कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

सासु-माँ की सीखायी इन दो बातों ने बनायी मेरी ज़िन्दगी आसान

Posted: मई 10, 2020

पतिदेव मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे, मेरी समझदारी पर या मेरी सासू-मां की समझदारी पर, पता नहीं पर मैं मन ही मन अपनी सासू-मां को धन्यवाद दे रही थी।

आज लौकडाउन हुए कुछ हफ्ते बीत चुके थे, पतिदेव ने कहा, “सुनो! मैं ए.टी.एम जा रहा हूं, पैसे बिल्कुल खत्म हो गए हैं।”

पतिदेव ने जैसे ही कहा मैंने कहा, “याद है ना सब ने कहा है घर के बाहर मत जाना, और ए. टी. एम में तो पता नहीं कितने लोग जाते हैं, सब यूज करते हैं, तुम मत जाओ।”

“अच्छा! तो पैसे कहां से आएंगे? अभी तुम घर के राशन के लिए कहोगी तो बिना पैसों के कैसे लाऊंगा?” पतिदेव झल्लाए।

मैंने कहा, “कोई जरूरत नहीं पड़ेगी और अगर जरूरत पड़ी तो मेरे पास है थोड़े पैसे हैं, काम चल जाएगा तब तक।”

“अच्छा जब भी मैं कहता था कि अगर पैसे हैं घर में तो दे दो, बैंक में रख आता हूं, तब तो तुम कहती थी कि तुम्हारे पास कोई पैसे नहीं, अब कहां से आए पैसे तुम्हारे पास?” पतिदेव का अगला सवाल था जिसके लिए मैं बिल्कुल तैयार थी।

“वो क्या है ना, जब हमारी शादी हुई थी तब सासू-मां ने मुझसे कहा था मेरी दो बातें अपने आंचल में बांध कर रखना, एक तो ये की अपने पास हमेशा कुछ पैसे छुपा कर रखना, छुपा कर मतलब मेरे बेटे से भी। वो पैसे सिर्फ तभी निकालना जब कोई मुश्किल घड़ी हो और दूसरी ये किअपने घर में दो बाल्टी पानी हमेशा रखना।”

“तो बस ये दो बातें सासू मां कि मैंने अपने आंचल में बांध रखी थी इसलिए आपसे भी पैसे वाली बात छुपा रखी थी और अगर मैं आपको बता देती तो इस समय आपको ए. टी. एम जाना पड़ता ना, जो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता।”

पतिदेव मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे, मेरी समझदारी पर या मेरी सासू-मां की समझदारी पर, पता नहीं पर मैं मन ही मन अपनी सासू-मां को धन्यवाद दे रही थी। उनकी सिखाई हुई बातें ज़िंदगी के ऐसे मोड़ पर अक्सर काम आ जाती हैं। दोस्तों बड़ों का अपने आस-पास होना किसी बड़े पेड़ के शीतल छांव से कम नहीं होता।

मूल चित्र : Canva

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

A mother, reader and just started as a blogger

और जाने

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

टिप्पणी

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020