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तुम्हारी भाभी से ही है मायके की रौनक…

Posted: जनवरी 11, 2021

बस अनु मुझसे तो ये सब कह दिया लेकिन ख़बरदार जो प्रिया के सामने ये सब कहा तो। मैं तुम्हारी माँ हूँ, तो प्रिया की सास भी हूँ…

शीला जी एक बेहद समझदार और घर को साथ ले कर चलने वाली महिला थीं। घर पर पति, एक शादीशुदा बेटी अनु और एक छोटा बेटा सोहम था। बहुत प्यार से अपने बेटे सोहम के लिये प्रिया को बहु बना कर लायी थीं वे। जितनी सुलझी खुद शीला जी थीं, उतनी ही मुंहफट उनकी बड़ी बेटी अनु थी। ना कुछ सोचती ना समझती, जो जैसा देखती मुँह पे बोल देती। अनु के इस व्यवहार से शीला जी और उनके पति बहुत परेशान रहते। अनु को अपने इस स्वाभाव के कारण ससुराल में भी उलझनों का सामना करना पड़ता।

वैसे तो प्रिया बहुत पढ़ी लिखी थी लेकिन उसका रंग थोड़ा हल्का था। शीला जी ने प्रिया को उसके गुणों से पसंद किया था, ना कि रंग रूप देख और प्रिया भी अपने सास की अपेक्षा पे पूरी तरह खड़ी उतरी थी। जितना स्नेह शीला जी प्रिया से करती, उतना ही मान और सम्मान प्रिया भी अपने सास ससुर का करती।

प्रिया और सोहम की शादी के बाद अनु का अपने बच्चों के साथ गर्मियों की छुट्टी में मायके आने का प्रोग्राम बना। शीला जी अपनी बेटी के स्वाभाव से भली-भांति परिचित थीं तो थोड़ा घबरा भी रही थीं। वहीं दूसरी ओर प्रिया बेहद उत्साहित हो तैयारी में लगी थी, पहली बार नन्द जो घर आ रही थी।  खाने पीने से ले कर अनु के रूम की सजावट तक, प्रिया ने खुब दिल लगा कर किया था।

“बहु, सारी तैयारी तो हो चुकी है, अब तुम भी अच्छे से तैयार हो जाओ।”

अपनी सास की बात मान प्रिया अपने कमरे में चली गई और सोचने लगी ‘क्या पहनूँ?’ सोच विचार कर एक सुन्दर सा बांधनी प्रिंट का पीले और नारंगी रंग का सूट पहन लिया, कानो में छोटे-छोटे झुमके और माथे की बिंदिया ने प्रिया का रूप निखर आया था।

अपनी बहु को तैयार देख शीला जी भी ख़ुश हो गईं। समय पर अनु घर आ गई। अनु और बच्चों के आते ही घर में एक रौनक सी छा गई। अनु के दोनों बच्चे भी अपनी नई मामी को देख बहुत ख़ुश थे। सब नहा धो के नाश्ते के टेबल पर आये। तरह-तरह के नाश्ते को देख अनु के साथ बच्चे भी बहुत ख़ुश हुए और चटखारे ले खाना शुरु कर दिया, “वाओ मामी आपके हाथों में तो जादू है।”

प्रिया अपनी तारीफ सुन बेहद ख़ुश हुई और दुगने उत्साह से बच्चों को परोसने लगी। बच्चे खा कर टीवी देखने लगे और अनु अपने माँ के कमरे में लेट गई। पास ही शीला जी भी बैठ कर अनु से बातें करने लगीं। मौका देखते आदतन अनु शुरु हो गई, “माँ खाना तो भाभी ने अच्छा बनाया लेकिन देखने में तो एवरेज ही है। कहाँ मेरा भाई और कहाँ प्रिया भाभी। कोई मैचिंग ही नहीं दोनों में और तो और भाभी के कपड़ों की चॉइस भी अच्छी नहीं। इतनी गर्मी में इतना गहरा रंग कौन पहनता है?”

अनु की बात सुनते ही शीला जी समझ गईं कि अनु को अभी नहीं रोका तो घर की शांति भंग होना निश्चित है।

“देखो अनु, पहली बात तो तुम नन्द हो और प्रिया तुम्हारी भाभी। ये बात तुम कभी नहीं भूलना और अपनी बहु की बुराइयाँ अपनी बेटी के मुँह से तो मैं तो हरगिज़ नहीं सुनुँगी।”

“माँ, आप तो नाराज़ हो गईं। मेरा तो बस इतना कहना था कि भाभी के स्किन टोन के साथ पीला रंग नहीं जंचता।”

“बस अनु मुझसे तो ये सब कह दिया लेकिन ख़बरदार जो प्रिया के सामने ये सब कहा तो। मैं तुम्हारी माँ हूँ, तो प्रिया की सास भी हूँ और अपनी बहु के खिलाफ मुझे कुछ नहीं सुनना। मैंने प्रिया को अपनी बहु रंग रूप देख नहीं उसका सोने सा दिल और स्वाभाव देख कर बनाया है।”

“तुम्हें उसका रंग तो दिख गया लेकिन प्रिया की सेवा भाव नहीं दिखे? तुम्हारे और बच्चों के आने की ख़बर लगते ही प्रिया तैयारियों में जुट गई। ख़ुशी-ख़ुशी सब कुछ किया और सबसे बड़ी बात, घर को घर बनाना जानती है मेरी बहु प्रिया। मेरी बात हमेशा याद रखना अनु, मायका सिर्फ माँ से नहीं होता भाभी से भी होता है। इसलिए मेरी बात गांठ बांध लो, अपने रिश्ते कभी भी अपनी भाभी से मत बिगाड़ना वर्ना मेरे बाद मायके को तरस जाओगी। प्रिया जैसी भाभी लाखों में एक होती है अनु और अपनी भाभी की इज़्ज़त करोगी तो भाई भाभी दोनों का स्नेह पाओगी।”

अपनी माँ की नाराजगी देख अनु ने भी चुप रहने में अपनी भलाई समझी और झट से अपनी माँ से माफ़ी मांग ली, “माफ़ कर दो मेरी प्यारी माँ। मैं समझ गई मेरी गलती थी और अब आपकी बहु के लिये कभी कुछ गलत नहीं कहूंगी।”

तभी दरवाजे पे प्रिया आ गई, “दीदी सो गईं क्या?”

“नहीं भाभी आओ ना बैठो हमारे पास। आपसे बातें करने का मौका ही नहीं मिला मुझे”, अनु ने प्यार से हाथ पकड़ प्रिया को अपने पास बिठा लिया।

मुस्कुरा कर प्रिया भी वही बैठ अपनी नन्द से बातें करने लगी। दोनों नन्द भाभी को हँसते मुस्कुराते देख शीला जी ने भी सुकून की सांस ली। अपने घर की सुख शांति समय रहते जो बचा ली थी उन्होंने।

मूल चित्र : Photo by Krishna Studio from Pexels

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