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मुक्ति

बच्चों, यदि किसी सुबह मैं सोती ही रह जाऊं तो मेरे एक दो काम बिना भूले, याद से कर देना। वो क्या है न कि, हम इंसान कई ऐसी अनदेखी, अनजानी जिम्मेदारियों का बँटवारा नहीं कर पाते...

बच्चों, यदि किसी सुबह मैं सोती ही रह जाऊं तो मेरे एक दो काम बिना भूले, याद से कर देना। वो क्या है न कि, हम इंसान कई ऐसी अनदेखी, अनजानी जिम्मेदारियों का बँटवारा नहीं कर पाते…

बच्चों, यदि किसी सुबह मैं सोती ही रह जाऊं तो मेरे एक दो काम बिना भूले, याद से कर देना।
सुबह छ: बजे छत पर कुछ पंछी आते हैं, उन्हें पानी और एक कटोरी भरकर दाने दे देना! दानों भरा डिब्बा ऊपर वाले स्टोर में ही रखा है।
फिर लगभग सात बजे तीन भूरे पिल्ले आऐंगें, गली की उसी काली कुतिया के जो पिछले महीने ब्याई थी,  उनके बिस्किट बरामदे की अलमारी से निकालकर दे देना, और हां दूध का कटोरा बाहर गेट वाले लैटरबाक्स के नीचे ही पड़ा है, दूध में कुछ मिलाना मत, वो पिऐंगें नहीं। ये तीनों पिल्ले दूध और बिस्किट अलग-अलग खाते हैं।
बागीचे मैं दोपहर को तकरीबन एक बजे एक काली चिड़िया आकर आवाज़ देगी, चींचीं करके, उसके लिए मैंने आम के पेड़ के ऊपर ही दो कटोरे लटका रखे हैं, उन्हीं में एक में दाना और एक में पानी रख देना। कटोरे में कल वाला दाना बचा हो तो पेड़ के साईड में ही कहीं डाल देना, कोई और पंछी आकर खा लेगा।

शाम को चार बजे के आसपास कुछ बंदरों का झुंड आकर बैठा करता है ऊपर वाली बालकनी में नीचे लगे नल के पास। वहां पड़े डिब्बे में कुछ रोटियां रख देना।

क्योंकि मैं जानती हूं ये मेरे कुछ ऐसे काम हैं जो शायद तुम लोगों की नजर में कभी आए न हों।
मुझे याद है मेरी नानी ने एक बार मुझे चिड़ियों को दाना डालते देख कर समझाया था, “ऐ लल्ली, जानवर को एक बार रोटी-पानी देना शुरू कर देओ न तो वो पूरी उमर तै बख़त पे खाने की आस में बाट देक्खा करै! एक बार किसी भी जानवर के खाने का बख़त बाँध लिया तो फेर छोड़िए न! जिस दिन भूल गई न तू, उसी दिन खाने की आस टूटके उसका जी बैठ जावेगा।”

जानती हूं ये सभी जीव मेरा अपने-अपने तय वक्त पर इंतजार करेंगे और हो सकता है मुझे न पाकर एक दो दिन मेरी कमी महसूस करें, लेकिन कोई बात नहीं, इन्हें इनके तय बख़त पर जीने का सहारा, इनका खाना-दाना मिलता रहेगा तो मन ही मन मुझे याद तो करते रहेंगें! थोड़े दिनों में तुम्हारे हाथ से खाने की आदत पड़ जाएगी।
बस बाकि तुम सब तो अपना ध्यान रख लोगे, मुझे विश्वास है!
वो क्या है न कि, अक्सर जमीन-जायदाद, गहने-जेवरों के बँटवारे के तरीके तो हम इंसान निकाल ही लेते हैं लेकिन जीते जी कई ऐसी अनदेखी, अनजानी जिम्मेदारियों का बँटवारा हम नहीं कर पाते जिनके निर्वहन न होने पर हमारे बाद, हमारी आत्माओं को आसानी से मुक्ति नहीं मिला करती!
मूल चित्र : Pexels

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