जायेगे लेकिन इसके लॉंगटर्म इफेक्टस संक्रमित व्यक्ति के लिए विनाशकारी हो सकते है क्योंकि वे एक वाहक बन कर आपके साथी को कभी भी संक्रमित कर सकते हैं। और भले ही लक्षण कम हो जाए पर इसका असर बांझपन, पेल्विक सूजन जैसी समस्या उतपन्न कर सकता है।

मिथक 8: ओरल गर्भ निरोधक या सीयू-टी सम्मिलन एसटीडी से रक्षा करते हैं

ये गर्भ निरोधक हैं जो अनचाही प्रेग्नेंसी से बचाते है और इनकी एसटीडी के रोकथाम के निवारण में कोई भूमिका नहीं है। एसटीडी की रक्षा में कंडोम एकमात्र बैरियर है।

मिथक 9: उन्हें एसटीडी के बारे में शिक्षित करना जल्दबाजी है

ध्यान दें, किशोरों और युवाओं को अधिक सुरक्षा की ज़रुरत है और अधिक महत्तवपूर्ण है कि ये सभी एसटीडी रोगों के बारे में शिक्षित हो और यह जाने कि जैसे अनचाही प्रेग्नेंसी से खुद की रक्षा करना महत्तवपूर्ण है ठीक वैसे ही यौन संचारित रोगों से भी सुरक्षा ज़रूरी है। इसीलिए सभी यौन शिक्षाओं में सेफ सेक्स के बारे में जानकारी शामिल करनी चाहिए।

मिथक 10: एसटीडी केवल सेक्स करने से ही फैलता है

कई एसटीडी, उल्लेखनीय रुप से एचआईवी, सिफलिस, हेपेटाइटिस बी खुन के ज़रिये, इंजेक्शन और अन्य असुरक्षित प्रेक्टिसेस के माध्यम से भी संक्रमण फेला सकते हैं जैसे IV ड्रग एब्यूजर्स के बीच सुइयों का बदलाव करना।

मिथक 11: एसटीडी केवल हेट्रो सेक्सुअल सेक्स/ होमो सेक्सुअल सेक्स तक सीमित है

एसटीडी सभी प्रकार के पार्टनर, एक ही सेक्स पार्टनर, ट्रांसजेंडर्स, मोनोगैमस, पति- पत्नी, सेक्स वकर्स, आदि सभी में फैल सकती है। कोई भी इन बीमारियों के संपर्क में आने से, या उन्हें फैलाने से बचा नहीं है।

हम इस समस्या से कैसे निपटेंगे?

अब जब हमने एसटीएसडी के बारे में आम मिथकों के बारे में बात की है, तो हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि हम समस्या से कैसे निपट सकते हैं। मुख्य आधार पर ये रोग,  और जल्द ही इसका पता चलना और उपचार ही रोकथाम है। रोकथाम प्राथमिक या माध्यमिक हो सकती है।

प्राथमिक रोकथाम

प्राथमिक रोकथाम के लिए सभी एसटीडी के खिलाफ स्वयं की रक्षा करने की आवश्यकता होती है। यह केवल नियंत्रण से सबसे अच्छा होगा जो न तो व्यावहारिक है और न ही संभव है। इसलिए, इसमें बाधा गर्भ निरोधकों के साथ सुरक्षित सेक्स करना शामिल होगा। पुरुष और महिला दोनों कंडोम उपलब्ध हैं, लेकिन महिला कंडोम बहुत लोकप्रिय नहीं हैं। डायाफ्राम और सरवाइकल कैप अब बहुत आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। नियमित अंतराल पर संबंधित खुन की जांच करवाना भी समझदारी है। 

एचपीवी वायरस के खिलाफ टीकाकरण, गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर में लगाया जाता है, यह भी उपलब्ध है, और 11 से 18 वर्ष की आयु के सभी लड़कियों विशेष रूप से युवा लड़कियों के लिए यह टीकाकरण करना समझदारी का काम होगा। उपलब्ध अन्य टीकाकरण हेपेटाइटिस बी के खिलाफ है।  जो कि यौन संपर्क के साथ-साथ संक्रमित सुइयों और खुन प्रोडेक्ट के उपयोग से फैलता है। इसलिए मोनोग्रामोउस रिश्ते में बाँझ सुइयों का उपयोग करना और एक में भी छुरा या सुई साझा करने से बचना अनिवार्य है।

टैटू भी अनजाने में इस तरह के संक्रमणों को अनुबंधित करने का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। इसलिए सभी को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि केंद्र सावधानी से काम करता है।

सेकेंडरी रोकथाम

सेकेंडरी रोकथाम किसी भी संदिग्ध घाव, अल्सर, निर्वहन की स्थिति में एक चिकित्सक से परामर्श करना और इसका इलाज करना है। डॉक्टर आवश्यक परीक्षणों की सलाह देंगे और आवश्यक उपचार करने के अलावा, उन सलाहों का पालन करना सबसे अच्छा है।

महिलाओं को आमतौर पर कम उम्र में संक्रमण होने का खतरा होता है और इससे अजन्मे बच्चों को संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसलिए उन्हें और भी अधिक सावधान रहने की आवश्यकता होती है। माँ द्वारा प्रसारित कुछ बीमारियों में एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हरपीज, सिफलिस और क्लैमाइडिया शामिल हो सकते हैं।

एसटीडी से जुड़ा कोई कलंक नहीं होना चाहिए – यह सिर्फ एक बीमारी है जिसे किसी भी अन्य बीमारी के रूप में इलाज की आवश्यकता है। लक्षणों को नजरअंदाज करना या चिकित्सक को देखने से इंकार करना से समस्या और बढ़ने का कारण बनेगा और संभवत: लंबे समय तक अप्रिय और अशुभ अनुक्रमण होगा।

इलाज

महिलाओं में एसटीडी को रोकने के लिए विशिष्ट उपचार और आगे के उपाय इस लेख के दायरे से परे हैं – यह पाठकों को मिथकों के बारे में संवेदनशील करने के लिए है और उन मिथकों को सही पर्स्पेक्टिव में स्थापित करने का प्रयास करना है।

हालांकि यह अस्वीकार्य है कि बहुत सी महिलाओं और लड़कियों को गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित अन्य कारणों से पीड़ित होना जारी है। लेकिन जो अस्वीकार्य है और बहुत कम ध्यान में दिया जाता है वो है उन जटिलताओं का बोझ जो महिलाएं और लड़कियाँ सामना करती हैं अगर वे एसटीडी अनुबंध करते हैं। ये गंभीर हो सकते हैं जैसे महिलाओं और लड़कियों के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य को खतरा आदि।

मूल चित्र : still from the movie Raazi

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