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अब बस मुझे उस बुज़दिल से दूर जाना है…

मेरे रोकने या विरोध करने पर वह पागल सा हो जाता है। रात रात भर जागता है और मुझे पलक भी नहीं झपकने देता। मैंने कई बार उसे समझने की कोशिश की...

मेरे रोकने या विरोध करने पर वह पागल सा हो जाता है। रात रात भर जागता है और मुझे पलक भी नहीं झपकने देता। मैंने कई बार उसे समझने की कोशिश की…

नोट : विमेंस वेब की घरेलु हिंसा के खिलाफ #अबबस मुहिम के चलते हमने आपसे अप्रकाशित कहानियां मांगी थीं, उसी श्रृंखला की चुनिंदा कहानियों में से ये कहानी है रूबी जैन की!

“रोहिणी जी मैं आपका और श्यामा दीदी का उपकार कभी नहीं भूलूंगी। आज इस नर्क और उस हैवान से छुटकारा दिलवाने में आपने मेरे इस टूटे हुए बल को जो साहस रूपी पंख दिए हैं उसे मैं और मेरी बेटी ज़िन्दगी भर नहीं भूलेंगे।”

“बस करो लक्ष्मी हमने कुछ नहीं किया सब तुम्हारी हिम्मत और सही फैसला लेने की सूझबूझ से हुआ है। सालों तुम घुट रही थीं और कभी किसी को बताना तो दूर, तुम्हारे चेहरे की हंसी से किसी को कभी एहसास ही नहीं होने दिया कि घरेलू हिंसा के कितने घिनौने जाल में बंध गई थीं तुम।”

“अब बस! अब जाओ, जल्दी करो, टैक्सी आती ही होगी। निकल जाओ इस वेदना के भयावह महल से जहां तुम्हें और तुम्हारी बेटी को सिर्फ़ प्रताड़ा ही गया। और पीछे मुड़कर कभी मत देखना। उस राक्षस की किसी भी मीठी बात में अब मत फंसना। ज़िन्दगी भर जो तुम्हें हांड-मांस का बुत समझ नोचता रहा, अपनी हवस को बुझाता रहा, उससे अब तुम्हें डरकर नहीं, कमजोर बनकर नहीं बल्कि खुद में दैवीय ताकत भरकर लड़ना होगा।” रोहिणी अपनी हर पुरजोर कोशिश से लक्ष्मी में साहस भर रही थी।

ब्रह्मलोक अपार्टमेंट कोई लगभग ढाई सौ फ्लैट्स होंगे। हर तरह के लोगों से बसी ये सोसायटी लगभग साढ़े पांच एकड़ की ज़मीन पर बनी थी। कुल पांच ब्लॉक और हर ब्लॉक में एक पार्क, बच्चों का प्ले एरिया जैसी सुविधाएं!

ब्लॉक चार के सामने भी एक छोटा सा पार्क था जहां शाम के वक्त बच्चों, मांओं और बुजुर्गों का तांता लगता था। पूरे कैंपस में वॉकिंग ट्रैक बना था, जहां फिटनेस के लिए जागरूक महिलाएं और पुरुष हर रोज नियमित रूप से घूमने आते थे।

शनिवार की छुट्टी का दिन शाम का समय रोहिणी भी हर रोज की तरह शाम छह बजे ट्रैक पर जल्दी जल्दी वॉक कर रही थी कि कार पार्किंग की तरफ से उसे झगड़े जैसी तेज़ आवाज़ सुनाई दी। स्वभाव से ही महिलाओं के लिए जागरूक रोहिणी उस तरफ बढ़ती है। उसे देख दोनों दंपत्ति हंस कर ऐसे उसे गुड इवनिंग करते हैं जैसे सब नॉर्मल था।

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रोहिणी वापस ट्रैक पर अपनी वॉक खत्म कर घर आ जाती है।

ब्रह्मलोक अपार्टमेंट सोसायटी की मेंबर होने से सोसायटी में काफी परिचित थी रोहिणी। आते-जाते लोग उसे ‘नमस्कार’ संबोधित करते हुए निकलते थे।

कुछ दिन गुज़रे। शाम के समय जब रोहिणी ट्रैक पर घूम रही थी, तब उसकी निगाह उस देखी सी औरत पर पड़ी। कोई सात साल की बच्ची के साथ पार्क में खेल रही थी ये औरत। पास आते ही रोहिणी ने उसे ‘हाय’ कहा।

औरत ने भी झेंपते हुए ‘हैलो’ कहा और दूसरी तरफ मुड़कर बेटी को झूला झुलाने लगी।

अब लगभग हर रोज रोहिणी और इस महिला की ‘हाय-हैलो’ होने लगी। ज्यादा कुछ नहीं पर रोहिणी को कुछ अजीब लग रहा था कि इतनी सारी महिलाएं पार्क में होती थीं। गपशप भी उनकी चलती थी, पर क्यों ये महिला सब से अलग थलग बेटी के ही साथ मग्न रहती थी।

खैर, सबकी अपनी ज़िन्दगी होती है सोचकर रोहिणी उस पर से ध्यान हटाती है।

कुछ दिन बाद

यही कोई ग्यारह बजे का समय होगा कि अचानक दरवाजे की घंटी बजी।

“आई!” कहते हुए रोहिणी दरवाजा खोलती है।

“जी आप! आइए, अंदर आइए। पर आपको कैसे पता चला कि मैं यहां इस फ्लैट में रहती हूं?”

“मुझे बचा लो। प्लीज मुझे बचा लो…!अब बस बहुत हुआ!”

“अरे बैठो। मैं पानी लेकर आई।”

रोहिणी उस परेशान महिला को पानी पिलाती है।

“रोहिणी जी, मैं लक्ष्मी आपके अपार्टमेंट में ही थर्ड फ्लोर पर फ्लैट नंबर 302 में अपनी बेटी और उस शैतान पति के साथ किराए पे रहती हूं। काफी दिनों से आपसे मिलने को उचित समय का इंतजार कर रही थी। आज कई दिनों बाद वोह कमीना ऑफिस गया है।”

“कई दिनों बाद ऑफिस? मतलब नौकरी नहीं थी क्या उनकी?” रोहिणी बात को थोड़ा सा समझ लक्ष्मी से पूछती है।

“नहीं, ऐसा नहीं है।”

“तो?”

“वोह कई कई दिन ऑफिस नहीं जाता। मुझे और हमारी बेटी को घर में कैद रखता है। बेटी के सामने मुझे मारता है, गालियां देता है। मेरे रोकने या विरोध करने पर वोह पागल सा हो जाता है। रात रात भर जागता है और मुझे पलक भी नहीं झपकने देता। मैंने कई बार उसे समझने की कोशिश की। बेटी की दुहाई भी दी।

उसके मां-बाप से शिकायत की तो उन्होंने उल्टा मुझे ही उसके इस व्यवहार की वजह बताया।  उसकी मां उसे मेरे खिलाफ भड़काती रहती है। उसकी बहन उसके साथ मीठा व्यवहार कर उसकी भली बनी रहती है।”

इतना सब कुछ लक्ष्मी फर्राटे से बोले जा रही थी जैसे किसी जल्दी में थी या उसे किसी चीज का डर था। फिर अचानक खड़ी हो रोहिणी को ‘बाय’ बोल निकल जाती है। इतना सब कुछ वह औरत फर्राटे से बोल गई जिसे रोहिणी पार्क में बेटी के साथ खेलते देखती है।उस दिन पूरा समय रोहिणी लक्ष्मी की बातों को सोच सोचकर कश्मकश में थी।

क्या लक्ष्मी वाकई में इतनी परेशान थी? तो लक्ष्मी इतने साल से चुप क्यों थी? उसने अपने घरवालों से मदद क्यों नहीं मांगी? इतना सब ज़िक्र किया पर मायके का नाम तक नहीं लिया लक्ष्मी ने? उसके ससुराल वाले साथ नहीं रहते फिर क्यों उसे परेशान करते हैं?

इन सवालों से झुंझती रोहिणी अपनी सहेली और अपार्टमेंट के प्रेसिडेंट की पत्नी श्यामा के पास जाकर सब कुछ बताती है कि लक्ष्मी और उसकी बेटी किस बड़ी समस्या से लड़ रहे थे। रोहिणी की बात सुन श्यामा ने लक्ष्मी से संपर्क करने की कोशिश की पर उसके पति तक पहुंचने से पहले वह लक्ष्मी के मुंह से वोह सब सुनना चाहती थी जो रोहिणी को बता चुकी थी।

एक दिन रात में जोर जोर दरवाजा पीटने की आवाज़ से लक्ष्मी के पड़ोसी रामेंद्र नाथ (ब्रह्मलोक के सेक्रेटरी) जी ने आकर उनके घर की घंटी बजाई, ये जानने के लिए की आवाज़ उनके घर से आई थी या किसी और के? और पूछने पर लक्ष्मी का पति आकाश दरवाजा खोलकर मुस्कुराते हुए उनसे पूछने लगता है कि क्या उनको किसी चीज की जरूरत थी?

धीरे धीरे लक्ष्मी की परेशानी ब्लॉक चार के लोगों तक पहुंचने लगी और जब श्यामा ने रामेंद्र नाथ (सेक्रेटरी) जी से ये बात की तो उन्होंने भी उस रात की आवाज़ की चर्चा श्यामा को बताई, तो श्यामा को और भी यकीन होने लगा।

इस तरह जब उस फ्लैट नंबर 302 की घटनाएं पड़ोसियों से सुनने को मिली तो रोहिणी और श्यामा को भी लक्ष्मी की बातों पर थोड़ा सा यकीन होने लगा था।

एक दिन शाम को मौका पाकर लक्ष्मी श्यामा के घर पर रोहिणी और श्यामा दोनों से मिलती है और उस रात हुई घटना को कह सुनाती है और अपने हाथ पर हल्के होते नील के निशान भी दिखाती है जो आकाश के दरवाजे पर धक्का देने से आया था।

लक्ष्मी की बातों पर और सच्चाई का पता लगाने श्यामा और रोहिणी उस से पूछताछ करने लगती हैं, “घरवालों को क्यों नहीं बताया?”

“मां अकेली तलाकशुदा बहन के साथ रहती है, इसलिए उसे और परेशान नहीं कर सकती।”

“पढ़ी लिखी थीं, तो कुछ नौकरी क्यों नहीं की तुमने?”

“मुझे घर से बाहर नहीं जाने दिया जाता था।”

“ससुराल वाले क्यों तुम्हें पसंद नहीं करते?”

“हमारी लव मैरिज हुई है।”

“लव मैरिज? और फिर भी ऐसी हालत? क्या तुमने इस आदमी को पहले समझा नहीं था या तुम जानबूझकर इसकी खूबसूरती के चक्कर में पागल हो गई?” श्यामा ने गुस्से से पूछा।

“तलाक लेने की नहीं सोची अब तक?”

“परतंत्र हूं। ये वह अच्छे से जानता था कि अगर मैं नौकरी करूंगी तो उसका जोर मुझ पर नहीं चल पाएगा, इसलिए कभी नौकरी पर टिकने ही नहीं दिया, किसी न किसी बहाने से मुझे रोकता था।

लक्ष्मी की बातें सुन रोहिणी और श्यामा को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। लक्ष्मी उसके पति से मिलने को मना कर देती थी कि क्योंकि उसे डर था कि अगर उसके पति को पता चला तो वह न जाने क्या करता!

उसने रोहिणी और श्यामा को बताया था कि इस अपार्टमेंट से पहले भी वह कई अपार्टमेंट बदल चुका था। उसे जैसे ही ये पता चलता था कि उसके घर की खटपट बाहर सुनाई दे रही है, वह रातों रात घर बदल देता था। 

हर तरफ से सोच समझ कर रोहिणी और श्यामा को सबसे पहले लक्ष्मी और उसकी बच्ची को उस साइको के चंगुल से छुड़ाना था। वह समझ चुकी थी कि ये आदमी किसी मेंटल डिसऑर्डर का शिकार था। 

श्यामा और रोहिणी के प्रयासों ने लक्ष्मी के कमजोर मन में उस साइको से लड़ने की हिम्मत भरी।धीरे-धीरे लक्ष्मी अपने पति आकाश का सामना हिम्मत से करने लगी और उसके खिलाफ सबूत इकट्ठा करने लगी जैसा कि रोहिणी और श्यामा ने समझाया।

बेटी श्रुति के विद्यालय की प्रिंसिपल ने लक्ष्मी को बताया कि श्रुति ने दूसरे बच्चों को बहुत ही गंदी गाली दी और इस शिकायत को लक्ष्मी ने भी लिखित में स्कूल से मंगा लिया ताकि बता सके कि आकाश घर में बच्ची के सामने कैसी कैसी गालियां दिया करता था।

रोहिणी और श्यामा के समझाने पर लक्ष्मी ने कुछ दिन आकाश के साथ अच्छा व्यवहार किया ताकि मौका पाकर वोह घर से और उसके चंगुल से निकल सके। और दूसरी तरफ वह मां और बहन को भी बता देती है कि अब बस हुआ जल्दी ही वह एक बड़ा कदम उठाएगी। 

लक्ष्मी के बर्ताव से खुश हो आकाश उस पर से निगाह हटा ऑफिस जाता है और मौका पाकर लक्ष्मी रोहिणी और श्यामा की मदद से कैब बुलाकर हमेशा हमेशा के लिए आकाश के चंगुल से निकल जाती है..!

मां के घर पहुंचने से पहले ही वह पुलिस में आकाश के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करा मां के घर से बेटी की देखभाल करने लगती है। और अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने दबे और रौंदे हुए आत्मसम्मान को फिर से पाती है।

आज रोहिणी और श्यामा की मदद से लक्ष्मी की ज़िन्दगी तो सुधरने लगी पर क्या आपके आसपास की अनेकों लक्ष्मियों को आपने देखा और समझा? क्या आपने उन बेबाक हंसती हुई औरतों के चेहरे के पीछे छिपे सच को जानने की पहल की?

नहीं तो प्लीज थोड़ा आसपास के माहौल पर भी नजर रखिए शायद किसी को आपकी भी जरूरत हो सकती है..!

मूल चित्र : triloks from Getty Images via CanvaPro  

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Ruby Jain

Hi I'm Ruby Jain, married with two grown up kids, I'm an experienced primary teacher, love to cook, dance and sometimes paint, currently enjoying my writing passion, women's web is an amazing read more...

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