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मनाइये अपनी लोहड़ी और मकर संक्रांति इन व्यंजन और लोक गीतों के साथ

Posted: जनवरी 10, 2021

नए साल की शुरुआत के साथ लोहड़ी और मकर संक्रांति के त्योहार भी आते हैं। तो आईये मनाते हैं उनकी कहानियों, स्वादिष्ट खानपान और नाच-गानों के साथ।

नए साल की शुरुआत के साथ कुछ दिन बाद लोहड़ी और मकर संक्रांति का त्योहार आता है। मकर संक्रांति को हिंदू धर्म में इस दिन को पूरे साल का सबसे शुभ दिन माना जाता है और देश ही नहीं विदेशों में भी इसे अलग-अलग रूप में मनाया जाता है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम के राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। लेकिन सबसे प्रसिद्ध है पंजाब-हरियाणा में मनाया जाने वाला त्योहार लोहड़ी।

मकर संक्रांति से ठीक पहले वाली रात को सूर्यास्त के बाद मनाया जाने वाला पर्व है लोहड़ी, जिसका का अर्थ है- ल (लकड़ी)+ ओह (गोहा यानी सूखे उपले)+ ड़ी (रेवड़ी)। हर साल 13-14-15 जनवरी को लोहड़ी और मकर संक्रांति के त्योहार आते हैं। इनके पीछे भी कुछ धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताएं हैं।

मकर संक्रांति के त्योहार

पौष के महीने में जब सूरज धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है तो हिंदू धर्म में इसे मकर संक्रांति के नाम से मनाया जाता है। ये दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। संक्रांत के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति होती है और गरम मौसम की शुरुआत होती है। माना जाता हैं कि इस भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर जाते हैं और क्योंकि शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं इसलिए इसे मकर संक्रांति का नाम दिया गया। महाभारत में शरशैय्या पर 58 दिनों तक लेटे भीष्म पितामह ने भी इच्छामृत्यु का वरदान पाकर इसी दिन अपनी देहत्याग की थी।

लोहड़ी के त्योहार की कहानी

“सुंदरिए-मुंदरिए हो, तेरा कोन विचारा हो, दुल्ला भट्टी वाला हो!” ये गीत लोहड़ी की कहानी कहता है जो दुल्ला भट्टी नाम के परोपकारी शख्स से जुड़ी है। ऐसा माना जाता है कि मुगल काल के दौरान सौदागर लड़कियों को खरीदते और बेचते थे। दुल्ला भट्टी उन लड़कियों को सौदागरों से चंगुल से छुड़वाकर उनकी शादी करवाता था। दुल्ला भट्टी को याद करने के साथ लोहड़ी के दिन किसान अपनी अच्छी फसलों के लिए ईश्वर का धन्यवाद भी करते हैं।

गीत-संगीत और पकवान के बिना हर त्योहार अधूरा

त्योहारों के दिन सिर्फ़ बाज़ार ही नहीं दिल भी गुलज़ार होते हैं। अच्छा खाना और गाना-बजाना हो तो मन तो प्रफुल्लित हो ही जाता है। मकर संक्रांति पर मकर तिल के लड्डू और खिचड़ी विशेष पकवान हैं और लोहड़ी पर मूंगफली, चिक्की, रेवड़ी नहीं तो क्या खाया।

तो आइए कुछ पकवान बनाते हैं और साथ में खाते हैं :-

खिचड़ी

मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाना शुभ माना जाता है। ये स्वादिष्ट और संपूर्ण आहार माना जाता है। ट्रेडिशनल अंदाज़ में इसे छिलका मूंग और चावल मिलाकर बनाया जाता है। क्योंकि खिचड़ी खाने में हल्की होती है इसलिए स्वास्थ्य के लिए इसके बहुत फायदे हैं। कुछ ऐसे बनाएंगे तो उंगलियां चाहते रह जाएंगे।

तिल के लड्डू

सर्दियों में शरीर को गर्मी की ज़रूरत होती है और तिल के लड्डू ये काम बखूबी करते हैं। इसके लिए आपको बस तिल, गुड़ और बहुत सारे घी की ज़रूरत है। एक बार बनाकर आप इसे आराम से महीने भर तक चला सकते हैं। तिल के ऐसे लड्डू जो मुंह में घुल जाएं, कुछ ऐसे बनाएं।

चिक्की

मूंगफली और गुड़ से बनी चिक्की लोहड़ी की सबसे ख़ास स्वीट डिश है। चाहें तो चीनी के साथ भी ये बन जाएगी लेकिन जो मज़ा गुड़ में है वो चीनी में नहीं आएगा। ये मिठाई बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए भी बहुत अच्छी है क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और आयरन होता है। बाज़ार से भी लाएं और घर पर भी बनाएं।

मक्की की रोटी

ते सरसों दा साग- ये नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। सरसों का साग और मक्के की रोटी लोहड़ी की पारंपरिक व्यंजनों में से एक है। मक्खन के साथ सरसों का साग खाने का अपना ही मजा होता है। साथ में लस्सी या दही मिल जाए तो वाह, वाह। देखेंगे तो बिना खाए रह नहीं पाएंगे:-

चिरौंजी मखाने की खीर

मखाना, चिरौंजी और गाढ़े दूध की बनी खीर लोहड़ी मीठे व्यंजनों में सबसे खास है। इसे बनाने में वक्त भी नहीं लगता है स्वाद भी जबरदस्त होता है।

लोहड़ी और मकर संक्रांति के त्योहार पर खाने के साथ-साथ हो जाए कुछ गाना-बजाना

लोहड़ी पर शाम को घर-परिवार के लोग लकड़ियों में आग लगाकर उसके चारों तरफ़ नाचते-गाते हैं और ख़ुशियां मनाते हैं। रेवड़ी की मिठास, रिश्तों की सुगंध और आग की हल्की-हल्की गर्मी से हर कोई ख़ुश हो जाता है। क्योंकि लोहड़ी पंजाब का प्रसिद्ध त्योहार है इसलिए इस पर बहुत सारे पंजाबी गाने बने हैं।

आइए सुनें कुछ गानें

फिल्म वीर-ज़ारा का ये गाना बहुत ही अच्छा है। ढोल और बोल का मेल आपको नाचने पर मजबूर कर देगा।

‘सुंदर मुंदरिए हो…’ गीत के बिना लोहड़ी पर्व अधूरा सा लगता है।

‘सानु दे लोहड़ी…‘ तेरी जीवे जोड़ी, ये गीत भी लोहड़ी के लोकगीतों में बहुत प्रसिद्ध है।

देश के कोने-कोने में लोहड़ी और मकर संक्रांति के त्योहार का जश्न

मकर संक्रांति केवल लोहड़ी तक सीमित नहीं है बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। जैसे-

  • तमिलनाडु में पोंगल के नाम से मकर संक्रांति चार दिनों तक मनाया जाता है। पहला दिन भोगी-पोंगल, दूसरा दिन सूर्य-पोंगल, तीसरा दिन मट्टू-पोंगल और चौथा दिन कन्‍या-पोंगल के रूप में मनाते हैं।
  • उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति को “खिचड़ी’ या ‘दान का पर्व’ कहते हैं जब गौ, ऊनी कपड़े, सोना, कंबल वगैरह दान किया जाता है।
  • बंगाल में इस दिन गंगासागर के नाम से हर साल विशाल मेला लगता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसी दिन गंगा नदी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर सागर में मिल गई थीं।
  • असम में मकर संक्रान्ति को माघ-बिहू अथवा भोगाली-बिहू के नाम से मनाते हैं।

त्योहारों के नाम और उन्हें मनाने का तरीक़ा भले ही अलग-अलग हो लेकिन उनकी आत्मा एक ही होती है। हर पर्व हमारे ख़ूबसूरत देश की संस्कृति की झलक है। बीता साल हमें बहुत कुछ सिखा गया और 2021 में उसकी सीख को अपनाते हुए अब आगे बढ़ना है। त्योहारों के रंग पिछली बार भले ही थोड़ी फीके थे लेकिन ये रंग फिर से खिलने के लिए तैयार है। हालांकि अभी भी आपको सावधानी बरतते हुए ही त्योहार मनाने होंगे लेकिन अपने उत्साह और उमंग को बरकरार रखिएगा। मुस्कुराइए, आप नए साल में आ गए हैं। लोहड़ी और मकर संक्रांति के त्योहार आप सभी को मुबारक!

मूल चित्र : Screenshot of Veer Zara, YouTube

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