इस बार मकर संक्रांति जाते-जाते मेरी कुछ यादें ताज़ा कर गयी…

Posted: January 16, 2020

वह दिन मैं आज भी नहीं भूलती…किस तरह से इस दिन भगवान ने मेरी सूनी गोद में एक सुंदर सी परी को दिया था और मुझे माँ बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। 

आप सब जानते हैं कि मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। जनवरी (पौष) मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है। तभी इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। माना जाता है कि इस दिन के बाद से ही गर्मी शुरू हो जाती है दिन बड़े और रात छोटी होने लगती है।

ऐसी मान्यता भी है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है।

महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति के दिन का ही चयन किया था।मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।

मकर सक्रांति का दिन मेरे लिए बहुत खुशी का दिन भी है। इस पवित्र दिन मेरे घर में एक नन्हीं सी परी यानी मेरी बेटी का जन्म हुआ था। वह दिन मैं आज भी नहीं भूलती। किस तरह से इस दिन भगवान ने मेरी सूनी गोद में एक सुंदर सी परी को दिया था और मुझे माँ बनने का गौरव प्राप्त हुआ था।

इस दिन मेरे परिवार में मेरी माँ सुबह जल्दी उठा कर नहा धोकर एक थाली चावल और काले उड़द और रेवड़ी, मूंगफली, नमक और हल्दी सब सामान हमारे रीति-रिवाजों के अनुसार कच्चा निकालती है और सूर्यदेव कि पूजा करती है। उन्हें अर्ध्य दिया जाता है और मेरे पापा सबसे पहले उस निकाले सभी सामान को हाथ में पानी लेकर 4 बार थाली के चारों तरफ पानी को वारते हैं। उसके बाद घर का हर सदस्य बारी-बारी से पानी थाली के ऊपर वारता है फिर उस सभी चीजों को दान कर दिया जाता है।

ऐसा ही मेरे ससुराल में भी किया जाता है। और मेरी मम्मी और मेरी सास इस दिन कम्बल, श्रृंगार का सामान, खाने-पीने की चीजें, या किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन एवं संकल्प कर चौदह ब्राह्मणों या बहु-बेटियों को दान देती हैं।

इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। जैसा कि निम्न श्लोक से स्पष्ठ होता है-

माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम। स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥

अब तो हमारे लिए दोहरी ख़ुशी का दिन है मकर सक्रांति। सूर्यदेव की उपासना के साथ हम अपनी बेटी का जन्म दिन भी खुशी-खुशी मनाते हैं। इस बार हमने सोचा है कि इस दिन हम सब गंगा स्नान के साथ अपने दिन की शुरुआत करेंगे और वही तिल के मिष्ठान, खिचड़ी, कम्बल आदि को ब्राह्मणों और गरीबों को दान में देंगे और अपनी बेटी के उज्जवल भविष्य की कामना करेंगे। भगवान उसके जीवन को हमेशा खुशियाें से भरा रखे। इसी आशा के साथ…आशा करती हूँ कि आप सब की मकर संक्रांति शुभ रही!

मूल चित्र : Canva

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