कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

मेरे पति ने मुझे घर से निकाल दिया लेकिन…

Posted: जनवरी 21, 2021

हमने सोचा माँ-बाप की इकलौती बेटी है, इतना बड़ा बिजनेस है, तो हमे ही मिलेगा। लेक़िन यहाँ तो बाप बेटी को कंगाल कर के गया।

“भईया ये वाली साड़ी दिखाना जरा”, रिया ने दुकानदार से कहा।

“मैडम ये बिक चुका है। आप कुछ और देख लीजिए।”

“लेकिन मुझे तो यही पसंद आयी।”

“एक ही पीस है। ये वरना मैं दूसरी दिखा देता।”

“किसने ली है?”

“वो मैडम जो कैश काउंटर पर ब्लैक चश्मे में खड़ी हैं।”

रिया को चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लगा। उसने पास से जाकर देखा तो वो उसके कॉलेज की दोस्त प्रेरणा थी।

“प्रेरणा तू यहाँ कैसे?” प्रेरणा और रिया एक दूसरे को देख के खुशी से उछल पड़े।

“अरे तू बता तू यहाँ कैसे?” प्रेरणा ने कहा।

“मेरे पति का ट्रांसफर यहाँ हो गया है। तो मैं भी यहाँ आ गयी”, रिया ने कहा। “तू सुना, मेरी छोड़! तू तो आज भी पूरी हीरोइन दिख रही है।”

“चल कुछ भी…अरे! कुछ कपड़े लेने आयी थी”, प्रेरणा ने कहा।

“अरे! मैं भी वही करने आयी थी। पतिदेव का जन्मदिन था, सोचा कुछ अच्छा ले लूँ। लेकिन कुछ पसंद नहीं आ रहा। जो साड़ी पसंद आयी वो तूने ले ली।”

“कौन सी वो रेड वाली? तुझे चाहिए? तो तू रख ले”, प्रेरणा ने कहा।

“सच्ची? थैंक्यू थैंक्यू…”, रिया ने कहा।

“हाँ!ड्राइवर कब तक आ रहे हो? ठीक है, फिर मैं कैब में चली जाऊंगी”, फोन पर बात करते हुए प्रेरणा ने कहा।
“क्या हुआ? कुछ प्रॉब्लम है क्या?” रिया ने कहा।

“कुछ नहीं, कार खराब हो गयी और आज ही बच्चों ने घर पर जल्दी बुलाया”, प्रेरणा ने कहा।

“चल मैं छोड़ देती हूं।”

“नहीं मैं कैब कर के चली जाऊंगी। तू परेशान मत हो।”

“क्या बात है? तू मुझे अपने घर एक कप चाय भी नहीं पिलाना चाहती?”

“अच्छा चल भाई, तू कहाँ मानने वाली है?”

“प्रेरणा, आज कार तू चला। आज कॉलेज के दिन याद करना चाहती हूं। ये पकड़ चाभी!”

लंबर्गिनी चलायी जानियो. गाना कार के अंदर एफ म पर बज रहा था और कार अपनी रफ्तार में थी। तभी रिया ने कहा, “क्या बात है यार, तेरी तो अदा से लेकर चाल तक कुछ भी नही बदला?
तुझे पता है अपने ग्रुप में आजतक तेरी किस्मत की सब दाद देते हैं कि क्या किस्मत पायी तूने।  बिना एक रुपया दहेज दिए पैसे वालों का रिश्ता मिल गया लड़की को।

मैं तो नहीं आ पायी थी लेकिन अपनी दोस्त रेखा ने बताया कि तू और तेरे पतिदेव जयमाल के स्टेज पर डांस करते हुए गए थे। शादी में किया तेरा डांस मेरे सैया सुपरस्टार  आज भी सबके दिमाग मे रहता है। मैं तो फैन हो गयी जीजू की…प्रेरणा तू कुछ बोल क्यों नहीं रही? घर में और कौन-कौन है?”

तभी कार प्रेरणा रोकती है और उसका फोन बजने लगता है। प्रेरणा फोन उठा कर कहती है, “बस घर के बाहर ही हूँ बच्चों। अभी आती हूँ।”

“आजा रिया मिलाती हूँ तुझे अपने बच्चों से। देख पचीसों बार फोन कर लिया। और बात क्या? सिर्फ जल्दी आना।”

रिया और प्रेरणा जैसे ही अंदर जाते हैं, दरवाजा खुलते ही बच्चे उस पर फूल बरसाते हुए बोले, “हैप्पी बर्थडे टू यु, हैप्पी बर्थडे डिअर मम्मी…हैप्पी बर्थडे टू यु!”

रिया ने देखा पूरा घर रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजा रखा था और अपने हाथों से बना के प्यारी-प्यारी ड्राइंग से घर को सजाकर रखा था। कार्ड बनाकर गिफ्ट दिया, जिसपर प्यारे-प्यारे सन्देश बच्चों ने अपनी मम्मी यानी प्रेरणा के लिए लिख रखे थे।

“‘ओह्ह माय गॉड! थैंक यू! थैंक यू! मेरे जिगर के टुकड़ों, कितना अच्छा सरप्राइज दिया आप लोगों  ने।”

“सच में मॉम? पसंद आया?” चार साल की सोनी ने प्रेरणा के गले लग के गाल पर किस करते हुए अपनी तोतली भाषा में कहा।

जवाब में प्रेरणा ने भी कहा, “अले! मेला बच्चा सच्ची मुची में मॉम को बहुत पसंद आया।”

“टन टना! केक कमिंग!”

सबका इतना प्यार देख के रिया की आंखों में आंसू आ गए, क्योंकि रिया के कोई बच्चा नहीं था। तभी रिया की नजर घर की दीवालों पर पड़ी जहाँ चारों तरह बच्चों की तस्वीरें सजी थीं। केक कटिंग के बाद प्रेरणा ने कहा, “अम्मा आप बच्चों को कमरे में लेकर जाइये।”

“बच्चो अब आप लोग कमरे में चलो।”

“मॉम ये आंटी कौन हैं?” सोनी ने कहा।

रिया ने प्यार से उसका गाल खींचते हुए कहा, “मैं आपकी मॉम की फ्रेंड हूं।”

रिया ने कहा, “प्रेरणा तेरी किस्मत तो सचमुच कमाल है। एक बेटा-बेटी से भरा पूरा परिवार एक औरत को और क्या चाहिए? सच है भाई तेरे लाइफ में तो तुझे सैया सुपर स्टार ही मिले। लेकिन तूने पूरे घर मे एक भी फ़ोटो जीजू की नहीं लगा कर रखी। ये कुछ समझ नहीं आया।”

प्रेरणा ने रिया को अम्मा की बनायी चाय पकड़ाते हुए कहा, ”क्यों कि जो है ही नहीं, उसकी फोटो क्या लगाना?” प्रेरणा ने कहा।
“मतलब? सॉरी मुझे नहीं मालूम था कि…”, रिया ने कहा।

“मतलब…हाँ हाँ जिंदा ही होंगे। मुझे नहीं पता…मगर ये डिअर कि मेरे सैया सुपरस्टार नहीं हैं। तुझे पता है जब मेरी शादी हुई तो मैं भी बाकी लड़कियों की तरह बहुत खुश थी क्योंकि पढ़ा-लिखा सम्पन्न परिवार था। सब बढ़िया था, सब ख़ुश थे। लेकिन तभी एक दिन माँ का फोन आया कि पापा अस्पताल में एडमिट हैं।

हम सब भागकर गए। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पापा इस दुनिया से जा चुके थे। उन्हें हार्टअटैक आया था। बिजनेस में बहुत बड़ा लॉस हुआ, जिसका सदमा वो बर्दाश्त नहीं कर पाए। पता चला उस नुकसान में कुछ भी नहीं बचा, उल्टा कर्जे ही हो गए हैं। ये जानते ही मेरे ससुराल वालों के साथ साथ मेरे पति का रवैया भी मेरे साथ बदल गया।

उस दिन से रोज मेरे साथ गाली-गलौज मारपीट होने लगी। मुझे समझ नहीं आता ये सब क्यों हो रहा है। तभी एक दिन मैंने मेरी सास और पति ने मुझे मारते हुए कहा, “हमने सोचा माँ-बाप की इकलौती बेटी है, इतना बड़ा बिजनेस है, तो हमे ही मिलेगा। लेक़िन यहाँ तो बाप बेटी को कंगाल कर के गया।”

तब मुझे समझ आया कि उन लोगों को मुझसे नहीं मेरे पापा के पैसों से मतलब था और मुझे घर से निकाल दिया। घर आयी तो माँ की भी हालत खराब थी। मैं खुद रो-रो के डिप्रेशन में चली गयी। समझ नहीं आता था कि आखिर ये सब कुछ मेरे साथ ही क्यों हुआ? तभी एक दिन माँ भी इस दुनिया को छोड़ कर चली गयी। लेकिन जाते जाते इतना कह गयी कि बेटा तू अब  अपना ख्याल रखना। औरत कमजोर नही होती। वो तो शक्ति का रूप होती है। आंसू पोछ और जिंदगी में आगे बढ़ बेटा क्योंकि जिंदगी कभी दोबारा नहीं मिलती तो इसको रो के मत बिता।

मैंने अर्श से फर्श का सफर देखा। मुझे वो घर भी बेचना पड़ा, कर्जे चुकाने के लिए। लेकिन मैंने गांठ बांध ली कि अब मैं कमजोर नहीं पड़ूँगी। रिश्तेदारों ने भी मुँह मोड़ लिया। लेकिन अम्मा ने मेरा साथ नहीं छोड़ा। वो मुझे अपने साथ अपने घर ले गयी। मुझसे कहा, “बिटिया आपके पापा का ही सब कुछ दिया हुआ है। आपको मैंने अपनी गोद मे बड़ा किया है।”

वहाँ से बहुत ठोकरें खायीं। भूखे रही। लेकिन एक बात तय कर लिया था कि अब झुकना और रुकना नहीं। फिर धीरे-धीरे मैंने अपना बिजनेस खड़ा किया। उसके बाद अपने सो कॉल्ड ससुराल वालों को सबक सिखाने का तय किया। उन लोगों पर केस किया। और मैं जीत भी गयी। लेकिन कहते हैं ना समाज में तलाक ली हुई और और अकेली माँ को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। रोज नए ताने, चरित्र पर लांछन, सब कुछ सुनना पड़ता।

कभी कभी दुःखी होने पर आत्महत्या का भी मन होता, तभी माँ की कही बातें याद आ जातीं। उसके बाद मैंने दोनों बच्चों को गोद लिया। इनकी भी किस्मत मेरी तरह ही निकली। इनको पैदा होते ही मरने के लिए मंदिर और रोड पर छोड़ दिया था इनके माता पिता ने। मेरे दोनों बच्चे मेरी जान, मेरी दुनिया हैं। तब मैंने जाना माँ बनने के लिए बच्चे को जन्म देना ही जरूरी नहीं। मैंने अपने दम पर एक बार फिर फर्श से अर्श का सफर तय किया। अब बता क्या अब भी कहेगी की मेरे सैया सुपरस्टार हैं?”

रिया की आंखों में आंसू थे। उसने प्रेरणा को गले लगाते हुए कहा, “प्रेरणा तू सचमुच बहुत सी महिलाओं के लिए प्रेरणा है। अगर हर महिला ऐसे ही मजबूत बन के उभरे तो कभी कोई उसके साथ गलत करने की कोशिश नहीं करेगा।”

दोस्तों कहानी पूर्णतया काल्पनिक है। उम्मीद करती हूं कि मेरी ये रचना आप सब को पसंद आएगी। किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए माफ करें। पसंद आने पर लाइक शेयर कमेंट जरुर करें। मुझे फॉलो भी करें।

मूल चित्र : Azraq Al Rezoan from Pexels 

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

टिप्पणी

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020