कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

मैं घर देर से आऊं तो सब मुझ पर शक क्यों करते हैं?

Posted: अप्रैल 14, 2020

हमारे समाज में कि एक पुरुष घर देर से लौटे तो सबको उसकी फिक्र होती है और अगर एक कामकाजी महिला किसी कारण से घर देर से लौटे तो उस पर शक किया जाता है?

“विकास कहां हो? कितनी देर में घर आ रहे हो? तुम फोन क्यों नहीं उठा रहे थे? पता है कितनी फिक्र हो रही थी मुझे?” नैना ने अपने पति विकास को फोन पर कहा।

अभी 6 महीने पहले ही उन दोनों की शादी हुई थी। नैना भी विकास के ऑफिस में ही काम करती थी, लेकिन पिछले 6 महीनो से घर पर ही थी। विकास वैसे तो 8 बजे तक घर आ जाता था लेकिन आज 10 बज गये थे और वह फोन भी नहीं उठा रहा था। जैसे जैसे घड़ी की सुईयां दौड़ रही थीं, वैसे वैसे नैना की चिंता भी बढ़ रही थी। वह सोच रही थी कि विकास कभी ऐसा नहीं करते कि मेरा फोन न उठाये पता नहीं आज क्या हुआ है? बहुत देर तक कोशिश करने के बाद विकास से बात हुई तो उसने बताया कि अभी ऑफिस से निकला है 11 बजे तक आ जायेगा बहुत ही इम्पोर्टेन्ट मीटिंग में बॉस के साथ था। अचानक से बॉस ने आकर बताया फोन करने का टाइम ही नहीं मिला था। सच में कोई अपना अगर घर आने में लेट हो जाए तो कितनी फिक्र हो जाती है।

अगले दिन नैना ने विकास से कहा, “विकास अब बहुत ज्यादा टाइम हो गया मुझे नौकरी छोडे़। एक दो दिन में मैं जॉइन कर रही हूँ, तुम प्लीज़ मम्मी-पापा जी से कह दो। तुम ने तो शादी के 5 दिन बाद से ही ऑफिस जाना शुरु कर दिया था और मुझे 6 महीने हो गये, अब तक घर में हूँ। अब इससे ज्यादा इन्तज़ार नहीं कर सकती मैं। प्लीज तुम सम्भाल लेना।”

“ठीक है जानेमन बात कर लूँगा मैं मम्मी-पापा से, तुम जॉइन कर लो और चेहरे से ये उदासी हटाकर मुस्करा दो”, विकास ने कहा।

“थैंक्यू विकास थैंक्यू वैरी मच माई, लव यू! आर सो स्वीट”, विकास के गले लगते हुये नैना ने कहा। दो दिन बाद ही नैना ने ऑफिस जॉइन कर लिया, लेकिन उसे उसी शहर में दूसरी ब्रांच में जॉइनिंग मिली। नैना बहुत खुश थी।

विकास और नैना अच्छा कमाते थे। सास ससुर भी बहुत सपोर्टिव थे, एकदम परफैक्ट थी उनकी लाइफ। सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन कुछ दिनों बाद नैना ने विकास के व्यवहार में बदलाव देखा। जब भी नैना ऑफिस से आने में लेट हो जाती, वो अजीब तरीके से पेश आता। नैना को महसूस होता कि विकास उस पर शक करने लगा है, उसे ये सोचकर बहुत दुःख होता। वो तो ये चाहती थी कि जैसे वो परेशान हो जाती थी विकास के घर देर से आने पर, उसकी फिक्र होती थी, वैसी ही फिक्र वह विकास के चेहरे पर भी देखे। लेकिन विकास की नजरें तो उसे शक की नजर से देखती थीं। नैना सब समझती थी, लेकिन कुछ कहती नहीं थी क्योंकि वह विकास से बहुत प्यार करती थी और उस रिश्ते को जीवनभर निभाना भी चाहती थी।

एक दिन नैना के फोन की बैटरी खत्म हो गई और रास्ते में कोई एक्सीडेंट होने की वजह से बहुत ज्यादा ट्रैफिक था। ऑफिस से तो वह टाइम से निकली लेकिन घर पहुँची तो 9 बज गये। 7 बजे तक घर आ जाने वाली नैना  आज 9 बजे घर पहुँची तो कारण पूछने की बजाय विकास ने अपने मम्मी-पापा के सामने ही चिल्लाना शुरू कर दिया और  नैना के साथ काम करने वाले रोनित का नाम लेकर उस पर दोषारोपण शुरू कर दिया।

नैना विकास के ऐसे बर्ताव को देखकर चुप नहीं रही और बोल पड़ी, “रोनित मेरा सिर्फ दोस्त है विकास, ये तुम भी अच्छे से जानते हो। तुम भी तो अपने साथ काम करने वाली लड़कियों से बातें करते हो। लेकिन मैंने कभी तुम पर शक नहीं किया? जब भी तुम घर देर से आये मुझे फिक्र हुई तुम्हारी और तुम मेरी परवाह करने की बजाय, मुझसे कारण पूछने की बजाय सबके सामने मेरा तमाशा बना रहे हो? रोनित तुम्हारा भी दोस्त है विकास, तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो? यही रिश्ता है हमारा? इतना ही विश्वास है तुम्हें मुझ पर? तुम्हारे लिए मैं फिक्र करूं और तुम मुझ पर शक, ऐसा रिश्ता नहीं निभाना मुझे”, इतना कहकर नैना आँखों में आँसू लिए अपने कमरे में चली गई।

विकास नजरें झुकाये खड़ा था क्योंकि उसके पास नैना की किसी भी बात का जबाब नहीं था। विकास के मम्मी पापा ने भी नैना को सही बताया और विकास की सोच को गलत। उसे घृणा हो रही थी अपनी सोच पर। विकास ने अपनी गलती मानकर नैना से माफी मांग ली और अपने प्यारे से रिश्ते को टूटने से बचा लिया।

दोस्तों, सच में ऐसा क्यों होता है हमारे समाज में कि एक पुरुष घर देर से लौटे तो सबको उसकी फिक्र होती है और अगर एक कामकाजी महिला किसी कारण से घर देर से लौटे तो उस पर शक किया जाता है? नाकि उसकी फिक्र? हमें अपनी सोच को बदलना होगा और घर देर से लौटने की बात को एक महिला के चरित्र से जोड़ना बन्द करना होगा। आधुनिक समय में महिलायें हर फील्ड में पुरुषों से कन्धे से कन्धा मिलाकर चल रही हैं। उन्हें भी आपकी परवाह आपकी फिक्र की आवश्यकता है, वही परवाह और फिक्र जो पुरुषों को शुरू से ही मिलती आई है।

मूल चित्र : Pexels

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

टिप्पणी

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020