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और उसने जल्दी से कहा, “हस्बैंड जी स्पीक इन हिन्दी प्लीज़…”

Posted: अक्टूबर 18, 2020

शादी पास आती है तो लड़कियाँ पार्लर भागती है और ये रिद्धि ऊपर छत पर क्या पढ़ती रहती है। इतनी पढ़ाई तो इसने दसवीं और बारहवीं में भी नहीं करी।

घर में भाग दौड़ मची थी। मांचे पे बैठे बैठे दादी पूरे घर को भगा रही थी। “अरे ओ राजू! ये कैसे फल सजा रहा है और मेवों की टोकरी क्यों नहीं सजी अब तक।”

“सब हो जायेगा माँ, चिंता क्यों करती हो।” अपनी माँ रमा जी के पास बैठते हुए विनय जी ने कहा।  “पहले अपने माथे का पसीना तो पोछ।” अपने आँचल से अपने साठ साल के बेटे का पसीना पोछते हुए रमा जी ने कहा।

“सारी तैयारी हो गई है बस घंटे भर में निकल ना है माँ। आशीर्वाद दे मुझे अपने बुते से बाहर जा कर रिद्धि की शादी तय की है बस सब से ठीक हो जाये।”

“ठाकुर जी पे भरोसा रख बेटा जब यहाँ तक पहुंचाया है तो आगे भी सब ठीक होगा और हमारी रिद्धि के गुणों को देख कर ही तो पसंद किया है ना उन लोगों ने।” अपनी माँ की बात सुन तसल्ली मिली एक बेटी के पिता को, “सच कहा माँ हमारे तो भाग्य खुल गए।”

“मेरे तो भाग्य फुट गए भाभी ये कैसा बेमेल रिश्ता बाबूजी ने तय कर दिया है।” अंदर कमरे में रिद्धि अपनी भाभी से शिकायत कर रही थी। अब बाबूजी को कुछ कहने के संस्कार तो थे नहीं।

“क्यों परेशान हो मेरी ननद रानी इतना अच्छा रिश्ता तो लोग ख़्वाबों में देखते है और एक ये है मेरी झल्ली ननद।”

“हाँ हाँ,  आप भी कह लो मुझे झल्ली अब आप ही सोचो भाभी, कहाँ वो लंदन यूनिवर्सिटी में इंग्लिश का प्रोफेसर और कहाँ मैं बनारस के गलियों की हिन्दी मीडियम लड़की। क्या मेल है बताओं ज़रा वो मुँह खोले तो अंग्रेजी झड़े और मैं मुँह खोलू तो हिन्दी कैसे निभेगी ये शादी मुझे तो ये शादी नहीं बर्बादी लग रही है।”

“चुप कर रिद्धि ऐसे अपशगुन क्यों निकालती है मुँह से। अरे! मेरी ननद की सुंदरता देख तो उनका मुँह खुला का खुला रह जायेगा बोलेंगे क्या खाक।” इतना कह रिद्धि की भाभी मेघा और रिद्धि हँसने लग गई।

रिद्धि की सुंदरता और परिवार के संस्कार देख विपुल के पिताजी ने ये रिश्ता पक्का किया था। लाखों में एक रिद्धि थी तो करोड़ो में एक विपुल। कम उम्र में इतनी अच्छी नौकरी मिली थी तो परिवार चाहता था विपुल के लिये सुन्दर घरेलु लड़की मिले और विपुल की भी यही चाह थी। जब रिद्धि का रिश्ता आया तो उन लोगो ने झट से हाँ कर दी। विपुल को भी रिद्धि की तस्वीर भा गई थी।

रिद्धि के मन में ये डर बैठ गया की उनका रिश्ता बेमेल है। फलदान के बाद भी उसने कभी विपुल से बात नहीं की तो विपुल भी संकोच से नहीं कर पाया।

रिद्धि की सहेलियाँ और बहनें उसे खूब चिढ़ाती। “अब तो ट्यूशन लगा ले अंग्रेजी की तू रिद्धि,  बेचारे हमारे जीजू उनके दिल की बात भी तू तो गूगल पे सर्च कर के समझेंगी।”

सब हंसते और रिद्धि को चिढ़ाते रहते। रिद्धि बेचारी रोआँसी हो रह जाती। देखते देखते शादी भी पास आ रही थी, रिद्धि ने बाकायदा लिख कर रटना शुरू कर दिया कि विपुल क्या क्या पूछ सकता है और वो उनका अंग्रेजी में कैसे ज़वाब देगी।

ऐसा भी नहीं था की रिद्धि पढ़ी लिखी नहीं थी। अच्छे कॉलेज से ग्रैजुएट थी लेकिन उसकी पढ़ाई हिन्दी मध्यम से हुई थी। अंग्रेजी भी आती थी लेकिन धारा प्रवाह नहीं बोल पाती थी।

“शादी पास आती है तो लड़कियाँ पार्लर भागती है और ये रिद्धि ऊपर छत पे क्या पढ़ती रहती है।” दादी ने रिद्धि को देख मेघा से पूछा।

“पता नहीं दादी मेघा ने नज़रे चुरा कर कहा।”

“अरे इतनी पढ़ाई करते इसे दसवीं और बारहवीं में भी ना देखा मैंने”, दादी बेचारी आश्चर्य में पड़ी रहती रिद्धि को देख।

शादी के दिन पहली बार स्टेज पे रिद्धि और विपुल ने एक दूसरे को देखा। लाल सुर्ख़ जोड़े में गहनों से लदी रिद्धि कोई अप्सरा सी लग रही थी, तो मेहरून शेरवानी में विपुल राजकुमार सा।

रिद्धि स्टेज पे आयी तो विपुल ने अपना हाथ बढ़ा दिया रिद्धि शर्मा सी गई। विपुल एकटक रिद्धि को देखे और विपुल को देख रिद्धि के भी सिर से अंग्रेजी का भुत एक पल को भाग गया।

आशीर्वाद के समय विपुल के पास कोई फ़ोन आया और विपुल फर्राटेदार अंग्रेजी में बातें करने लगा। विपुल की अंग्रेजी सुन रिद्धि बेचारी फिर से परेशान हो गई। शादी, विदाई और ससुराल में स्वागत, इन सब में रिद्धि का ध्यान कम अपनी अंग्रेजी के सवाल ज़वाब पे ज्यादा लगी थी।

रात को फूलों से सजे कमरे में रिद्धि बैठी थी तभी विपुल आया। विपुल के आते ही रिद्धि घबरा कर अपने इतने दिनों से रटी रटायी बातें भूल गई।

रिद्धि को देख विपुल ने कहा “हेलो रिद्धि हाउ आर यू?”  रिद्धि को कुछ नहीं सूझ रहा था इतनी अंग्रेजी तो आती ही थी लेकिन उस समय ज़बान को जैसे लकवा मार गया था। जब कुछ ना सुझा तो बस हाथ जोड़ खड़ी हो गई और जल्दी से कहा, “हस्बैंड जी स्पीक इन हिन्दी प्लीज़।” 

रिद्धि को यू हाथ जोड़ खड़े देख, विपुल हँस हँस के लोट पोट हो गया। विपुल को यू हँसता देख रिद्धि समझ गई अब ये शादी नहीं चलेगी और वो रोने लग गई।

रिद्धि का रोना देख विपुल घबरा गया,  “माफ़ कर दो रिद्धि मैं तो मज़ाक कर रहा था। तुम्हे किसने कहा मुझे अंग्रेजी मीडियम बीवी चाहिए। भाई मैं तो हिंदुस्तानी हूँ वो भी पक्का वाला और मुझे तो बीवी भी देसी ही चाहिए जो प्यार भरीं बातें भी हिन्दी में करें और मुझसे लड़े भी तो हिन्दी में ही।”

विपुल की बात सुन रिद्धि ने रोते रोते पूछा पूछा, “तो आते ही मुझे क्यों डराया।”

“अरे वो तो मेघा भाभी ने मुझे सब कुछ बता दिया था और ये बता दिया था की कितनी तैयारी की गई है मुझसे मिलने से पहले तो सोचा थोड़ा टेस्ट तो ले लू और हाँ ये भी पूछा था भाभी ने की रिद्धि मुझे पसंद तो है?” मुस्कुरा कर विपुल ने कहा।

“मेघा भाभी ने”, आश्चर्य से रिद्धि ने पूछा “तो अपने क्या ज़वाब दिया।”

“मैंने कहा मुझे रिद्धि सिर्फ पसंद नहीं बहुत बहुत पसंद है”, विपुल ने कहा तो रिद्धि शर्मा गई।

“अब अंग्रेजी के डर का भूत भागा कि नहीं?” जब विपुल ने चुटकी ली तो रोते रोते ही रिद्धि खिलखिला उठी।

“अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना अच्छी बात है रिद्धि लेकिन विदेश जा अपने संस्कार अपनी भाषा भुल जाना बहुत गलत। वहाँ यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी पढ़ाना मेरा काम है लेकिन इसका मतलब ये नहीं की मैं अपनी हिन्दी को भूल जाऊं। यही तो है जो मुझे उन अंग्रेजो से अलग करती है। मुझे गर्व है कि मैं एक हिंदुस्तानी हूँ और हिन्दी मेरी मातृभाषा।”

अपने पति की बात सुन रिद्धि गर्व से भर उठी। विपुल जैसे पति का साथ पा बहुत ख़ुश थी रिद्धि।विपुल और रिद्धि ने अपने वैवाहिक जीवन की एक  सुखद शुरुआत की।

मूल चित्र : Manu_Bahuguna from Getty Images via Canva Pro 

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