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पापा अगर आप ही मेरा साथ नहीं देंगे तो…

Posted: दिसम्बर 29, 2020

सबसे बड़ा सवाल पापा, जब आप ही मेरे सपने पूरे करने में मेरा साथ नहीं देंगे, तो कोई कल का नया रिश्ता कैसे मेरा साथ देगा?

प्यारे पापा,

आज सुबह जब आपसे आगे पढ़ने के लिए लंदन जाने की बात की तो आपने कहा, “हमें जितना पढ़ाना था पढ़ा लिया, आगे अपने घर जाकर पढ़ना। अगर पति चाहे तो जहाँ मर्ज़ी जाकर पढ़ना।” पापा, आपकी इस बात से मेरा बहुत दिल दुःखा और मैं यह सोचने पर मजबूर हो गयी कि क्या यह मेरा घर नहीं है? मैं जानती हूँ आपका मतलब वो नहीं था। पर आपने कहा तो ऐसा ही न?

बचपन से लेकर आज तक मैंने आपका सिर हमेशा गर्व से ऊँचा रखा है। पढ़ाई में मैं हमेशा ही क्लास में फर्स्ट आती थी। कॉलेज में जाकर भी मैंने यह कायम रखा और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध कॉलेज की यूनिवर्सिटी रैंकर बनी। मुझे याद है जब मुझे कॉलेज के फाउंडर्स डे पर अवार्ड मिला था तो आप कितने खुश थे। आपको तो पता ही है कि मुझे पढ़ाई करने का कितना शौक है। मुझे और आगे पढ़ना है, मुझे डॉक्टर बनना है। मैं चाहती हूँ कि लोग आपको मेरे कारण जानें।

पापा, इस समाज ने कभी महिलाओं को आगे नहीं बढ़ने दिया है। कभी शादी तो कभी ‘लोग क्या कहेंगे‘ कह कह कर हमेशा पीछे धकेला है। फिर भी आप उन पिताओं में से नहीं जो लड़का लड़की में भेदभाव करते हैं। बल्कि में तो यह कहूँगी कि आपने हमेशा मुझे मेरे भाई से ज़्यादा प्यार किया है। याद है, 2014 में जब में दिल्ली जाकर पढ़ना चाहती थी, तो घर पे सबने कितना मना किया था, फिर भी आपने मुझे मेरे पसंद की कॉलेज में पढ़ाया। मुझे दिल्ली से ही अपना स्नातक करना था तो आपने उसके लिए भी आपने एक भी बार मना नहीं किया। जब आज तक कभी मन नहीं किया तो आज उम्र का और शादी का हवाला देकर आप मुझे मना क्यूँ कर रहे हो? नहीं, ये मेरे पापा नहीं बोल रहे, यह तो पितृसत्ता बोल रही है। जिसने पिता के दिल पर पर्दा डाल दिया है।

मैं जानती हूँ कि आप हर हालत में सिर्फ मेरी ख़ुशी चाहते हैं पर मेरी ख़ुशी इस समय आगे पढ़ने में है। हमारे इस समाज ने सालों से प्रथा चला रखी है जिससे सबको यह ही लगता है कि लड़की की ख़ुशी शादी में है। लेकिन यह सच नहीं है पापा। शादी जीवन का आखिरी पड़ाव नहीं है। शादी के बिना भी एक लड़की का अस्तित्व होता है, उसकी पहचान होती है। पापा, जैसे आप मुझे खुश देखना चाहते हैं वैसे ही मैं भी आपको खुश देखना चाहती हूँ। लेकिन ज़रा सोचिये पापा, क्या शादी के बाद मैं आगे पढ़ पाऊँगी? क्या यह समाज मुझसे घर सँभालने की उम्मीद नहीं रखेगा? क्या मेरा होने वाला पति उसके करियर को प्राथमिकता देने की उम्मीद रखेगा?

और सबसे बड़ा सवाल पापा, जिस इंसान ने पिछले 24 साल से मेरा हर सपना सच किया है, मेरी ख़्वाहिशों में रंग भरा है, जब वो ही मेरे सपने पूरे करने में मेरा साथ नहीं देंगे, तो कोई कल का रिश्ता कैसे साथ देगा? जैसे आप कह रहे हैं, अपने घर जाकर पढ़ना, वैसे ही अगर उसने कह दिया कि अपने से घर से पढ़कर आना चाहिए था तो? ऐसे तो मेरा सपना हमेशा के लिए अधूरा रह जायेगा? मुझे प्यार से रानी बुलाने वाले मेरे पापा, शादी करके मेरे अधूरे सपने का बोझ मैं कैसे सहूँगी?

मैंने आपसे एक बार पूछा था कि आपके लिए सबसे ख़ुशी का दिन कौनसा होगा, तो आपने कहा था कि वो दिन जब में शादी करने के लिए हाँ कह दूँगी। पापा अपनी ख़ुशी और मेरी ख़ुशी शादी पर आधारित मत करो। आपने इतने सालों में मुझे पढ़ा लिखा कर इस काबिल बनाया है कि मैं इस दुनिया में अपना नाम कमा सकती हूँ। कुछ कर दिखा सकती हूँ। आपकी इस सोच के ज़िम्मेदार आप नहीं यह समाज है जो हमें हमेशा सिखाता है कि लड़की के जीवन का लक्ष्य है शादी करना। पापा, शादी जीवन का हिस्सा है पूरा जीवन नहीं। जब तक सपने होते हैं तब तक ही इस जीवन में रास आता है। शायद आप मेरी बात समझेंगे और अगली बार जब मैं आपसे पूछूँगी कि आपके लिए सबसे ख़ुशी का दिन कौनसा होगा तो आपका जवाब कुछ और होगा।

आपकी लाडली,
मिनी 

मूल चित्र: KIJO77 from Getty Images, via Canva Pro/Author’s Album

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Political Science Research Scholar. Doesn't believe in binaries and essentialism.

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