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क्या आप जानते हैं इन दिनों दिल्ली का यूएन हाउस नारंगी क्यों रंग दिया जाता है?

Posted: नवम्बर 25, 2020

अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के तहत 16 दिवसीय कैंपेन, Orange the world #HearMeToo चलाया जा रहा है जिसका हम सब हिस्सा बन सकते हैं।

यूनाइटेड नेशंस द्वारा 25 नवंबर को दुनिया भर में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। सयुंक्त राष्ट्र संघ का मानना है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा मानवाधिकार का उल्लंघन है। 1981 में, लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई फेमिनिस्ट एनकेंट्रोस के कार्यकर्ताओं ने 25 नवंबर को महिलाओं के खिलाफ हिंसा के खिलाफ जागरूकता और जागरूकता बढ़ाने के दिन के रूप में घोषित किया था। उसके बाद 17 दिसंबर, 1999 को, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस दिन को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के रूप से अपनाया था।

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस (इंटरनेशनल डे फॉर द एलिमिनेशन ऑफ़ वायलेंस अगेंस्ट वीमेन ) की थीम है, ऑरेंज द वर्ल्ड: फंड, रिस्पोंड, प्रीवेंट, कलेक्ट! (Orange the World: Fund, Respond, Prevent, Collect!) है। इसके तहत 16 दिवसीय कैंपेन Orange the World #HearMeToo चलाया जा रहा है जो कि 10 दिसंबर, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के दिन समाप्त होगा।

इस वर्ष भी कई ऑनलाइन सार्वजनिक कार्यक्रमों किये जा रहे है। हिंसा से मुक्त भविष्य के लिए प्रतिष्ठित इमारतों और स्थलों को ऑरेंज रंग में संवारा जायेगा। महिलाओं के हित में चलाये जा रहे इस खास कैंपेन के तहत दिल्ली के ‘यूएन हाउस’ को भी नारंगी रंग में रंग दिया गया है।

इस कैंपेन का उद्देश्य समाज में महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा के मुद्दों के खिलाफ़ आवाज़ उठाना है और समाज में व्याप्त हिंसा और लिंग भेदभाव से महिलाओं को मुक्त करना है।

अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के इस अभियान के तहत कई कदम उठाए जायेंगे

इस अभियान के तहत लिसनिंग इवेंट्स करवाए जाएंगे जिससे महिलाओं की सुरक्षा और जरूरतों के हिसाब से नीतियों में सुधार और बदलाव लाया जा सके।

एनजीओ और अन्य रचनात्मक कार्यकर्ताओं की सहायता से फ़ीचर कहानियां, डॉक्यूमेंटरी का मीडिया प्रसारण कर के लोगों को जागरूक किया जाएगा।

जगह जगह पर ऑनलाइन और ऑफलाइन कैंपेन चलाये जाएंगे ताकि लोग जागरूक हो सकें कि वो अपने-अपने स्तर पर कैसे महिलाओं के प्रति हिंसा को खत्म कर सकते हैं।

महिलाओं के साथ हो रही हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है

हम सभी जानते हैं COVID -19 के प्रकोप के बाद महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ सभी प्रकार की हिंसा, विशेष रूप से घरेलू हिंसा, में वृद्धि आयी है। इसके को लेकर हज़ारों रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। कई कैंपेन चलाये जा चुके हैं लेकिन क्या हिंसा में कमी आयी? नहीं! बल्कि आये दिन हिंसा क्रूर होती जा रही है। तो ऐसे में सवाल उठता है कि कैसे इन्हें कम किया जाये।

इसके लिए हमें समझना होगा कि महिलाओं के साथ हो रही हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। जब भी आपके साथ या किसी भी महिला के साथ अन्नाय हो तो सबसे पहले आप उसका विरोध करें। उसे चुपचाप रहकर ना सहें। जब हम आवाज उठायेंगे तभी सही मायने में हम हिंसा को रोक सकते हैं। तो इस बार अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस पर आप क्या प्रण ले रहें हैं?

मूल चित्र : Canva Pro

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