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भोजपुरी गायकों ने अपने गानों में अब कोरोना को भी नहीं छोड़ा, क्या ये मनोरंजन है?

जहाँ एक तरफ कोरोना वायरस का प्रकोप और गंभीरता बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी और इसको 'ट्रेंड' कह भोजपुरी गायक सेक्सिस्ट और रेसिस्ट गाने बना रहे थे। 

जहाँ एक तरफ कोरोना वायरस का प्रकोप और गंभीरता बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी और इसको ‘ट्रेंड’ कह भोजपुरी गायक सेक्सिस्ट और रेसिस्ट गाने बना रहे थे। 

अभी अगर पूरी दुनिया मेँ किसी बीमारी  का प्रकोप बहुत ज़्यादा है, तो वो कोरोना वायरस है। पूरा विश्व इस से जूझ रहा है। इस वायरस की वजह से कई देश हाई-अलर्ट पर हैं और तकरीबन पुरे विश्व में 4000 से ज़्यादा लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गवा चुके हैं। भारत में अभी COVID-19 के कुल 76 कनफर्म्ड केस हैं। पूरे विश्व के लिए अभी यह एक बहुत ही संजीदा तथा महत्वपूर्ण मुद्दा है। हर कोई कोरोना वायरस के बारे में सावधानी, सतर्कता तथा अवेयरनेस फैलाने की कोशिश कर रहा है। 

परन्तु दुःख की बात यह है कि हमारी भोजपुरी इंडस्ट्री इसे एक ट्रेंड की तरह देख रही है। इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि औरतों को मेल-गेज़ के नज़रिये से भोजपुरी इंडस्ट्री में दिखाया जाता हैं। उन्हें मर्दों को लुभाने वाली दिखाया है, उन्हें कम तथा लोभी कपड़े पहनाए जाते हैं, अश्लील तरीके से नाचने को कहा जाता है। इतना ही नहीं, इन गानों के बोल भी काफी आपत्तिजनक होते हैं। ‘गोरी सामान तोहार फट जाएगा’, ‘होली में इज़्ज़त नहीं बचत हो’ इत्यादि इसके उदहारण हैं। अब कोरोना वायरस के ऊपर जो गाने बन रहे हैं, वो सिर्फ सेक्सिस्ट ही नहीं बल्कि रेसिस्ट तथा गलत सूचना फैलाने वाले भी हैं। 

क्या कहते हैं ये गाने?

अभी तक कोरोना  वायरस के ऊपर जितने भी भोजपुरी गाने बने हैं,  उनमें से कई गाने काफी वायरल हो चुके हैं। खुशबू उत्तम और प्रवीण उत्तम का गाना ‘हेलो कौन कोरोना वायरस’ इतना फेमस हो चुका है कि उसकी वीडियो पर 1 लाख के आसपास व्यूज़ हैं। इस गाने में चीन के प्रति रेसिस्म को बढ़ावा दिया गया है और लाइन्स जिनका ट्रांसलेशन ये है कि ‘बाकि सारे चीन के माल जैसा ये वायरस भी ज़्यादा दिन नहीं टिकेगा’ के ज़रिये कोरोना वायरस जैसी गंभीर बीमारी को बहुत हलके मे आंकने की तथा उसका मज़ाक बनाने की कोशिश की गई है। ऐसे ही कई और गाने है जैसे ‘चाइना की पिचकारी में कोरोना वायरस बा’, ‘कोरोना वायरस से माई बचाई’, ‘मोदी जी बचाई फेलाल कोरोना वायरस बा’।

ऐसे गानों की वजह से कोरोना वायरस को हेल्थ रिस्क की तरह लेने की जो ज़रुरत है, वह कम हो जाती है। और साथ ही में ये गाने कोरोना के इलाज़ या उपचार के बारे में गलत संदेश भी दे रहे हैं। अभी वह समय है जब कोरोना बहुत गंभीर समस्या बन चुका है और लोग इलाज़ के नाम पे किसी भी टोटके पर विश्वास करने को तैयार हैं। तो ऐसे समय पर ये कहना कि ‘कोरोना चीनी समान की तरह लंबा नहीं टिकेगा’,  चीनी समान में भी कोरोना वायरस है, या फिर सही प्रीकॉशन्स देने के बजाय ये कहना कि ‘माता जी’ या ‘मोदी जी’ कोरोना से निजात दिलाएंगे, सरासर इस बीमारी की गंभीरता को कम करता हैं और इसे एंटरटेनमेंट नहीं कह सकते।

इसके अलाव यह गाने काफ़ी सेक्सिस्ट भी हैं। एक और गाना जिसपे यूट्यूब पर तकरीबन 3 मिलियन व्यूज़ हैं, लहँगे में कोरोना वायरस होने की बात करता हैं। गुड्डू  रंगीला का गाना ‘लेहंगा में कोरोना घुसल बा’ ना ही सिर्फ अजीब हैं बल्कि उसके बोल भी काफी आपतिजनक हैं। ऐसा ही एक और गाना हैं जिसे देवरिया के भोजपुरी गायक गोविंद बार्बर ने हाल ही में गाया है इसका नाम हैँ ‘कोरोना लहंगा में’। इस गाने को कमलेश बेदर्दी ने लिखा है। एक इंटरव्यु में कमलेश कहते हैं कि हर कोई कोरोना की बात कर रहा है इसलिए उन्होंने इस पर यह गाना लिखा है। उनका कहना है कि यह गाना छोटे कपड़े पहनने वाली महिलाओं को चेतावनी देता है और संस्कार को बढ़ावा देता है। अब भला कोरोना का कपड़ों और संस्कारों से क्या संबंध?

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गंभीरता को समझना है ज़रूरी

इन सारें गानों की खास बात यह है कि इन गानों के बोल कोरोना से बचने के घरेलू उपाय से लेकर सेक्सिस्ट और रेसिस्ट कमेंट्स की भरमार है। और ग़ौर करने वाली बात यह हैं कि ये सारे गाने दर्शकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं। यह बात चिंताजनक हैं।

हमे यह समझने की ज़रूरत हैं कि कोरोना एक गंभीर समस्या है और इतने गंभीर विषय को हल्के ढंग से पेश करना बुरा लगता है। हमें यह समझना बहुत ज़रूरी है कि कोरोना से बचने का तरीका सावधानी तथा सतर्कता है। पूजा करने से, मोदी जी को बोलने से कोरोना का इलाज नहीं हो सकता। ये भी समझना ज़रूरी हैं कि कोरोना का संबंध कपड़ो से या संस्कारों से नहीं हैं और एक ऐसी बीमारी जिसकी वजह से लोगों की जानें जा रही हैं, डर का माहौल बना हुआ है, उसका मजाक उड़ाना, सेक्सिस्ट और रेसिस्ट कमेंट्स से भरे गाने बनाना और उसे एंटरटेनमेंट बोलना, सही नहीं है।

मूल चित्र : यूट्यूब 

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Nishtha Pandey

I read, I write, I dream and search for the silver lining in my life. Being a student of mass communication with literature and political read more...

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