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नीना गुप्ता का सीरियल सांस : पहले देखा है तो फिर देखिए, नहीं देखा तो देख लीजिए!

Posted: अगस्त 13, 2020

अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर नीना गुप्ता ने सीरियल सांस के बारे में कहा कि 10 अगस्त 2020 को उनका पुराना सीरियल सांस फिर से छोटे पर्दे पर एंट्री कर रहा है।

आज 20वीं सदी में होने के बावजूद भी हमारे कई हिंदी सीरियल बहुत ही मिसोजनिस्टिक और अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले हैं। आज जब हम आधुनिकता की बातें करते हैं वहीं हमारे टीवी सीरियल्स में तो उलटी गंगा बह रही है।

कभी-कभी आगे बढ़ने के लिए पीछे मुड़कर देखने की ज़रूरत होती है। इसी तरह आज के टीवी को भी एक झलक 80 और 90 के दशक में बने कुछ सीरियल्स से सीख लेनी चाहिए। उस समय कई ऐसे प्रोग्रेसिव विचारों वाले नाटक बने जो आज 20वीं सदी में प्रासंगिक लगते हैं। ये सीरियल सामाजिक, राजनीतिक और महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते थे। इन्हीं शक्तिशाली महिला पात्रों में से एक थी सांस की प्रिया।

नीना गुप्ता का 90 के दशक का शो सांस फिर से टीवी की दुनिया पर लौट आया है

नीना गुप्ता का 90 के दशक का शो सांस फिर से टीवी की दुनिया पर लौट आया है। नीना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट के ज़रिए ये जानकारी दी थी कि 10 अगस्त 2020 को उनका पुराना सीरियल सांस फिर से छोटे पर्दे पर एंट्री कर रहा है।

सांस की कहानी और निर्देशन नीना गुप्ता ने खुद ही किया था

इस सीरियल में नीना गुप्ता ने ना सिर्फ लीड रोल किया था बल्कि इसकी कहानी और निर्देशन भी उन्होंने खुद ही किया था इसलिए ये उनके लिए बहुत ख़ास है। पिछले साल से ही इस सीरियल की री-लॉन्चिंग की बातें तो हो रही थी जिसे लेकर नीना ये अनाउंसमेंट भी किया था कि वो एक ऐसे मंच की तलाश में हैं जहां इसे अच्छे से दोबारा लॉन्च किया जा सके। फिर चाहे वो माध्यम डिजिटल हो या फिर टीवी। आख़िकार वो घड़ी आ गई और सांस एक बार फिर टीवी पर रिलॉन्च हुआ।

प्रिया के रूप में नीना ने गढ़ी एक बेमिसाल कहानी

‘सांस’ की कहानी का सब्जेक्ट था इन्फिडिलिटी यानि शादी के बावजूद अवैध संबंधों का होना। अब आप खुद ही सोच लीजिए की अपने समय से कितने आगे रहा होगा ये नाटक। जो आज हो रहा है वो होता पहले भी आया है लेकिन उसे कहने और करने की आज़ादी पहले उतनी नहीं थी जितनी आज है। नीना गुप्ता ने इस साहसी कहानी को लिखते हुए हर किरदार पर फोकस किया। इस कहानी में प्रिया (नीना गुप्ता) अपने पति गौतम (कंवलजीत) के साथ ख़ुशहाल जीवन बिता रही है लेकिन कहानी का ट्विट्स है ‘वो’ यानि मनीषा (कविता कपूर) जिसके साथ प्रिया के पति के अवैध संबंध है। प्रेम त्रिकोण के रिश्तों पर बना यह सीरियल आज के मिलेनियल्स को भी ज़रूर देखना चाहिए।

नीना गुप्ता का सीरियल सांस पुराना, पर बात आज की करता है

पुरानी रूढ़ियों में झांके तो अक्सर एक औरत को ऐसा सिखाया या समझाया जाता है कि पति जो भी करे लेकिन उसकी हर गलती को माफ़ कर देना चाहिए। आपकी ज़िंदगी केवल पति पर केंद्रित होनी चाहिए। परिस्थितियां कैसी भी हों लेकिन खुद से पहले पति को रखना चाहिए। फिर पति को मर्द का तमगा पहनाकर समाज उनकी हर गलत बात को भी ढंकने की कोशिश करता है। लेकिन ‘सांस’ की प्रिया ऐसा नहीं करती और अपनी शादी-शुदा ज़िंदगी में पैदा हुई परिस्थितियों को अपने हिसाब से देखती, परखती, समझती और सुलझाती है। सांस की ख़ास बात ये है कि ये ‘वो” यानी दूसरी लीडिंग लेडी कैरेक्टर मनीषा के पहलू को भी दिखाता है कि कैसे वो भी पितृसत्तात्मक समाज और मिसोजनिस्टक रूढ़ियों का शिकार होती है।

नीना गुप्ता का सीरियल सांस राहत की सांस लेकर आया था

नीना गुप्ता अवंत-ग्रेड मूवमेंट यानि पैरेलर सिनेमा के आंदोलन से जुड़ी हुई थीं। टैलेंट तो बहुत था लेकिन उनकी कई समकालीन अभिनेत्रियों के मुकाबले उन्हें फिल्मों में उतना मौका नहीं मिलना जितना उन्हें मिलना चाहिए था। समानांतर सिनेमा के ज्यादातक निर्देशक या तो शबाना आज़मी को कास्ट करते थे या फिर स्मिता पाटिल की झोली में रोल जाते थे। नीना कहती हैं ‘अगर उस समय टीवी पर सांस के ज़रिए मुझे अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका ना मिलता तो शायद मेरे अंदर का कलाकार कहीं खो जाता।”

सांस ने सिर्फ तारीफ़ ही नहीं कई अवॉर्ड भी बटोरे

सीरियल सांस से जुड़े सभी कलाकारों को उनके एक्टिंग करियर में बूस्ट मिला और सबके काम की बेहद तारीफ़ भी हुई। लोगों ने इसे ख़ूब सराहा। नीना गुप्ता को 1998 के कलाकार अवॉर्ड में बेस्ट डायरेक्टर और कंवलजीत सिंह को बेस्ट एक्टर का सम्मान मिला। इसके अलावा भी इस सीरियल को कई अवॉर्ड फंक्शन में सराहा गया।

सांस 90 के दशक के प्रतिष्ठित धारावाहिकों में से एक था जिसके लिए लोगों के मन में आज भी उतना प्यार और इंतज़ार है जितना तब था।

सांस का टाइटल ट्रैक आपका दिल छू लेगा

मैंने पहले तो ये सीरियल नहीं देखा क्योंकि तब मैं बहुत छोटी थी, हां लेकिन नाम ज़रूर सुना था। अभी हाल ही में इसे देखना शुरू किया है और यकीन मानिए ये बेहतरीन है। मैंने सबसे पहले सुना इसका टाइटल ट्रैक गुलज़ार के लिखे बोल और हरिहरन की आवाज़ का मेल बहुत ही ख़ूबसूरत हैं।

सांस सदा नहीं रहती…

सांस सदा नहीं रहती…

कभी-कभी मर जाती है

कभी-कभी जी उठती हैं…

सांसें सदा नहीं रहती…

खुशबू की तरह घुल जाती हैं

खुशबू की तरह घुल जाती हैं

जब धूप कहीं धुल जाती है

जब धूप कहीं धुल जाती है

सौंधी सुबह नहीं रहती

सांस सदा नहीं रहती…

सांस सदा नहीं रहती…

सांस हर औरत को सशक्त और अपनी ज़िंदगी की कमान ख़ुद के हाथों में थामना सिखाता है।

नीना गुप्ता का मैसेज है – “सांस पहले देखा है तो फिर देखिए, नहीं देखा तो देख लीजिए और नहीं भी देखना तो मैं तो बस जानकारी दे रही हूं कि टाटा स्काई पर चैनल नंबर 505 पर सोमवार से शुक्रवार रोज़ दोपहर 12 बजे और रात 9 बजे देखिए सांस।”

मूल चित्र : YouTube 

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