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भारत का पहला जेंडर पार्क केरल में, अब सबको पढ़ना होगा लैंगिक समानता का पाठ

भारत का पहला जेंडर पार्क लाएगा जेंडर म्युज़ियम जिसमें इतिहास की उन घटनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा जिसमें देश की महिला आगे रहीं।

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भारत का पहला जेंडर पार्क लाएगा जेंडर म्युज़ियम जिसमें इतिहास की उन घटनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा जिसमें देश की महिला आगे रहीं।

केरल के कोझीकोड में जल्द ही देश का सबसे पहला जेंडर पार्क खुलने जा रहा है। 11 से 13 फरवरी को होने वाले जेंडर इक्वॉलिटी इंटरनेशनल सेमिनार (ICGE-II) के दूसरे संस्करण के मौके पर यह पार्क खोला जाएगा।

यह तीन टॉवर जेंडर पार्क लिंग समानता को बढ़ावा देने और लोगों के बीच इस मुद्दे को जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस पार्क पर कुल 300 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इस पार्क में एक जेंडर लाइब्रेरी, जेंडर म्यूज़ियम, एक एम्फ़ीथिएटर और एक कन्वेंशन सेंटर होगा।

जेंडर पार्क में क्या है ख़ास

जेंडर म्यूज़ियम

जेंडर म्यूज़ियम के ज़रिए इतिहास की उन सभी घटनाओं को प्रदर्शित करने की कोशिश की जाएगी जब देश की महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई। भारत देश में महिलाओं की स्थिति में कैसे-कैसे समय के साथ बदलावा आया है इसका पूरा घटनाक्रम भी इन म्यूज़ियम से माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत की महिलाओं ने ऐसे अनगिनत उदाहरण पेश किए हैं जिनके बारे में देश के हर नागरिक को ज़रूर पता होना चाहिए। यह म्यूज़ियम सबला महिलाओं के सशक्त कार्यों को सबसे समक्ष लाने की एक कोशिश है।

जेंडर लाइब्रेरी

सामाजिक विकास में महिलाओं की भूमिका को किताबों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाएगी। इस लाइब्रेरी में महिलाओं और लैंगिक समानता के विषयों से जुड़ी किताबें और रिसर्च उपलब्ध होगी।

कन्वेंशन सेंटर

इस स्टेट-ऑफ-दि-आर्ट कन्वेंशन सेंटर में 500 लोगों के बैठने की क्षमता है। किसी भी सेमिनार या इवेंट के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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एम्फीथिएटर

इन्हें आम तौर पर ओपन एयर थिएटर भी कहा जाता है जो एक क्रिकेट मैदान की सर्कुलर या ओवल आकार का बड़ा सा एरिया होता है। यहां पर कोई भी बड़ा कार्यक्रम, खेल या उत्सव का आयोजन किया जा सकता है। 11-13 फरवरी के बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन इस पार्क का उद्घाटन करेंगे।

लैंगिक समानता में भारत कहां है

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की साल 2020 की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट के मुताबिक भारत लिंगानुपात में 153 देशों की लिस्ट में 112वें स्थान पर था। यानि भारत में हर 100 लड़कों पर सिर्फ 91 लड़कियां होती हैं। ये संख्या बढ़ती जाएगी तो फासला और बड़ा होता जाएगा।

केरल का यह जेंडर पार्क इस दिशा में एक पहल ज़रूर हो सकता है लेकिन ज़मीनी स्तर पर भारत में लैंगिक असमानता दूर करने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है।

मूल चित्र : CivilHindiPedia

 

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