बड़ों की छाया में छोटों का परम्पराओं से जुड़े रहना बखूबी दिखाता है सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’

अरेंज मैरिज में किस प्रकार दो अनजान व्यक्ति एक दूसरे के करीब आते हैं, एक दूसरे को जानते समझते हैं, इसका चित्रण धारावाहिक में बहुत खूबसूरती से किया गया है।

12 जनवरी, 2009 को शुरू हुए स्टार प्लस के धारावाहिक, ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ को 11 साल से भी ज़्यादा हो गए हैं, लंबी श्रृंखला वाले धारावाहिकों में से एक है ये धारावाहिक।

अरेंज मैरिज में किस प्रकार दो अनजान व्यक्ति एक दूसरे के करीब आते हैं, एक दूसरे को जानते समझते हैं, इसका चित्रण धारावाहिक में बहुत खूबसूरती से किया गया है। भारतीय समाज की मान्यता है कि शादी सिर्फ दो व्यक्तियों नहीं बल्कि दो परिवारों के बीच का जीवनभर का रिश्ता है। यह इस धारावाहिक में बखूबी दिखाया गया है।

परिवार में बड़ों का मान कैसे किया जाता है, बड़ों के निर्देश में नई पीढ़ी कैसे परम्पराओं से जुड़ी रहती है, यह बहुत ही सुंदरता से इस सीरियल में दिखाया गया है। परिवार की बहू को बड़ों का सम्मान करते हुए नए परिवार में अपनी जगह कैसे बनानी होती है, बड़ों का अपमान किए बिना अपनी बात कैसे रखनी है, अपना और अपने मायके का मान ससुराल में कैसे बनाए रखना है, अक्षरा, जो इस धारावाहिक का एक मुख्या किरदार है, ने यह बहुत अच्छे से सिखाया है। वहीं नैतिक, जो अक्षरा के पति की हैं, ने भी हर कदम पर अक्षरा का साथ दिया।

दो अनजान व्यक्ति कैसे एक दूसरे के हो जाते हैं इसका उदाहरण इस धारावाहिक में आसानी से देखा जा सकता है। ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ से दर्शक वर्ग खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता है। ये उन्हें अपनी रोज़मर्रा की कहानी लगती है। अन्य धारावाहिकों के विपरीत इस धारावाहिक में परिस्थितियां मुश्किलें पैदा करती हैं जैसा कि हमारे आम जीवन में भी होता है। इन मुश्किलों से बहुत ही समझदारी से निपटते हैं इस धारावाहिक के किरदार। रिश्तों में कोई एक झुक कर स्थिति संभाल ले तो भी कोई बुराई नहीं है, यह इसमें बहुत ही अच्छे तरीक़े से दिखाया गया है।

अक्षरा और नैतिक के बाद अब यह धारावाहिक उनकी बेटी नायरा के शादीशुदा जीवन पर केंद्रित हो गया है।जिस समझदारी से अक्षरा और नैतिक ने रिश्ते को संभाला है, उसके विपरीत कार्तिक और नायरा के बीच अहम बहुत जल्दी आ जाता है। जहां अक्षरा और नैतिक परिवार के हित को ध्यान में रखकर फैंसले लेते थे वहीं कार्तिक और नायरा पहले अपना अहम देखते हैं, जैसे कि युवा अक्सर करते हैं।

धारावाहिक में अब वास्तविकता से ज़्यादा नाटकीयता होने लगी है। अभी कुछ दिन पहले के एपिसोड में कार्तिक का नायरा पर इल्ज़ाम लगाना और नायरा का घर छोड़ना फिर भी सही था, लेकिन एक बच्चे को अपने परिवार से दूर रखना सही नहीं था। नक्ष ने बिल्कुल सही कहा, ‘तुम हमारे पास आ सकती थीं नायरा।’

मेरे हिसाब से बच्चे की बीमारी में भी परिवार वालों को कुछ न बताना और अकेले सब सम्भालना अति नाटकीयता को ही दर्शाता है। शायद कार्तिक और पूरे परिवार का गुस्सा अपनी जगह बिल्कुल सही है।

आशा करती हूँ कि आगे भी ये धरावाहिक कुछ ना कुछ ठीक मोड़ ही लेगा।

मूल चित्र : IMDb

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