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सबके कहने पर वह माँ तो बन गयी लेकिन उसके आगे क्या हुआ?

Posted: सितम्बर 27, 2020

शेखर और प्रगति की खुशनुमा ज़िंदगी में शेखर की एक ज़िद से प्रगति ही नहीं बल्कि उनके बच्चे पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। तो आख़िर ऐसा क्या हुआ था…

“आज बहुत बारिश हो रही है। रोहित को स्कूल से जल्दी लेते आना। थोड़ी सी भी देरी नहीं होनी चाहिए”, शेखर ने प्रगति को फोन कर के कहा। 

शेखर और प्रगति की शादी को सात साल हो गए थे। उनका एक बेटा है रोहित जो चार साल का है। प्रगति और शेखर एक ही ऑफिस में काम करते थे। दोनो एक दूसरे को प्यार भी करते थे और फिर दोनो ने परिवार वालो की आपसी सहमति से शादी कर ली। शादी के बाद दोनो बहुत खुश थे। दोनो साथ में ऑफिस आते जाते। 

एक दिन आफिस में प्रगति की तबीयत अचानक खराब हो जाती है। शेखर उसे जल्दी से अस्पाताल ले कर जाता है और यहां उसे ये पता चलता है कि प्रगति मां बनने वाली है। शेखर बहुत खुश हो जाता है पर प्रगति खुश नही होती है। वो अभी बच्चा नही चाहती थी। वो अपना पूरा फोकस अपने काम पर देना चाहती थी। प्रगति अपनी आजादी नही खोना चाहती थी।

घर आते वक्त प्रगति ने शेखर को कहा “मुझे ये बच्चा नही चाहिए। मैं अपने काम को नही छोड़ना नही चाहती है, मैं कोई बोझ नही उठाना चाहती।” ये बात सुनकर शेखर हैरान हो गया। 

“तुम ठीक तो हो, तुम क्या बोल रही हो। तुम्हारा दिमाग तो खराब नही हो गया है। तुम इस बच्चे को जन्म दोगी, ये सिर्फ तुम्हारा बच्चा नही है मेरा भी है और ये मेरा अंतिम फैसला है।” शेखर की बातों को सुनकर प्रगति कुछ नहीं बोलती है। 

दोनो घर पहुंच जाते हैं। इतनी बड़ी खुशखबरी सुनकर दोनों के माता-पिता बहुत खुश होते हैं। तभी प्रगति की मां का फोन आता है और वो बात करने लगती है। वो अपनी मां को बताती है कि वो ये बच्चा नहीं चाहती।

पर मां कहती है, “तुमने हमेशा अपने मन की है, तुझे अपनी आजादी बहुत पसंद है। जानती है, बच्चे के आने से घर में रौनक आ जाएगी। बच्चे के आने से कौन सी तेरी आजादी खत्म हो जाएगी?” मां उसे बहुत समझाती है। प्रगति ने ना चाहते हुए भी बच्चे को जन्म दिया।

रोहित के आने से शेखर की पूरी जिंदगी ही बदल गई। वो अपने काम के साथ-साथ रोहित का भी ख्याल रखता है। प्रगति ने सिर्फ जन्म दिया है और उसे रोहित से कोई लगाव न हो सका। ना कभी उसने रोहित को अपने हाथों से खाना खिलाया और ना हीं उसे कभी प्यार से सीने से लगाए रखा। 

मां बनने के बाद थोड़े शारीरिक बदलाव होते हैं। उस वक्त हमें अपनी शारीरिक बदलाव की चिंता नहीं होती है, सिर्फ अपने बच्चे की चिंता होती है। एक नवजात शिशु की देखभाल करना कोई आसान काम नहीं है। उसे बड़े प्यार और जतन से किया जाता है। जितनी अच्छी तरह से एक मां अपने बच्चे  को समझ सकती है उतनी अच्छी तरह से कोई भी नही समझ पाता। 

बच्चे जब बोलना भी शुरू नही करते हैं तो उनकी हरकतों से मां ज़्यादातर उनकी हर बात समझ जाती है। उन्हें क्या चाहिए और क्या नहीं। लेकिन प्रगति चाहते हुए भी कुछ भी ऐसा न कर पायी। वो खुद में ही रहती। 

और रोहित भी धीरे-धीरे अपने पिता से जुड़ गया। उसके पिता ही उसकी मां हैं। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं उन पर घर के माहौल का और हमारी हर छोटी-छोटी बातों का बहुत प्रभाव पड़ता है।

प्रगति कभी रोहित को अपने पास नहीं आने देती है। वो जब भी उसके पास जाकर बैठ जाता, उसके साथ खेलने की,अपनी मां को प्यार करने की कोशिश करता तब प्रगति उसे फटकार लगा देती। वो बच्चा रोता हुआ अपने कमरे में चल जाता। वो अपने दोस्तों को देखता था कि कैसे उनकी मां उन्हें अपने हाथों से खाना खिलाती है, उनके साथ खेलती है, ‘फिर मेरी मां मुझे प्यार क्यों नहीं करती। मैंने ऐसा क्या किया?’

“रोहित स्कुल से आ गया?” शेखर ने प्रगति से पूछा।

प्रगति ने कहा, “नहीं। वो आज घर में किटी पार्टी थी सो मैं भुल गई।” 

“कैसी मां हो तुम, कैसे भुल सकती हो उसे स्कूल से लाना। मैंने फोन कर के तुम्हें बोला था ना?”

प्रगति गुस्से में कहती है, “मैं उसकी मां नहीं हूं, तुम ने उसे जबरन मुझ पर थोपा था। मैं तो चाहती ही नहीं थी।” 

शेखर जैसे ही रोहित को लेने के लिए जाता है तभी अचानक घंटी बजती है। शेखर जल्दी से दरवाजा खोलता है तो तभी समाने रोहित की टीचर होती है जो उसे अपने साथ घर छोड़ने आती है। रोहित एक दम गुमसुम सा खड़ा रहता है। उसकी टीचर ने बताया कि वो घर आना नहीं चाह रहा था। बहुत समझाने के बाद माना है। 

जाते-जाते रोहित की टीचर ने कहा, “सर जब बच्चे अपने ही घर में खुश नहीं हैं और अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं तो वो दुनिया के किसी भी कोने में क्यों ना हो वो कभी खुश नहीं हो पायेगे और ना कभी अपने को सुरक्षित महसूस कर पायेंगे। सो प्लीज़ सर इसका ख्याल रखियेगा।” शेखर रोहित को गले से लगा लेता है।

रोहित अपने पापा से बोलता है, “पापा मेरा क्या कसूर है, मां मुझे प्यार क्यों नहीं करती। मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?” शेखर के पास रोहित के सवाल का कोई जवाब नहीं था।

एडिटर का नोट :दोस्तों क्या आपके पास इस सवाल का जवाब है? प्रगति को दोष देना बहुत आसान है लेकिन उसको माँ बनना है या नहीं, इस बात का निर्णय लेने के लिए उसको थोड़ा और वक़्त या आज़ादी मिलती तो इस तरह एक परिवार खराब न होता। एक बच्चे को जन्म देने के लिए माता और पिता दोनों की मंज़ूरी ज़रूरी है।  

मूल चित्र : Markanja from Getty Images Signature/Muralinath from Getty Images via Canva Pro 

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