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मेरे मायके जाने पर पतिदेवजी बड़े खुश हुए थे, लेकिन फ़िर…

Posted: February 4, 2020

“क्या हुआ? आज आ गई मेरी याद आपको? इतने दिन बाद? और कैसे चल रही आप दोस्तों की पार्टीज, बहुत मज़े कर रहे हो हमारे बिना….”

शनिवार का दिन है… पतिदेव आराम से लेट कर टीवी पर गाने सुन रहे है। तभी गाना आया “मेरी बीवी मायके चली गई”। अब तो इनमें जोश आ गया। अपने सुर ताल की कमान संभाले बिना ही जोर से गाने लगे।

इनको इतना खुश देख मुझे भी हंसी आने लगी। मौक़ा देख मैंने भी चौका लगा ही दिया और पूछ ही लिया।

“अरे सुनो जी… पिया के स्कूल की छुट्टियां हो गई है तो मै कुछ दिनों के लिये मायके चली जाऊं? सब से मिले हुए भी कितना समय ही गया है…”

आकाश मुस्कुराते हुए बोला, “अरे वाह! क्या बात है, आज तो तुमने मेरे मन की बात बोल दी। मै भी तुमसे पूछने ही वाला था कि पिया की winter vacations है, तो यदि तुम अपने मायके जाना चाहो तो जा सकती हो। इस तरह मुझे भी कुछ समय अपने लिए मिल जाएगा।”

“तुम्हारे जाने से मुझे कुछ आजादी मिलेगी, थोड़े दिन घर को भी सकून मिलेगा…बेचारा कितना साफ रहता है कुछ दिन मेरे साथ यह भी गंदा रह लेगा। और मै भी थोड़ी ऐश कर लूंगा,अपने दोस्तों के साथ पार्टी करूंगा, थोड़ा चैन और सकून मिल जाएगा…  पूरे बिस्तर पर मेरा अधिकार होगा… तुम मां बेटी तो मुझे सिर्फ एक कोना ही देते हो! कुछ दिन मै भी पूरे बेड का आनंद उठा लूंगा। हूं….”

“बिल्कुल सही बात है!” मैंने हां में अपना सिर हिलाया और कहा, “आप मेरे जाने का सुनकर बहुत खुश है…  तो आप हमारा टिकट करवा दो, हम दोनों मां बेटी कल ही चले जाएंगे और जयपुर की हवा हमें बुला भी रही है।

अगले दिन सुबह हम ट्रेन से चले गए कुछ दिन बाद मेरे इनका फोन आया आवाज़ से कुछ बीमार से लगे।

“मीरा ओ मीरा, कैसी हो तुम? और यार तुम पीली दाल कैसे बनाती हो?”

“क्या हुआ? आज आ गई मेरी याद आपको? इतने दिन बाद? और कैसे चल रही आप दोस्तों की पार्टीज, बहुत मज़े कर रहे हो हमारे बिना….”

“अरे तुम भी ना यार क्यूं जले पर नमक छिड़क रही हो?”

“क्या हुआ? मैंने ऐसा क्या कह दिया… आप ही तो बोल रहे थे… मैंने तो आपसे पूछा है।”

“क्या बताऊं… तुम्हारे जाने के दो दिन तक तो हमने खूब पार्टी की, movies भी देखी एक रात हम सब दोस्त मिलकर ओपन रेस्टोरेंट गए थे, और वहां का खाना खाने से मेरे पेट में दर्द होने लगा और आज तक खिचड़ी ही खा रहा हूं! आज सोचा की पीली दाल बना लू तो तुम्हे फोन किया…।”

मुझे भी इनकी हालत पर गुस्सा भी आ रहा था, तो मन ही मन बहुत हंसी भी आ रही थी… अपने emotions को रोकते हुए मैंने इनको दाल बनाना बता दिया और कहा अच्छे से डॉक्टर को दिखा कर दवाई ले लो।

“तुम बताओ कब तक वापिस आ रही हो?” पतिदेव ने बड़े प्यार से पूछा

अभी तो आए सिर्फ 5 दिन ही हुए है… मै तो 15 दिन के लिए आई थी। आपकी तबियत ठीक नहीं है तो हम 2-3 दिन में आ जाएंगे” इतना सुनते ही पतिदेव ने गुस्से में फोन रख दिया।

अब मै सोच रही हूं कि मेरे जाने से तो इतना खुश थे… की जैसे मै कोई इनके जी का जंजाल हूं, इन्हे बेड़ियों में बांध के रखती हूं लेकिन जब खुद पर मुसीबत आई तब मेरे बिना इनका गुजारा भी नहीं होता।

सच में ये पति ऐसे ही होते है… कभी तो मायके का नाम सुनते ही भड़क जाते है, और कभी कभी अपने मन में लडडू फोड़ते है। कभी बोलेंगे क्या जरूरत है हर महीने जाने की, वो भी आ सकते है मिलने, और कभी कोई बहाना बना देंगे कि मुझे ऑफिस का काम है, मीटिंग है… और तो और इनका रामबाण तुम्हारे बिना मन ही नहीं लगता… 

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