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रक्षा बंधन तब और अब!

Posted: अगस्त 2, 2020

जिस घर में केवल दो बहने ही हों, उस घर में रक्षा बंधन पर उन दो बहनों का एक दूसरे को राखी बाँधना क्या गलत है?

एक भाई बहन के बीच का रिश्ता बहुत ही अनोखा और प्यारा होता है। भारत में तो इस रिश्ते के लिए एक ख़ास त्यौहार है ‘रक्षाबंधन’।
‘रक्षाबंधन’ शब्द का अर्थ है ‘सुरक्षा का बंधन’। रक्षाबंधन का अनोखा त्यौहार भाई-बहन के रिश्ते को सेलिब्रेट करने के लिए हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस शुभ दिन पर, बहनें अपने भाइयों की कलाई पर ‘राखी’ बांधती हैं, ताकि उन्हें बुरे प्रभावों से बचाया जा सके और उनके लंबे जीवन और खुशियों की प्रार्थना की जा सके। वे बदले में, एक उपहार देते हैं, जो एक वादा है कि वे अपनी बहनों को किसी भी नुकसान से बचाएंगे। सभी का मानना है, राखियों के भीतर पवित्र भावनाओं और शुभकामनाओं का निवास होता है।
रक्षा बंधन को अब सिर्फ एक भाई और एक बहन के पवित्र रिश्ते को मनाने का दिन माना जाता है। फिर भी इतिहास में ऐसे उदाहरण हैं जहां राखी सिर्फ एक रक्षा या संरक्षण रही है। रवींद्रनाथ टैगोर ने अंग्रेजों द्वारा बंगाल को विभाजित करने के फैसले को रोकने के लिए दो धर्मों के बीच सद्भाव और भाईचारे को लाने के लिए राखी का इस्तेमाल किया था। पहले के समय में राखी को एक रक्षा का प्रतीक माना जाता था। वह किसी एक विशेष रिश्ते से सम्बंधित नहीं थी।

रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथाएं 

रक्षा बंधन के त्यौहार की शुरुआत सदियों पहले हुई थी और इस विशेष त्यौहार के जश्न से जुड़ी कई कहानियाँ हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं से संबंधित विभिन्न कथाओं में से कुछ नीचे वर्णित हैं:

  1. इंद्र देव और शचि- भव्‍य पुराण की प्राचीन कथा के अनुसार, एक बार देवताओं और राक्षसों के बीच भीषण युद्ध हुआ था। भगवान इंद्र जो देवताओं की ओर से लड़ाई लड़ रहे थे। शक्तिशाली दानव राजा, बलि से एक कठिन प्रतिरोध कर रहे थे। युद्ध लंबे समय तक जारी रहा और निर्णायक अंत तक नहीं आया। यह देखकर इंद्र की पत्नी शची भगवान विष्णु के पास गईं । जिन्होंने उन्हें एक सूती धागे से बना हुआ पवित्र कंगन दिया। शची ने अपने पति भगवान इंद्र की कलाई के चारों ओर पवित्र धागा बाँधा, जिसने अंततः राक्षसों को हराया और अमरावती को पुनः प्राप्त किया।
  2. राजा बलि और देवी लक्ष्मी- भागवत पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने राक्षस राजा बलि से तीनों लोकों को जीत लिया, तो उन्होंने राक्षस राजा से कहा कि वे महल में उनके पास रहें। प्रभु ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और राक्षस राजा के साथ रहना शुरू कर दिया। हालांकि, भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी अपने पैतृक निवास वैकुंठ जाना चाहती थीं। इसलिए, उसने राक्षस राजा, बली की कलाई पर राखी बांधी और उसे भाई बनाया। वापसी उपहार के बारे में पूछने पर, देवी लक्ष्मी ने बली को अपने पति को व्रत से मुक्त करने और वैकुंठ लौटने के लिए कहा। बलि अनुरोध पर सहमत हुए और भगवान विष्णु अपनी पत्नी देवी लक्ष्मी के साथ अपने स्थान पर लौट आए।
  3. संतोषी माँ- ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश के दो पुत्रों शुभ और लाभ को निराशा हुई कि उनकी कोई बहन नहीं है। उन्होंने अपने पिता से एक बहन के लिए कहा, भगवान गणेश ने दिव्य ज्वालाओं के माध्यम से संतोषी माँ का अवतरण हुआ और रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान गणेश के दो पुत्रों को उनकी बहन मिली।
  4. कृष्ण और द्रौपदी- महाभारत के एक लेख के आधार पर, पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भगवान कृष्ण को राखी बाँधी, जबकि कुंती ने युद्ध से पहले पोते अभिमन्यु को राखी बाँधी।

आज के समय में रक्षाबंधन

रक्षाबंधन को लेकर आज भी हर भाई-बहन का विश्वास आज भी वही है, राखी आज भी रक्षासूत्र के रूप में ही बाँधी जाती है।
बचपन से ही रक्षाबंधन भाई बहनों का अपना त्यौहार होता था। हर बहन अपने भाई के कलाई पर सजाई जाने वाली राखी, कुछ इस तरह ढूंढती थी, जैसे वह राखी हमेशा के लिए कलाई पर रहने वाली है। बड़े होने के बाद कुछ बदलाव आ जाते हैं। कभी भाई शहर के बाहर होते हैं, तो कभी हमारे कॉलेज वाले इतनी छुट्टी नहीं देते कि हॉस्टल से घर तक का सफर तय करके राखी बाँधने जा सकें।
अब रक्षाबंधन पर घर में बुआ नहीं आतीं हैं और मामा के यहां मम्मी भी नहीं जा पातीं हैं, तो अब त्योहारों की फीलिंग टीवी एड्स देखकर आती है।

डिजिटल दौर में रक्षाबंधन

वैसे बात जब आजकल की कर रहे हैं, तो हम डिजिटल दुनिया की बात बिना करे, कैसे रह सकते हैं। डिजिटल दुनिया के बहुत से फायदे हैं। विशेष रूप से त्यौहार के दिनों में, ये इंटरनेट किसी वरदान से कम नहीं लगता। अब अलग-अलग शहरों में रहकर ऑनलाइन वीडियो कॉल पे राखी बाँधी जाती है और गिफ्ट्स की अब तो सीधा होम डिलीवरी हो जाती है।
वैसे अब गिफ्ट्स सिर्फ भइया के तरफ से नहीं दिए जाते, बदले में भाई को भी राखी के साथ कुछ गिफ्ट दिए जाते हैं। हम सब जानते हैं कि रक्षाबंधन के पीछे का उद्देश्य भाई का बहनों रक्षा करना है लेकिन अब वो मायने भी बदल चुके हैं। अब अगर किसी के यहाँ लड़का नहीं होता है, सिर्फ दो लड़कियाँ होती हैं तो वो आपस में एक दूसरे को राखी बाँधती हैं और कहती हैं की मेरी रक्षा मेरी बहन करती है। तो ये राखी उसकी कलाई पर बाँधने में क्या गलत है? बहनों का आपस में राखी बाँधना अब जायज़ सा नज़र आता है। आखिर त्यौहार कोई भी क्यों न हो, ख़ुशी मनाने का अधिकार तो सबका ही है!

मूल चित्र: Canva

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