कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

सेक्स वर्कर्स अब ‘वीमेन एट वर्क’ के तहत सूचीबद्ध, मिलेगा कल्याण योजना से लाभ

सेक्स वर्कर्स को दबाकर रखने में पुरुषवादी समाज का अपना स्वार्थ है। सेक्स वर्कर्स का 'वीमेन एट वर्क' के तहत सूचीबद्ध होना का सराहनीय कदम है! 

सेक्स वर्कर्स को दबाकर रखने में पुरुषवादी समाज का अपना स्वार्थ है। सेक्स वर्कर्स का ‘वीमेन एट वर्क’ के तहत सूचीबद्ध होना का सराहनीय कदम है! 

भारतीय मानवाधिकार आयोग ने 7 अक्टूबर 2020 को महामारी की सन्दर्भ में महिलाओं के अधिकारों पर एक एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी को जारी करने का कारण है कोरोना वायरस महामारी, उसके कारण हुए अनेक आर्थिक व राजनीतिक बदलाव और उनका पिछड़े वर्ग के अधिकारों पर प्रभाव।

विशेषज्ञों द्वारा प्रभाव आंकलन के बाद यह एडवाइजरी जारी की गयी है। इसकी कमेटी में बहुत से सामाजिक कार्यकर्ता, अनेकों विभागों और मिकालयों के प्रतिनिधि शामिल थे जिन्होंने मिलकर पिछड़े हुए वर्ग के अधिकारों पर महामारी के प्रभाव का आंकलन किया। साथ ही मानवाधिकार आयोग ने सभी केंद्र व राज्य मंत्रालयों से इस एडवाइजरी में जारी सिफारिशों  को लागू करने का निवेदन भी किया है।

इसी एडवाइजरी में एक बहुत ही प्रगितिशील और उपयोगी निर्देश भी जारी किया गया है। इसके अंतर्गत सेक्स वर्कर्स को ‘वीमेन एट वर्क’ (कामकाजी महिलाओं) के सेक्शन के तहत संरक्षण का निर्देश दिया गया है। साथ ही साथ सेक्स वर्कर्स की गणना असंगठित क्षेत्र में करने का भी आदेश दिया है।

इससे उन्हें अस्थायी दस्तावेज बनवाने में मदद मिलेगी जिससे वे सरकार द्वारा चलायी गयी विभिन्न समाज कल्याण योजनाओं का फायदा उठा सकेंगे। अन्य निर्देशों में यह बताया गया है कि लैंगिक हिंसा के लिए एक विशेष टास्क फाॅर्स भी बनायीं जाएगी और सभी कामकाजी महिलाओं के लोन का मोरेटोरियम भी दिया जायेगा।

सदियों से सेक्स वर्कर्स का हमारे समाज में एक मह्त्वपूर्ण स्थान रहा है, परन्तु फिर भी वह हमेशा ही शोषित और तिरस्कृत ही रहे हैं। समाज ने उन्होंने अपनाना तो दूर, उनके अस्तित्व को भी मानने से हमेशा इंकार किया है। ‘गंदे काम करने वाले, धंधा करने वाले आदि नामों से उन्हें सम्बोधित किया जाता रहा है।

कोई पुरुष बंद दरवाज़े के पीछे उनसे कितने भी सम्बन्ध बना ले परन्तु उस बंद दरवाज़े के बहार वो उनके लिए अनजान होते हैं। इस पुरुषवादी समाज का यह पाखंड इसलिए है ताकि उनका काम आसानी से बन जाये। तात्पर्य यह है कि सेक्स वर्कर्स का भरपूर शोषण करने से, उनको दबाकर रखने से और उनको कभी मुख्य धरा का हिस्सा नहीं बनाने के पीछे अपना स्वार्थ है। उनको समाज से बहिष्कृत रखने से ही उनको लाभ है इसलिए कभी भी सेक्स वर्कर्स को सम्मान नहीं मिलता।

सेक्स वर्कर्स के अस्तित्व को इतिहास के किसी भी दौर में झुटलाया नहीं जा सकता है। सेक्स वर्कर्स हमारे समाज का एक अभिन्न अंग है इसके बावजूद भी उनके मानवाधिकारों का सदैव हनन हुआ है। संस्कारों के नाम पर उनके काम को न तो तवज्जो दी जाती है और न ही उनके काम को अन्य व्यवसायों के सामान सम्मान दिया जाता है।

Never miss real stories from India's women.

Register Now

समाज में अश्लीलता और गन्दगी फ़ैलाने के नाम पर उनका हमेशा से ही नीचे दिखाया गया है और सम्मान से वंचित रखा गया है। सदा ही समाज के किनारे पर रहने के कारण यह वर्ग अपने सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों से परिचित ही नहीं होते और इसी कारण उनका लाभ भी नहीं उठा पाते।

इस एडवाइजरी को बहुत से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सराहा है और कहा है कि यह एक सकारात्मक कदम है जिससे सेक्स वर्कर्स को पहचान बनाने का मौका मिलेगा। साथ ही साथ इससे उनके अस्तित्व को समाज को स्वीकारना ही होगा।

यह एक ऐसी पहल है जो सेक्स वर्कर्स को अपना हक़ दिला सकती है। इस योजना के तहत उनका गठन असंगठित क्षेत्र में किया गया है जिससे अन्य असंगठित मजदूरों की तरह इन्हे भी उन सभी सरकारी योजनाओं का फायदा मिलेगा। इससे भी महत्वपूर्ण इससे उनके काम को काम मन गया है और उसको आर्थिक रूप दिया गया है।

सभी सेक्स वर्कर्स और उनके संगठनों द्वारा इस फैसले का खुले दिल से समर्थन किया जा रहा है। यह फैसला उनके लिए समाज के साथ सदियों से चली आ रही में एक छोटी सी जीत है। एडवाइजरी द्वारा दिया जाने वाले अधिकारों से उन्हें राशन कार्ड बनाने का और स्वास्थ्य सम्बन्धी योजनाओं का लाभ उठाने का भी मौका मिलेगा।

मूल चित्र : YouTube  

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

टिप्पणी

About the Author

Sehal Jain

Political Science Research Scholar. Doesn't believe in binaries and essentialism. read more...

28 Posts | 135,111 Views
All Categories