कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

जो बचपन में किरदार सोचे थे मैंने, वो निभाए लेकिन…

बचपन में, अक्सर मैं सोचती, मैं आफिस जाऊंगी? या खाना पकाऊगीं? तय किया, आफिस जाऊंगी! तो बस, वहां जाती हूं, लेकिन...कुछ ऐसा भी करती हूँ... 

बचपन में, अक्सर मैं सोचती, मैं आफिस जाऊंगी? या खाना पकाऊगीं? तय किया, आफिस जाऊंगी! तो बस, वहां जाती हूं, लेकिन…कुछ ऐसा भी करती हूँ… 

बचपन में,
मां को खाना पकाता देखकर,
पिता को आफिस जाता देखकर,
अक्सर मैं सोचती ,
मैं आफिस जाऊंगी ?
या खाना पकाऊगीं ?
तय किया, आफिस जाऊंगी !
तो बस, वहां जाती हूं,
लेकिन, आकर खाना भी पकाती हूं !

मां को पैसे बचाते देखकर,
पिता को पैसे कमाते देखकर,
अक्सर मैं सोचती,
मैं पैसा कमाऊंगी ?
या पैसा बचाऊंगी ?
तो बस, पैसा कमाती हूं,
अपनी जरूरतों का मन मारकर
पैसा भी बचाती हूं!

मूल चित्र : Canva

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

टिप्पणी

About the Author

98 Posts | 278,492 Views
All Categories