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पुरुषों की सोच को सशक्तिकरण की आवश्यकता है, महिलाओं को नहीं

मेरा मानना है कि महिलाओं को अगर प्रेरित किया जाए तो अवश्य एक सकारात्मक बदलाव आएगा, समाज में क्रांति का श्रेय महिलाओं की भूमिका पर निर्भर करता है। 

पुरूष प्रधान देश में महिलाओं के पक्ष में कुछ कानून हैं जो सिर्फ काग़ज़ों तक सीमित हैं, जिनका उपयोग ना के बराबर रहा। कई महिलाएं अक्सर अपने आप को स्टेबल करने के लिए किसी का भी सहारा नहीं लेती, और कुछ सालों में कठोर मेहनत के बाद उभर कर आती हैं।

हम समाजिक प्राणी हैं और हमारा कर्तव्य है के हम अपने साथी की मदद करें उनका मनोबल बढाएं और रूढ़िवादी परंपरा को सकरात्मक तरीके से बदलाव की और अग्रसर करें। हमारे देश में कई ऐसी संस्था हैं जो महिलाओं के विकास के लिए कार्य करती हैं, जिनमे से एक हैं वीमेन इनोवेशन एंटरप्रेन्योरशिप फाउंडेशन(WIEF) जिसके द्वारा 17 जनवरी 2020 को आयोजित हुआ NATIONAL SUMMIT ON WOMEN AND EDUCATION EMPOWERMENT 2020

इस संस्था को चलाने वाली और इसकी संस्थापक हैं श्रीमती डॉ. श्वेता सिंह। ये अपने आप में ही एक सफल सम्पूर्ण सकरात्मकता की छवि हैं, करोड़ों महिलाओं की सफलता की मिसाल हैं। श्वेता उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर जौनपुर से हैं, जो महिलाओं की सफलता के पक्ष में नहीं रहा।

मैं अचंभित भी हूँ और खुश भी के हमारे भारत में ऐसी महिलाएं भी हैं जो समाज को बदलने की क्षमता रखती हैं।मैं व्यक्तिगत तौर पर श्रीमती श्वेता जी का आभारी हूँ के उन्होंने शिक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शिखर सम्मेलन का आयोजन किया। सम्पूर्ण भारत से कामयाब महिलाओं को बुलाया और कामयाबी के नुस्खों से ओत प्रोत करवाया।

यह शिखर सम्मेलन तीसरा सम्मेलन हुआ। इसकी सफलता के लिए महिलाओं का अधिक योगदान रहा। श्रीमती श्वेता का सबसे महत्वपूर्ण विषय यह रहा कि वह महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत करना चाहती हैं, और बताती हैं के अगर आपके पास पैसा है तो आप के अंदर खुद ब खुद आत्मविश्वाश आएगा और आप सफलता की ओर अग्रसर होंगी।

WIEF का लक्ष्य है के भारत की 260 डिस्ट्रिक्ट और 10.5 लाख महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत करे।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संस्था गरीब और पिछड़े हुए राज्य के लिए कार्य करने के लिए उत्सुक है, जो एक बहुत प्रभावशाली पहल है। टियर 3 और टियर 4 के राज्यों के लिए कार्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मेरी व्यक्तिगत तौर पर आपके साथ शुभकामनाएं हैं और आपकी मेहनत से और महिलाएं भी मिसाल बनेंगी।

शिखर सम्मेलन वार्ता में अनके सफल महिलाओं ने भाग लिया,जो वास्तव में सफल हुईं और अभी सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ रहीं हैं। इस सम्मेलन में महत्वपूर्ण चेहरा रहीं दो महत्वपूर्ण महिला जो महिलाओं के विकास के आयाम को बहुत सकरात्मकता और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ा रहीं हैं।

इनमे से सबसे पहले मैं श्रीमती अपर्णा वेदपुरी सिंह जोवीमेन्स वेब की संस्थापक भी हैं और एक प्रभावशाली व्यवसायी के रूप में पिछले सोलह साल से सक्रिय हैं। जिन्हें समाज में बदलाव लाने के लिए जाना जाता है, श्रीमती अपर्णा एक प्रभवशाली वक्ता हैं साथ ही साथ महिलाओं के विकास के लिए उनकी भवनाएं और उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य अत्यंत सराहनीय हैं।उनकी आवाज़ हमारे देश जी ज़रूरत है। उनकी संस्थाविमेंस वेब की शुरुआत 2010 में एक महिला के दृढ़ निश्चय के साथ हुई थी।

पिछले एक दशक से यह संस्था महिलाओं को वास्तविक कहानियों को साझा करने में सक्षम बनाती है और उनके द्वारा व्यतीत समस्या से भारत के लोगों तक पहुँचाने का कार्य करती है, चाहे वह बुद्धिजीवी वर्ग हो या ग्रामीण लोग। भारत में यह महिलाओं के लिए एक आवश्यक एवं महत्वपूर्ण संसाधन है। तकनीकी युग में महिलाओं को अपनी बात रखने का एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म मिला है। जो आज के समाज के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। ऑनलाइन की दुनिया मेंविमेंस वेब की पहल सराहनीय है।

शिखर सम्मेलन में उनके द्वारा दिया गया योगदान आज के समाज के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं के साथ साथ समाज को भी संबोधित किया, जो प्रभवशाली रहा। श्रीमती श्वेता द्वारा पूछा गया सवाल – वह समाज में महिलाओं की भूमिका को किस प्रकार देखती हैं?

श्रीमती अपर्णा ने बहुत ही सुंदरता और सटीक उत्तर से सभी दर्शकों को प्रभावित किया, “पिछले कई सालों से महिलाओं की स्तिथि में ठोस बदलाव लाने की आवश्यकता है। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या अपने विवाह करने का अधिकार, महिलाओं को आश्रित होना पड़ता है। चाहे वह खुद उनका परिवार हो या समाज, वह अपने लिए खुद कोई भी निर्णय लेने में असमर्थ होती हैं। मैं इस क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए आगे आईं हूँ और मुझे आशा है यह बदलाव आएगा। महिलाओं को अब स्वायत्त होने की ज़रुरत है। महिलाओं के अंदर वह शक्ति है, जिससे पूरा समाज बदल सकता है। इस बदलाव को महिलाएं को ला सकती हैं।”

व्यक्तिगत तौर पर मैं पूर्णता श्रीमती अपर्णा जी से सहमत हूँ। महिलाओं को अगर प्रेरित किया जाएगा तो अवश्य बदलाव आएगा, समाज में क्रांति का श्रेय महिलाओं की भूमिका पर निर्भर करता है। हम सब आभारी हैं ऐसी सफल महिलाओं के जिनसे प्रेरित होकर ना जाने कितनी महिलाओं का हौसला बुलंद होता है। यह संदेश अगर 5 महिलाओं तक भी पहुंचा तो कहीं न कहीं उनमें आगे बढ़ने की ललक आवश्यक पैदा होगी।

वहीं दूसरी ओर उत्तराखण्ड की आरुषि पोखरियाल (निशांक) इन्होंने कम आयु में ही सफलतापूर्वक हर कार्य को अंजाम दिया। आरुषि फ़िल्म प्रोड्यूसर के साथ साथ कवयित्री भी हैं और प्राकृतिक पर्यावरण के बचाव के लिए आगे आई हैं। इन्होंने एक सफल अभियान चलाया जो ‘स्पर्श गंगा’ के नाम से विख्यात है। इस अभियान की संस्थापक आरुषि, खुद को एक सम्पूर्ण और सफल महिला के रूप में व्यखित करती हैं। आरुषि का कहना है ‘महिलाओं को सशक्त होने की ज़रूरत नहीं, वे खुद में सशक्त हैं।’

एक मशहूर कहावत, “हर कामयाब पुरुष के पीछे किसी न किसी महिला का हाथ होता है।” यह तथ्य अपने आप में सब कुछ बयान कर देता है। अब बात आती है जो व्यक्ति किसी व्यक्ति की सफलता के पीछे हो, उसको कोई कैसे रोक सकता है। वो खुद एक असीम ऊर्जा का स्त्रोत है। सशक्त करने की ज़रूरत है तो वह है सोच, खासकर पुरूष की सोच। पितृसत्ता समाज में आज जिसको बदलने की सबसे अधिक आवश्यकता है वह है उनकी रूढ़िवादी सोच।

आरूषि आगे बताती हैं के सबसे पहले प्राकृतिक के लिए लड़ने वाली महिला थीं श्रीमती गौरा देवी। चिपको आन्दोलन की एक मुख्य बात थी कि इसमें महिलाओं ने भारी संख्या में भाग लिया था। चिपको आंदोलन वनों का अव्यावहारिक कटान रोकने और वनों पर आश्रित लोगों के वनाधिकारों की रक्षा का आंदोलन था। रेणी में 2400 से अधिक पेड़ों को काटा जाना था, इसलिए इस पर वन विभाग और ठेकेदार जान लड़ाने को तैयार बैठे थे। गौरा देवी जी के नेतृत्व में रेणी गांव की 27 महिलाओं ने प्राणों की बाजी लगाकर इस प्रयास को असफल कर दिया था। यह कार्य महिला द्वारा ही किया गया।

उपरोक्त विवरण द्वारा एक छोटा सी पहल है, महिलाओं को बताने की के वे सशक्त हैं, उनके अंदर वह शक्ति है जो ब्रह्मांड की रचना करती है। बिना महिलाओं के प्राकृतिक ने कुछ भी नहीं बनाया। बाकि सबको अपनी सोच को सशक्त करने की ज़रूरत है। महिला तो अपने आप में एक सशक्त चरित्र हैं।

मूल चित्र : Google Images

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