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आज के ये 8 सुविचार भर देंगे आपके जीवन में सशक्तिकरण की नई रौशनी!

Posted: सितम्बर 19, 2020

हो सकता है आप किसी समस्या में हो और आज सशक्तिकरण के इस सुविचार संग्रह से आपको कोई सशक्त समाधान और एक सकारात्मक ऊर्जा मिल जाए।

कहते हैं अगर सुबह का आगाज़ और रात की नींद से पहले हम एक सुविचार को मन में आत्मसात करें तो पूरा दिन अच्छा गुजरता है। हमारे मन में निहित सुविचार संग्रह से जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। चिंता चिता समान नहीं चुटकी जैसी लगती है। एक आशावादी व्यक्ति स्वयं और समाज के लिए एक अमूल्य निधि होता है।

आइए आज नारी सशक्तिकरण के ऐसे सुविचारों को जानते हैं जिनसे आपके जीवन और मन को एक नई दिशा मिल सकती है। हो सकता है आप किसी समस्या में हो और आज के इस सुविचार संग्रह को पढ़कर आपको समाधान मिल जाए।

आवाज उठाने वाली औरत ही एक मजबूत औरत है – मिलिंडा गेट्स

अपना दृष्टिकोण रखने वाली और अपने तथा दूसरों के लिए आवाज उठाने वाली औरत ही शक्तिशाली औरत है इसलिए आप या कोई अक्षम किसी समस्या में है तो अपने लिए आवाज उठानी चाहिए।

■ हर चीज से बढ़कर, अपने जीवन की नायिका बनिए शिकार  नहीं – नोरा एफ्रान

सच है ! जीवन हमारा है और यह हमें अपनी आकांक्षाओं के अनुरूप जीना चाहिए। इसकी डोर हमारे हाथ में होनी चाहिए ना की किसी अन्य के।

नारी सदैव अजय रही हैं – महादेवी वर्मा

नारी मुक्ति के विषय में महादेवी वर्मा जी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की स्त्री तो भारत मां की प्रतीक है अपने समस्त संतान को सुखी देखना चाहती है उन्हें मुक्त करने में ही उनकी मुक्ति है।

औरतें  टी  बैग्स  की  तरह  होती  हैं। हम अपनी असली  ताकत  तब  तक  नहीं  पहचानती  जब  तक  कि  हम  गरम  पानी  में  ना  हों – एलेनोर  रूजवेल्ट

जी हां मुश्किलें हमें लड़ने का हौसला देती है। बेगम हजरत महल जैसी महिलाएं इसका एक उदाहरण मुश्किल पड़ने पर उन्होंने दुश्मनों को लोहे के चने चबवा दिए।

मैंने उनमें एक स्टेट्समैन की खूबियां देखी थीं। वह अपने मुल्क को लेकर बेहद जुनूनी थीं, हमेशा उत्साहित रहती थीं और बहुत यथार्थवादी थीं” – मारग्रेट थ्रैचर( इंदिरा गांधी की तारीफ करते हुए)

काम के प्रति जुनून, उत्साह और यथार्थवादी दृष्टिकोण हमें सफलता की ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

हमारे मन में सबसे अच्छे विचार समय आते हैं जब हम बर्तन धो रहे होते हैं – अगाथा क्रिस्टी

शायद आपने भी कभी ऐसा महसूस किया हो।

स्त्री का शारीरिक सामर्थ्य भले ही कम हो उसकी वाणी में असीम सामर्थ्य है – लक्ष्मीबाई केलकर

कौन कहता है कि औरतें कमज़ोर होती हैं?

भारतीय मर्द अब भी औरतों को परंपरागत काम करते देखने के आदी हैं, उन्हें बुद्धिमान औरतों की संगत तो चाहिए होती है लेकिन शादी के लिए नहीं। एक सशक्त महिला के साथ की कद्र करना अभी उन्हें नहीं आया है – अमृता प्रीतम

सशक्त बनें किसी के आदी होने का इंतजार ना करें।

त्याग, सहनशीलता और जीवटता के गुणों से भरपूर व्यक्ति कभी पराजित नहीं हो सकता। नारी तो इन गुणों से भरपूर है अगर वो ठान ले तो कुछ भी कर सकती है। तो देर किस बात की? देखिए आपको इस आज के सुविचार संग्रह के किस विचार ने प्रभावित किया।

मूल चित्र : Matrix Images from Getty Images via Canva Pro

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