कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

तुम्हीं बता दो ना, कहां हूँ मैं?

Posted: फ़रवरी 25, 2020

अपने ही घर में पहचान ढूंढती, प्यार के दो शब्द को तरसती, पल भर गले लगा कर सारी थकान भूलने वाली मशीन उर्फ ‘औरत’ पूछती है तुमसे, कहाँ हूँ मैं?

ताल मेल के इस तराज़ू में
मेरा पलड़ा भारी देखती हूँ
तो लगता है,
साथ निभाने के उन वचनों में कहां हूँ मैं?

लोगों के साथ तुम्हें हंसता देख
मेरे वक़्त की शिकायत करते
पूछती हूँ तुमसे,
मेरे वक़्त में कहां हूँ मैं?

बैठे होते हो तुम,
टकटकी लगाए पैर पसारे,
तकिये के उस छोटी जगह से पूछती,
कहां हूँ मैं?

खिलखिलाता मुस्कराता हमारा अंश
और तुम्हारी उंगली,
तुम्हारे आगोश की राह देखती,
कहां हूँ मैं?

घरवालों से तुम्हारी इतनी बातों में से,
उस खिलखिलाहट में, कहां हूँ मैं?

सूरज की किरणों से पहले बिस्तर समेट उठ जाती
स्वाद की थाली में प्यार परोस जाती
भरे पेट जब यूँ ही मुझे भूल जाते तुम
उस निवाले में ढूंढ़ती, कहां हूँ मैं?

घर अपना पीछे छोड़
तुम्हारा नीड़ सजाती
राह तकती, प्यार खोजती
लापता, इस पते पर कहां हूँ मैं?

सपने अपने पोटली में समेट
पंख तुम्हारे खोलती
ख़्वाहिशों को चुपके से दरकिनारे
ज़िद तुम्हारी मानती
वो तुम्हारे सपनों में, कहां हूँ मैं?

बच्चा मेरा मन, मुझसे शिकायत करता
कभी उछाल लूँ ज़िम्मेदारी का बस्ता मैं भी
छपाक कर पानी से निकल जाऊं बेतरतीबी से
वो तुम्हारी ठिठोलियों में, कहाँ हूँ मैं?

तुम्हारे रिश्तों को जिए जाती
तुम्हारे मान का बोझ उठाये जाती
यूँ बंधी सी अनदेखी जंज़ीर से
बस पल में ज़िन्दगी बिताये जाती
तुम्हारे पलों में, कहां हूं मैं?

पूछती हर दम खुद से
झंझोड़ती अपना ज़मीर ये बेख्याली और ये सवाल
क्या मैं हूँ तुम्हारी कामयाबियों में?
क्या मैं हूँ तुम्हारे संसार में?
क्या मैं हूं तुम्हारे जज़्बात में?
क्या मैं हूँ तुम्हारे ख्यालात में?

दिन रात बरबस एक उम्मीद में जिये जाती हूँ कि शायद कहीं तो हूं मैं!

-अपने ही घर में पहचान ढूंढती, प्यार के दो शब्द को तरसती, पल भर गले लगा कर सारी थकान भूलने वाली मशीन उर्फ ‘औरत’

मूल चित्र : Canva 

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

Now a days ..Vihaan's Mum...Wanderer at heart,extremely unstable in thoughts,readholic; which

और जाने

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

टिप्पणी

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020