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अपनों के बीच गलतफहमी होने से रिश्ते खत्म नहीं करते…

माँ सच कहती थी कि मायका सिर्फ माँ से नहीं होता। रिश्ते को अगर प्यार से निभाया जाए तो भाई भाभी से भी मायका होता है। 

माँ सच कहती थी कि मायका सिर्फ माँ से नहीं होता। रिश्ते को अगर प्यार से निभाया जाए तो भाई भाभी से भी मायका होता है। 

कविता आज सुबह से घर के कामों में व्यस्त थी। सुबह से ही अपनी ननद सीमा के आने की खुशी में उनके कमरे को बिलकुल उनकी पसंद से सजा रही थी। तभी कविता के पति उमंग ने कहा, “कविता! मैं सीमा को लेने स्टेशन जा रहा हूं।”

“ठीक है।”

बच्चे बुआ के आने से बहुत खुश थे। सीमा कविता की इकलौती ननद थी। जो सास के ना रहने के बाद पहली बार गर्मी की छुटियों में मायके आ रही थी।

सीमा ने जैसे ही घर मे कदम रखा। उसे कदम रुक गए। क्योंकि उसका मानना था कि मायका सिर्फ माँ से होता है। माँ को ना देख के उसके आंखों में आंसू आ गए।

तभी कविता बड़े प्यार से बोली, “आइये ना दीदी! क्या हुआ?”

सीमा ने अंदर आकर देखा तो दंग रह गयी। सब कुछ घर मे आज भी वैसे ही था, जैसा माँ के रहते घर में सामान और बाकी चीजें रहती थीं। सीमा गेस्ट रूम की तरफ बढ़ी कि तभी कविता ने आवाज़ दी, “दीदी आपका कमरा साफ करा दिया है।”

सीमा को अपने कानों पर यकीन नही हो रहा था कि माँ के ना रहने पर भी भाभी ने कुछ भी नहीं  बदला। यहाँ तक कि उसका कमरा भी अभी तक उन्होंने उसके लिए ही रखा है। कविता ने पूरी कोशिश की थी कि सीमा को यहाँ बिलकुल वैसा ही महसूस हो। जैसा माँजी के रहते सीमा महसूस करती थी।

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रात को सबके सो जाने के बाद कविता पानी लेने के लिए रसोई में गयी, तो देखा कि माँजी के कमरे की लाइट जली है। पास जाकर देखा तो सीमा माँजी की तस्वीर के पास खड़ी रो रही थी।

“क्या हुआ दीदी आप रो रही हैं?” कविता ने कहा।

“कुछ नहीं भाभी, बस माँ की याद आ गयी”, सीमा ने आंसू पोछते हुए कहा।

कविता सीमा के हाँथ को अपने हाँथ में ले कर कहती है, “हाँ! दीदी मैं आपका दर्द समझ सकती हूँ, क्योंकि एक माँ की जगह कोई नहीं ले सकता। लेकिन ये तो जीवन चक्र है, कभी ना कभी तो इसका सामना हर किसी को करना पड़ता ही है। चलिये अब सो जाइये। बहुत रात हो चुकी है।” कह के कविता वहाँ से जाने लगी।

तभी सीमा ने कविता का हाँथ पकड़ लिया और कहा, “भाभी मुझे आपसे भी कुछ कहना था। क्या आप थोड़ी देर यहाँ बैठ सकती हैं?”

“हाँ! क्यों नहीं दीदी कहिये?” कविता अपनी ननद के पास बैठ गयी।

सीमा ने कहा, “भाभी मुझे माफ़ कर दीजिए। माँ के रहते मैंने हमेशा गलत व्यवहार किया। कभी आपको सम्मान नही दिया। माँ सही कहती थी कि उनके ना रहने पर मुझे आपका महत्व समझ में आएगा।”

कविता ने अपने हाथों से सीमा के आंसू पोछते हुए कहा, “नहीं, नहीं, दीदी आप ऐसा क्यों कह रही हैं?”

“नहीं भाभी! मुझे प्लीज् कहने दो। आपको पता है, मैं आपको कभी भी पसंद नहीं करती थी। हमेशा ही गलत और अपमानजनक व्यवहार आपके साथ करती थी। इसके लिए माँ गुस्सा भी हो जाती थी। माँ ने बहुत कोशिश की समझाने की, लेकिन मैंने कभी किसी की एक भी नहीं सुनी।

माँ के गुजर जाने के बाद जब मैं ससुराल गयी, तो अपनी सास ननद को बात करते सुना कि अब तो सीमा का मायके जाना बंद। अब कौन पूछने वाला है उसको? तू जब मन करे आ सकती है। मुझे भी लगा कि शायद अब सच मे सब खत्म हो गया।

जब भी आपको आपके भाभियों से बातें करती देखती, तो मुझे चिढ़ होती कि आप अच्छी होने का दिखावा माँ के सामने करती हैं। लेकिन जब इस बार आपका फोन गया, तो सबके  साथ साथ मेरा भी मुँह बंद हो गया। मैं असमंजस में थी कि क्या करूँ? खुद को बेसहारा और अनाथ जैसे समझने लगी थी। लेकिन आप ने आज भी वही सम्मान दिया। आपके इस प्यार व्यवहार ने मुझे मेरी ही नजरों में शर्मिंदा कर दिया।”

“दीदी प्लीज़ ऐसा मत कहिये। मैंने हमेशा आपको अपना ही माना है। मुझे बहुत खुशी हुई कि आपने अपनी बात मुझसे खुले मन से कही। दीदी हम औरतों की जिंदगी बिलकुल एक जैसी होती है। मैं भी तो किसी की ननद हुँ। तो मुझे वो दर्द और तकलीफ सब पता है। रही बात कमरे की तो बेटियों का भी मायके पर उतना ही हक होता हैं जितना बेटों का होता है। और अब तो माँजी के ना रहने के बाद हम दोनों ही एक दूसरे का सहारा हैं।”

“हाँ! भाभी! आप सही कह रही हैं। लेकिन मुझे समझ नही आ रहा था कि आपसे कैसे बात करूं।  कैसे माफी मांगू? लेकिन अब आप से बात कर के  मन हल्का हो गया। माँ सच कहती थी कि मायका सिर्फ माँ से नहीं होता। रिश्ते को अगर प्यार से निभाया जाए तो भाई भाभी से भी मायका होता है”, सीमा ने कहा।

कविता ने सीमा को गले लगाते हुए कहा, “दीदी आपको मैं कल भी अपना मानती थी और आज भी मानती हूं। इस घर पर माँजी के रहते जितना आपका हक था उतना ही आज भी है। अपनों के बीच गलतफहमी होने से रिश्ते खत्म नहीं करते। बल्कि गलतफहमी को खत्म करते हैं।”

तभी उमंग ने पीछे से आ के कहा, “और देवियों आपने बात करने मे पूरी रात बिता दी! सुबह के पांच बज चुके हैं। तो अब हम काफी को खत्म करते हैं। मैंने अपने हाथों से बनाई है।” उमंग की इतनी बातें सुन के दोनों हँस पड़ती हैं।

दोस्तों, उम्मीद करूँगी मेरी नयी कहानी आपको पसंद आयी होगी। कहानी का सार ये है कि रिश्ता हमेशा प्यार और सम्मान से निभाना चाहिए। और रिश्ते में सम्मान दोनों ही तरफ से होना चाहिए। कभी भी किसी गलतफहमी को तुरंत दूर करें, बजाय उसे बढ़ा के मन मुटाव रखने के। 

चित्र साभार :

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