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बांझपन के लिए सिर्फ अपनी बहु को ही दोषी न ठहराएं…

Posted: जनवरी 11, 2021

पुरुषों में भी इनफर्टिलिटी या बांझपन की समस्या देखी जाती है इसलिए केवल महिलाओं को बच्चा न होने के लिए ज़िम्मेदार ठहराना गलत है। 

आज भी समाज में एक विवाहित दंपति को सफल तब ही माना जाता है, जब शादी के एक-दो साल के बाद ही उन्होंने बच्चों को जन्म दे दिया हो। मगर जब ऐसे दंपति मां-बाप नहीं बन पाते हैं, तब समाज उन्हें असफल मान लेता है। 

आमतौर पर देखा जाता है कि मां-बाप नहीं बनने के कारणों में महिला और पुरुष के अंदर हार्मोन या अन्य किसी तरह की कमी का होना होता है, मगर समाज के पितृसत्तात्मक ढाँचे के कारण कठघरे में हमेशा एक महिला ही खड़ी मिलती है क्योंकि समाज एक औरत को बच्चा पैदा करने की मशीन समझता है। यह समाज में सालों से चलता आ रहा है इसलिए इसपर ज्यादा बातें नहीं हो पातीं। 

बच्चा होने के लिए केवल महिला नहीं हैं ज़िम्मेदार

बांझपन या इनफर्टिलिटी का कारण सिर्फ महिला तक सीमित नहीं रह सकता है क्योंकि जितना एक महिला बच्चों के जन्म के लिए ज़िम्मेदार होती है, उतना ही एक पुरुष भी होता है। बच्चों के होने के लिए महिला और पुरुष को 50-50 प्रतिशत की ज़िम्मेदारी होती है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि केवल महिलाएं ही बच्चा पैदा करने के लिए ज़िम्मेदार हैं। 

अगर कोई दंपति बिना सुरक्षा के शारिरीक संबंध बनाती हैं, मगर महिला प्रेंगनेट नहीं हो पाती तो इसे इनफर्टिलिटी कहा जाता है और ऐसे कपल्स को इनर्फटाइल कपल माना जाता है। आम भाषा में इसे बाँझपन भी कहा जाता है। भारत में अनेक दंपति माता-पिता बनने के सुख से वंचित रह जाते हैं। वहीं आंकड़ों की माने तो भारत में साल 2020 में वर्तमान प्रजनन दर 2.200 जन्म प्रति महिला है, इसमें साल 2019 से 0.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 

पुरुषों में क्या होती है बांझपन या इनफर्टिलिटी समस्या?

विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO की भारत में इनफर्टिलिटी पर आई रिपोर्ट के अनुसार भारत में इन्फर्टिलिटी से जुड़े अधिकांश केसों में से करीब 50 प्रतिशत केस पुरुष इनफर्टिलिटी से जुड़े थे। दुनियाभर में करीब 5 करोड़ से भी ज्यादा कपल्स इन्फर्टिलिटी की समस्या का सामना कर रहे हैं और चाहकर भी बच्चे को जन्म नहीं दे पा रहे हैं।  

  • करीब 30 साल पहले जहां भारतीय वयस्क पुरुषों का स्पर्म काउंट 60 मिलियन प्रति मिलिलीटर हुआ करता था, वह अब एक तिहाई हो गया है, मतलब अब स्पर्म काउंट घटकर 20 मिलियन प्रति मिलिलीटर हो गया है। 
  • स्पर्म काउंट की कमी होने को एजोस्पर्मिया कहा जाता है और आज यह अधिकांश पुरुषों में देखी जा रही है। पुरुषों का सेक्स ड्राइव नोर्मल रहता है और उनमें इरेक्शन भी होता है मगर सीमेन में स्पर्म की संख्या बहुत कम होती है, जिससे वह फर्टिलाइजेशन करने की स्थिति में नहीं होता है। 
  • किसी स्पर्म के बनावट में गड़बड़ी होती है, तो किसी के चाल में गड़बड़ी होती है, जिस कारण वह स्पर्म फर्टिलाइजेशन करने में सक्षम नहीं होता है। 
  • पुरुषों में बढ़ता हुआ मोटापा मतलब अगर बीएमआई इंडेक्स 30 से ज्यादा है, ऐसे में स्पर्म की क्वालिटी पर असर पड़ता है। हाइपर टेंशन और अन्य परेशानियों के कारण शरीर में टेस्टोस्टिरोन की मात्रा घट जाती है और सेक्स ड्राइव घट जाता है, जिस कारण इरेक्शन से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। 
  • स्मोकिंग और ड्रिकिंग के कारण भी स्पर्म काउंट में कमी देखी जाती है। लिहाजा इनफर्टिलिटी की समस्या बढ़ने लगती है। 
  • सिगरेट में पाए जाने वाला निकोटिन शरीर में इम्बैलेंस और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस पैदा करता है, जिससे फर्टिलाइजेशन और स्पर्म की क्वॉलिटी दोनों पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही अगर जिस जाने के दौरान पुरुष अगर एडिशनल स्पलिमेंट्स लेते हैं, तब भी फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ता है। 
  • स्टेरॉयड्स और टेस्टोस्टेरॉन इंजेक्शन भी स्पर्म के उत्पादन को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। साथ ही बहुत ज्यादा कॉफी पीने से भी फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ता है। यह समस्या और गंभीर तब हो जाती है, जब इनफर्टिलिटी की परेशानी पहले से ही हो। 
  • वहीं शुगर की समस्या होने के कारण भी सीमन की क्वॉलिटी खराब हो जाती है और इजैक्युलेशन से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं।

पुरुषों में ये चीज़ें आमतौर पर देखी जाती हैं इसलिए केवल महिलाओं को जिम्मेदार ठहराना सरासर गलत हैं। हालांकि महिलाओं में भी इनफर्टिलिटी की समस्या देखी जाती है। 

महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या के कारण?

  • जिन महिलाओं का पीरियड् साइकिल 35 दिन से अधिक या 21 दिन से कम होता है, उनमें इनफर्टिलिटी की समस्या देखी जा सकती है। 
  • लगभग 15 प्रतिशत महिलाएं ओवुलेशन की परेशानियों से जूझ रही हैं, जिसमें अंडे ओवरी से बाहर नहीं निकल पाते और गर्भधारण करना असंभव हो जाता है। इसे ओव्यूलेशन डिसऑर्डर कहा जाता है।
  • हार्मोन के असंतुलन के कारण भी इनफर्टिलिटी की समस्या होने लगती है, जिसमें हार्मोन का रिसाव करने वाली ग्रंथिया ठीक तरह से काम नहीं करती। 
  • फेलोपियन ट्युब में ब्लॉकेज का होना भी इनफर्टिलिटी का एक बड़ा कारण बनता है क्योंकि फर्टिलाइजेशन नहीं होता। आमतौर पर सभी सामान्य फर्टिलाइजेशन फेलोपियन ट्युब में ही होते हैं। 
  • एंडोमेट्रियल टिशू जब गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगते हैं, तब पेल्विक अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं और एक महिला के गर्भधारण होने में बाधा उत्पन्न करते हैं, इसे एंडोमेट्रियोसिस कहा जाता है।
  • अधिक उम्र के गुज़र जाने कारण, तनाव, मादक पदार्थों के सेवन करने के कारण और बदलते लाइफ स्टाइल के कारण भी महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या देखी जाती है। 

पटना की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कल्पना सिंह बताती हैं कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में बांझपन या इनफर्टिलिटी की समस्या होती है। आजकल हालांकि उपचार के जरिए दंपति संतान पा सकते हैं मगर केवल महिलाओं को जिम्मेदार ठहराना सरासर गलत हैं। बच्चा होने में परेशानी आने पर हर कपल को अपनी जांच करवानी चाहिए। 

डिस्क्लेमर : लेख में मौजूद बातें इंटरनेट से लिए गए हैं। परामर्श के लिए डॉक्टर से मिलना जरुरी है क्योंकि सबकी समस्या भिन्न हो सकती है।  

मूल चित्र : cheekudigital from Getty Images via Canva Pro 

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