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रिलेशनशिप मैनेजर – 76वें दिन बाहर सन्नाटा था लेकिन एक घर में बस शोर ही शोर था…

Posted: जुलाई 19, 2020

बाहर भले ही सन्नाटा पसर गया लेकिन किसी के घर में बस शोर ही शोर था। लॉकडाउन के 76वें दिन कुछ हुआ था, क्या? आइए जानते हैं इस शॉर्ट फिल्म रिलेशनशिप मैनेजर में।

मुंबई शहर जो कभी नहीं सोता वो भी इस लॉकडाउन में कुछ दिनों के लिए ठहर सा गया। जहां ट्रैफिक की लंबी-लंबी कतारें हुई करती थीं वो अब ज़रा सूना सा हो गया है। बाहर भले ही सन्नाटा पसर गया लेकिन किसी के घर में बस शोर ही शोर था। लॉकडाउन के 76वें दिन कुछ हुआ था, क्या? आइए जानते हैं इस शॉर्ट फिल्म रिलेशनशिप मैनेजर में।

रॉयल स्टैग लार्ज-शॉर्ट फिल्म्स की करीब 10 मिनट की ये यह कहानी लेकर आए हैं फ्राइडे फिल्म वर्क्स और नीरज पांडे जिसे फाल्गुनी ठाकोर ने लिखा और निर्देशित किया है। इस फिल्म की कहानी घरेलू हिंसा के मुद्दे पर बुनी गई है।

रिलेशनशिप मैनेजर की कहानी

विनय दुबे अपनी पत्नी रिया के साथ खुशहाली से रह रहे हैं और लॉकडाउन के कड़े दिनों में हर नियम का पालन कर रहे हैं। आजकल वर्क फ्रॉम होम है तो फोन के ज़रिए ही अपने क्लाइंट्स से मिल जुल रहे हैं। एक अच्छे रिलेशनशिप मैनेजर होने के नाते उनका क्लाइंट्स भले ही बात करने के मूड में ना हो लेकिन विनय को अपना काम बखूबी आता है। CBNM बैंक में काम करने वाले विनय अपनी गर्भवती पत्नी का भी पूरा ख्याल रख रहे हैं। घर के काम करने के बाद वो लग जाते हैं ऑफिस के काम में।

पहला क्लाइंट  :

अनुपम खेर इस फिल्म में स्पेशल एपीयरेंस में है जो लॉकडाउन से परेशान हैं लेकिन विनय उनके तल्ख अंदाज़ को भी अपनी मक्खन बातों से ज़रा शांत कर ही देते हैं।

दूसरा क्लाइंट :

मोना बत्रा (सना खान) एक्ट्रेस हैं और आजकल शूटिंग बंद होने की वजह से घर पर बोर हो रही हैं। उन्हें बस यह फिक्र है कि आजकल फॉलोवर्स नहीं बढ़ रहे हैं। बाकी की बातों का ख्याल रखने के लिए विनय जो हैं।

तीसरा क्लाइंट

यहां कुछ ऐसा होता है जो विनय को खटकता है। एक थप्पड़, कांच टुटने और सहमी हुई से औरत की आवाज़ से वो अचानक फिक्रमंद हो जाता है। रवि अरोड़ा कहता है वो बाद में बात करेगा लेकिन फोन कटने के कुछ सेकेंड्स तक विनय स्तब्ध सा रह जाता है।

अपनी बीवी से बात करने के बाद विनय रवि अरोड़ा की पत्नी कविता को फोन करता है। वो बातों ही बातों में कविता से यह जानने की कोशिश करता है कि आख़िर कुछ देर पहले क्या हुआ था। साफ-साफ पूछने में थोड़ी झिझक थी इसलिए विनय अपनी बहन जिनका नाम भी कविता था उनकी कहानी सुनाने लगता है जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी।

विनय तब तक कविता से हर तर्क-वितर्क करता है जब तक कि उसे यह नहीं लगता है कविता सही फ़ैसला करेगी। कविता विनय को अगले हफ्ते फिर फोन करने के लिए कहती है और फोन रख देती है। अंत में वही होता है जो होना चाहिए था।

इस फिल्म में अनूप सोनी, दिव्या दत्ता, अनुपम खेर, सना खान और जूही बब्बर हैं। इसकी शूटिंग लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए की गई है। अनूप सोनी और दिव्या दत्ता की कॉन्वर्सेशन इस कहानी की सबसे बड़ी सीख है ‘NO ABUSE CAN BE A GOOD TRADE OFF’ /नो अब्यूज़ कैन बी अ गुड ट्रेड ऑफ  कहना का मतलब कि चाहे फायदा जो भी हो , लेकिन उसके लिए हिंसा ठीक नहीं…सहना तो बिलकुल भी नहीं…

अन्याय करने से भी बड़ा अपराध है अन्याय झेलना

कई महिलाएं सिर्फ इसलिए घरेलू हिंसा का शिकार होती है क्योंकि उन्हें लगता है परिवार का क्या होगा, बच्चों का क्या होगा या फिर समाज क्या कहेगा। धीरे-धीरे वो इसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा मानकर खुशी से मार झेलती चली जाती है। जब पहली बार ऐसा हो तभी आवाज़ उठाइए, दूसरी बार का इंतज़ार मत कीजिए। अन्याय झेलना अन्याय करने से भी बड़ा अपराध है। ऐसा करके आप सिर्फ अपनी ही नहीं बल्कि अपने बच्चों के जीवन को भी ताउम्र के लिए प्रभावित करती हैं।

घरेलू हिंसा का कानून

घरेलू हिंसा का मतलब सिर्फ मारपीट ही नहीं होता बल्कि खाना न देना, किसी से मिलने न देना, मायके वालों को ताना मारना, दहेज की मांग करना, चेहरे को लेकर ताना मारना, शक करना, घरेलू खर्चे न देना जैसी मानसिक पीड़ा देना भी घरेलू हिंसा ही मानी जाती है। कानूनी भाषा में ऐसी कोई भी घटना जो किसी महिला एवं बच्चे (18 वर्ष से कम आयु के बालक एवं बालिका) के स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन पर संकट, आर्थिक क्षति और ऐसी क्षति जो असहनीय हो या फिर जिसके कारण महिला व बच्चे को दुःख एवं अपमान सहन करना पड़े।

कैसे और कहां करें रिपोर्ट

डीआईआर को घरेलू घटना रिपोर्ट (डोमेस्टिक इंसीडेंट रिपोर्ट) कहते हैं। इसमें पुलिस के पास घरेलू हिंसा की FIR दर्ज कराई जाती है। इसके अंतर्गत हर जिले में एक सुरक्षा अधिकारी सरकार द्वारा नियुक्त होता है जो ऐसी घटनाओं का निरीक्षण करता है और पीड़ित की मदद करता है।

परिवार भी बदलें अपनी सोच

परिवार इंसान का सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम होता है। आपकी बेटी अगर ऐसा कुछ झेल रही है तो उसे ये कभी मत सिखाइए कि बेटा वही तेरा घर है, क्योंकि आपने उसे बेचा नहीं है ना ही आपसे कभी उसके संबंध खत्म होंगे।

आज वो झेलेगी कल उसके बच्चे देखकर फिर वहीं सीखेगी। बेटा बड़ा होकर औरत पर हाथ उठाना अधिकार समझेगा और बेटी शायद उसे अपना भाग्य समझकर मां की तरह झेलती रहे। घरेलू हिंसा कुप्रथा है, इसे रोकने का फर्ज़ सबसे पहले उस औरत का है जो इसे झेल रही है। जब वो एक बार आवाज़ उठा देगी तो आपको उसका हाथ थामकर ये विश्वास दिलाना है कि यह उसका भाग्य नहीं है।

मूल चित्र : YouTube 

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