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इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार में महिला पुलिस बल का आंकड़ा बढ़ रहा है

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट के नए आंकड़े बिहार में हो रहे बदलाव की ओर इंगित कर रहे हैं, जहां महिला पुलिस बल की सहभागिता बढ़ती दिखाई दे रही है।

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट के नए आंकड़े बिहार में हो रहे बदलाव की ओर इंगित कर रहे हैं, जहां महिला पुलिस बल की सहभागिता बढ़ती दिखाई दे रही है।

बिहार को लोग यूं तो पिछड़ा हुआ मानते हैं मगर इंडिया जस्टिस रिपोर्ट के ताजा आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है। यह रिपोर्ट टाटा ट्रस्ट की एक पहल थी, जिसमें सेंटर फॉर सोशल जस्टिस Common Cause, CHRI, DAKSH, TISS-Prayers और Vidhi Centre for Legal Policy शामिल थे।

बिहार के पुलिस बलों में महिलाओं का आंकड़ा 25.3% है और यह अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। वहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि तमिलनाडु में महिला पुलिस बल की संख्या 24.8% है, जिसके बाद 20.1% के साथ मिजोरम है। ऑफिसर्स श्रेणी में महिलाओं का आंकड़ा मात्र 6.1% है। इस सूची में सबसे निचले पायदान पर तमिलनाडु है, जिसमें पुलिस बलों में महिला पुलिस बल की संख्या बेहद कम है। वहीं हिमाचल प्रदेश में महिलाओं का पुलिस बल में योगदान महज 19.2% है।

केस निबटारे में महाराष्ट्र पहले

विविधता के आधार पर देखा जाए, तो कर्नाटक एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां एससी, एसटी और ओबीसी के लिए अधिकारी कैडर और कांस्टेबुलरी दोनों के लिए कोटा पूरा किया जाता है। वहीं छत्तीसगढ़ एकमात्र ऐसा राज्य है, जो केवल कांस्टेबुलरी के कोटा को पूरा करता है। वहीं केस के निबटारे में महाराष्ट्र को पहला स्थान मिला है।

इस रिपोर्ट में 1 करोड़ से अधिक और आठ छोटे राज्यों की आबादी वाले 18 बड़े और छोटे राज्यों में व्यय, रिक्तियों, महिलाओं, एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के प्रतिनिधित्व का विश्लेषण किया गया था।

हाईकोर्ट में महिलाओं की सहभागिता बेहद कम

हाईकोर्ट में महिला जजों के आंकड़ों में स्थिति बहुत दयनीय है क्योंकि महिला जजों का आंकड़ा बहुत कम है। सिक्किम के हाईकोर्ट में सिर्फ तीन जज हैं, जिसमें मीनाक्षी मदन राय अकेली महिला जज हैं। कुल मिलाकर, देश भर में हाईकोर्ट में केवल 29% महिला जज हैं, लेकिन सिक्किम को छोड़कर किसी भी राज्य में 20% से अधिक महिला जज नहीं हैं।

आंध्र प्रदेश में महिला जजों की संख्या केवल 19% है। साथ ही आंध्र प्रदेश के बाद पंजाब और हरियाणा हैं, जहां 18.2% ही महिला जज हैं। बिहार, उत्तराखंड, त्रिपुरा और मेघालय में एक भी महिला हाईकोर्ट में जज नहीं हैं।

पुरुष वर्चस्व क्षेत्रों में महिलाएं आगे

हालांकि कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो महिलाओं की सहभागिता उन क्षेत्रों में बढ़ी है, जिन क्षेत्रों में पुरुषों का वर्चस्व माना जाता था। पहले जहां महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 7% था, वह अब बढ़कर 10% हो गया है।

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इंडिया जस्टिस रिपोर्ट के नए आंकड़े बिहार में हो रहे बदलाव की ओर इंगित कर रहे हैं, जहां पुलिस बलों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ती दिखाई दे रही है। हालांकि महिला जजों की संख्या में बढ़ोतरी ना होना एक गंभीर विषय है क्योंकि न्याय के क्षेत्र में महिलाओं की कमी होना, समाज के अनेक मुद्दों को सामने लाने में परेशानी खड़ी कर सकता है।

महिलाएं धीरे-धीरे पुरुषों को टक्कर देने के लिए आगे बढ़ रही हैं, जिसमें सरकार को भी अपनी ओर से प्रयासों को बढ़ा देना चाहिए ताकि महिलाओं को अवसर मिलते रहे।

मूल चित्र : Indian Express (for representational purpose only)

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