कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

बचपन की यादें

Posted: जुलाई 13, 2020

जब दुनिया के बोझ तले थक, मन खोजता है सहारा। तब खोलती हूँ धीरे से, बचपन की यादों का पिटारा। तब मन था सरल, सच्चा और लगता था, सब कुछ अच्छा…

यादें बचपन की हैं, सबसे मीठी यादें।

क़द था, तब छोटा! पर बुलंद थे इरादे।

ना फ़िक्र थी, ना था दिन-रात का हिसाब।

ना कोई पूछता था, सवाल और ना देने होते थे, जवाब।

खिलौने थे, और थी, दादी-नानी की कहानियाँ।

कैसे भूल जायें बचपन का, वो भोलापन और नादानियाँ।

कूद करना और दौड़ना घर में नंगे पाँव।

भीगना बारिश में और वो छोटी सी काग़ज़ की नाव।

जब दुनिया के बोझ तले थक, मन खोजता है सहारा।

तब खोलती हूँ धीरे से, बचपन की यादों का पिटारा।

दिखती है फिर से वो छोटी सी, खिलौनों की दुनिया।

वो बिना बात हँसना, रोना और ढेरों शैतानियाँ।

तब मन था सरल, सच्चा और लगता था, सब कुछ अच्छा।

क्या दिन थे, वो जब एक ज़िद पर पूरी होती थी, हर इच्छा।

खेल-खिलौनों, हँसी-मज़ाक़ में बसती थी, हमारी जान।

तब कोमल मन था, दुनिया की भागदौड़ से, एकदम अनजान।

अच्छा होता! अगर हम लौट सकते, अल्हड़ बचपन में।

कह सकते ज़िंदगी से, कि ले चल हमें उस, नादान लड़कपन में।

फिर देखती हूँ, अपने बच्चों को ख़िलौनों से खेलता, हँसता और रोता।

और अहसास होता है की, ये तो है बचपन, फिर से मेरे सामने गिरता और संभलता।

मूल चित्र: Canva

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

An IT professional, mom of two adorable girls and a travel enthusiast. Things I love

और जाने

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

टिप्पणी

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020