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मेडिकल गृह, तमिलनाडु में स्वास्थ्य जरूरतों की अनदेखी

एक ओर जहां कंडोम, आई पिल आदि पर पाबंदी है, तब सेक्स के विषय में कैसी चुप्पी होगी!!

एक ओर जहां कंडोम, आई पिल आदि पर पाबंदी है, तब सेक्स के विषय में कैसी चुप्पी होगी!!

भारत में गर्भनिरोधक गोलियों के साथ-साथ जहां कंडोम जैसे शब्दों पर, लोग चरित्र पर उंगली उठाने लगते हैं। वहां प्रेगनेंसी को टर्मिनेट करने की बात पर लांछन लगना एक आम बात ही होगी। ऐसे रिपोर्ट्स के मुताबिक आपातकालीन गर्भनिरोधक भारत में हमेशा से निषेध रहे हैं।

तमिलनाडु का नाम, इसमें अभी ज्यादा आ रहा है। क्योंकि वहां गर्भनिरोधक गोलियों के साथ-साथ अन्य गर्भनिरोधक वस्तुओं पर अघोषित बैन लग गया है। जिसके कारण संभवत: 1,24,086 गर्भधारण, 35,489 जन्म  और 75,446 अर्बोशन का खतरा बताया जा रहा है।

मेडिकल  हब  में मेडिकल  जरूरतें गायब

हकीकत यह है कि लॉक डाउन के समय लगे, इस अघोषित बैन के कारण, अनेकों महिलाओं के साथ-साथ अनेकों बच्चों की ज़िंदगी भी ताक पर चली जाएगी। भारत का सबसे बेहतरीन मेडिकल हब माने जाने वाले चेन्नई में वर्तमान समय में कोई भी आई पिल नहीं है। यदि आपको इसकी जरूरत पड़ती है, तब आपको तमिलनाडु से बाहर जाना पड़ेगा। आपको पांडिचेरी या कर्नाटक की यात्रा करनी पड़ेगी क्योंकि तमिलनाडु में आई पिल की व्यवस्था नहीं है।

साल 2010 से ही तमिलनाडु में इमरजेंसी गर्भनिरोधक की स्वीकार्यता कम रही है। हालांकि बाद में यह मेडिकल स्टोर्स पर आसानी के साथ मिल जाया करती थी। लेकिन 2016 से यह दवाएं मेडिकल स्टोर्स से एक बार फिर गायब हो गईं हैं। अभी यह मामला फिर सुर्खियों में इसलिए आया है क्योंकि लॉक डाउन के दौरान बने असुरक्षित यौन संबंधों के कारण मार्केट में आई पिल की मांग बढ़ गई है।

गर्भनिरोधक गोलियों पर निर्भरता कम

फाउंडेशन फॉर रिप्रोडक्टिव हेल्थ सर्विसेज इंडिया द्वारा इस साल के शुरू में किए गए सर्वेक्षण के एक अध्ययन में पाया गया कि 0.2% महिलाएं ही गर्भ निरोधक गोलियों पर निर्भर थीं।

तमिलनाडु की प्रमुख गर्भ निरोधक विधियों में महिला नसबंदी है, जो 94% गर्भ निरोधन में योगदान करती है।  हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रतिशत 75% है।

तमिलनाडु गर्भनिरोधक के लिए महिला नसबंदी पर प्रमुख रूप से निर्भर है। वहीं कंडोम, ओसीपी, ईसीपी, आईयूसीडी जैसे तरीकों का उपयोग भी बहुत सीमित है।

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लॉक डाउन में अन्य सुविधाएं नदारद

ऐसे भी लॉक डाउन के कारण स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं ठप्प पड़ गई हैं। जिस कारण कंडोम और गर्भ निरोधक दवाओं का मिलना मुश्किल हो गया है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष ने यह अनुमान लगाया है कि आने वाले महीनों में अनचाहे गर्भधारण के 70 लाख मामले सामने आ सकते हैं। जाहिर है कि इससे जनसंख्या में बढ़ोतरी होने का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही लोगों की परेशानियाँ भी बढ़ जाएंगी।

महिलाओं के स्वास्थ्य को देखते हुए, यह निर्णय बेहद बुरा प्रभाव दे सकता है। क्योंकि अनचाहे गर्भ के कारण अनेकों परेशानियाँ सामने आ सकती हैं। एक ओर जहां कंडोम, आई पिल आदि पर पाबंदी है, तब सेक्स के विषय में कैसी चुप्पी होगी, इसका अंदाज़ा लगाना आसान है।

मूल चित्र:Canva

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