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हाथरस गैंगरेप केस को लेकर देशभर में गुस्सा और आक्रोश

हाथरस गैंगरेप केस का मामला अब देशभर में एक बड़ा रूप ले चुका है और हर कोई पीड़िता के ख़िलाफ़ हुए इस अन्याय का विरोध कर रहा है।

हाथरस गैंगरेप केस का मामला अब देशभर में एक बड़ा रूप ले चुका है और हर कोई पीड़िता के ख़िलाफ़ हुए इस अन्याय का विरोध कर रहा है।

चेतावनी : इस पोस्ट में बलात्कार का विवरण है जो कुछ लोगों को उद्धेलित कर सकता है।

इसी साल मार्च की 20 तारीख़ को देश की बेटी निर्भया को इंसाफ़ मिला था जब उसकी अस्मिता को तार-तार करने वाले गुनहगारों को फांसी पर लटकाया गया था। इंतज़ार लंबा था लेकिन अंत में जीत न्याय की हुई। दिल्ली के निर्भया गैंगरेप ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। पूरा देश एक परिवार की तरह अपनी बेटी के लिए इंसाफ़ की लड़ाई लड़ रहा था।

लेकिन एक बार फिर वही काला वक्त लौट आया है। 14 सितंबर 2020 को उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 साल की एक और बेटी इस घिनौने अपराध की बलि चढ़ गई और एक बार फिर निर्भया का चेहरा हम सबके सामने आ गया। लेकिन हद तो तब हो गई जब पुलिस और प्रशासन ने परिवार के बिना ही पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया। हाथरस गैंगरेप केस के पूरे मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT गठित तो कर दी है जब तक न्याय नहीं मिल जाता तब तक ये लड़ाई भी जारी रहेगी।

क्या है पूरा मामला

हाथरस गैंगरेप केस की ख़बर न्यूज़ चैनल्स पर लगातार चल रही है। रोज़ इस मामले में नई-नई बातें सामने आ रही हैं। आइए ज़रा सिलसिलेवार तरीके से ये जानने की कोशिश करें कि क्या हुआ था और क्या हो रहा है?

14 सितंबर को एक बिटिया सुबह-सुबह अपनी मां और भाई के साथ खेतों में काम करने गई थी। काम करते-करते वो अपने मां-भाई से थोड़ा अलग हो गई। उस वक्त चार युवक जो खेत में छिपे थे उन्होंने उसको पकड़ लिया और वहीं पर उसके साथ गैंगरेप किया।

हालांकि युवती ने खुद को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह बच नहीं पाई। इन चार अपराधियों ने ना सिर्फ़ उसका रेप किया बल्कि हैवानियत की हर हद लांघते पीड़िता के शरीर को बेदर्दी से निर्जीव कर दिया। अपराधियों ने सोचा कि वो मर चुकी है और वहां से फरार हो गए। लेकिन इस युवती ने हार नहीं मानी। 15 दिन तक अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में उसने मौत से लड़ाई लड़ी।

उसके शरीर की कई हड्डियां टूट चुकी थी और कई हिस्सों में लकवा भी मार गया था लेकिन वो अपनी जंग जीतना चाहती थी। 28 सितंबर को उसकी बिगड़ती हालत के बाद दिल्ली रेफर कर दिया गया लेकिन 29 सितंबर को सुबह 6 बजे के करीब इस युवती ने अंतिम सांस ली। इससे पहले कि उसकी आंखें हमेशा के लिए बंद हो जाती उसने पुलिस को अपना बयान दे दिया।

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हाथरस गैंगरेप केस में इस बेटी के साथ जो भी हुआ वो सुनकर ही गुस्सा और डर लगता है तो सोचिए, उस बच्ची पर क्या बीता होगी?

अपराधी पकड़े गए पर कार्रवाई में ढील

इस बेटी को अपनी हैवानियत का शिकार बनाने वाले चारों गुनहगारों को पुलिस ने पकड़ तो लिया है लेकिन आरोप ये है कि हाथरस पुलिस द्वारा कोई कड़ी कार्ऱवाई नहीं की जा रही है। हालांकि, दबाव आने पर पुलिस ने हत्या, रेप की धारा लगाकर चारों लड़कों को जेल में बंद कर दिया है लेकिन आरोपियों पर गैंगरेप की धारा लगाने में ही हाथरस पुलिस ने 9 दिन का वक्त लगा दिया जिससे कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लग रहा है।

रातों रात पुलिस द्वारा पीड़िता का अंतिम संस्कार

यही नहीं, मंगलवार को पीड़िता की मौत के बाद रातों रात पुलिस द्वारा रात करीब 2.30 बजे अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें शव देने से इनकार कर दिया और उन्हें घर बंद करने के बाद खुद ही अंतिम संस्कार कर दिया। एक तरफ़ पीड़िता के भाई, पिता और अन्य परिजन पुलिस के कृत्य के ख़िलाफ़ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो दूसरी ओर दिल्ली में भी इस मामले को लेकर लोगों मे काफी रोष है।

एक वीडियो सामने आने के बाद इस मामले से देशभर में गुस्से का गुबार फूट पड़ा है।

पीड़िता के लिए इंसाफ़ की गूंज

यह मामला अब देशभर में एक बड़ा रूप ले चुका है और हर कोई पीड़िता के ख़िलाफ़ हुए इस अन्याय का विरोध कर रहा है। सड़क से लेकर सरकार तक और आम से लेकर खास तक हर कोई इन्साफ की मांग कर रहा है। सोशल मीडिया हो, राजनेता हों, बॉलीवुड स्टार हों या खिलाड़ी हों, हर कोई इस घटना से हैरान हैं और यही चाहते हैं कि निर्भया की तरह इस मामले में बिना देरी किए अपराधियों को सख्त से सख्त सज़ा दी जाए। आक्रोश इस कदर है कि देश की जनता इन गुनहगारों को फांसी पर देखना चाहती है।

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में सभी को आश्वस्त करते हुए कहा है जल्दी ही जांच होगी और पीड़िता को न्याय मिलेगा। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है

सब साथ तो खड़े हैं लेकिन न्याय कब मिलेगा केवल कानून ही जानता है। हम प्रत्यक्ष रूप से ना सही लेकिन इस बेटी की लड़ाई में अपनी आवाज़ बुलंद ज़रूर कर सकते हैं। जिन्होंने ये भी ये किया है भले ही वो अपराधी हों या कानून की वर्दी में पीड़िता का अंतिम संस्कार करने वाले अत्याचारी उन्हें सज़ा ज़रूर मिलेगी।

फोटो साभार : YouTube/Canva Pro

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