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दुर्गा माँ कहीं वापस नहीं जातीं, वे समा जाती हैं हम में!

Posted: नवम्बर 4, 2019

मुझे गर्व है कि तुम्हें अपने, अपनी बहन व अपनी सहेली के सम्मान को बचाने के लिए किसी पुरुष के कन्धों की कोई आवश्यकता नहीं है।

दुर्गा जी के विसर्जन के दिन करीबन रात के 8 बजे के वक्त तनु अपनी बड़ी बहन के साथ मंडला जा रही थी।पड़ोस मे रहने वाली सहेली और उनके बड़े भाई भी साथ जा रहे थे। दुर्गा मां की बड़ी-बड़ी प्रतिमा के साथ कई जुलूस निकल रहे थे। उन सबको इस जुलूस को पार करके उस तरफ जाना था, क्योंकि बस स्टैंड सड़क के उस पार था। वे सब धीरे-धीरे जुलूस के बीच में से निकल रहे थे। बहुत सारे लड़के गुलाल से सने, तेज़ ध्वनी में बजते हुए नगाड़े के साथ झूम रहे थे।

तनु को अजीब सी बेचैनी हो रही थी क्योंकि 14 बरस की तनु देवी मां की प्रतिमा की तरफ देख रही थी तो भक्ति भाव महसूस हो रहा था मगर उसे इन उद्दंड पुरुषों में कोई भी मां का भक्त नज़र नहीं आ रहा था। उनमें से कुछ लोगों ने शायद मदिरा सेवन किया हुआ था। चरों ओर से पुरुषों से घिरी वे सभी बस किसी तरह इस ना खत्म होने वाली भीड़ से बाहर निकल जाना चाहती थीं।

शराब की गंध और गुलाल की चुभन को बर्दाश्त कर पाना अब मुश्किल हो रहा था। तभी तनु  की सहेली ने तनु से घबराते हुए कहा, किसी ने उसकी कमर को ज़ोर से दबाया। वो उसको बता ही रही थी कि उसी लड़के ने उसके नितंब पर हाथ फेरा। उसकी दीदी, जो उसके बगल से गुज़र रही थी, ने कहा, “थोड़ा संभल के, यहां पर कुछ लड़के अश्लीलता पर उतर आए हैं और यहां छेड़खानी की कोशिश हो रही है।”

तनु ने दीदी से पूछा, “दीदी तुम्हें किसी ने कुछ किया क्या?” दीदी ने हां में सिर हिलाया। उस सहेली का भाई जो लगभग सबसे आगे चल रहा था, सबके लिए रास्ता बना रहा था ताकि तीनों लड़कियां आराम से निकल जाएँ। तभी एक लंबा, तगड़ा लड़का झूमता हुआ दीदी के साथ और उसकी सहेली के साथ छेड़खानी करने लगा।

जैसे ही तनु ने उसकी यह हरकत देखी, क्रोध से भरी तनु, उसके कंधे से लटके एक लम्बे से मजबूत भारी थेले को प्रहार के लिए तैयार करने लगी। उस थैले में माँ ने 4 लोगों के लिए खाना दिया था। माँ ने तनु की फेवरेट बाटी भी बनाई थी, जिससे वह थैला काफी भारी हो चुका था। तनु उस लंबा लम्बे, भरी थैले को नीचे ही नीचे गोल-गोल घुमाने लगी। फिर तनु ने थोड़ा पीछे सरक कर और पूरी रफ्तार से गोल घूम कर, उस 6 फीट के लाल आँखों वाले, गुलाल से पुते लड़के पर वार करना शुरू किया। वह लड़का समझ नहीं पाया और लड़खड़ा गया।

कई बार तनु ने उस भरे हुए थैले से उस लड़के पर वार किये। उस लड़के के दोस्त मामला समझ नहीं पा रहे थे। वे उसकी मदद करने की नियत से तनु को रोकने आगे बढ़े, मगर तनु को कोई भी रोक नहीं पाया। तनु को मानो खून सवार हो गया था। वह चीख रही थी बोल, “छेड़ेगा? बोल! बोल ना, छेड़ेगा क्या? चल छेड़! चल! चल! मुझे छेड़…”

लड़का चोटिल हो गया। घबराता, कांपता हुआ तनु के पैरों पर गिर पड़ा। सुध-बुध खोकर वह लगातार “मुझे माफ कर दो। मुझे माफ कर दो” चिल्लाने लगा। मगर तनु पर कोई असर नहीं, वह भीड़ को चीरती हुई चीखी, “सामने आओ। किस किस को मौके का फायदा उठाना है। सामने आओ!”

मदद करने आये लड़के के कॉलर को पकड़कर पूछी, “तू भी छेड़ेगा?” उसके दोस्त घबराकर पीछे हो गए। सभी घेरा बना कर खड़े थे। पर तनु पर जैसे स्वयं माँ दुर्गा समा गई थी। वह पूरे मैदान में तांडव करती हुई चीख रही थी। भीड़ में भी उसे जिस-जिस पर शक था, उसे भी ललकार रही थी। उस 14 साल की लड़की से सब की घीग्गी बँधी हुई थी।

दीदी ने उसे जैसे तैसे संभाला। तनु हाँफ रही थी। भीड़ में खड़े हुए नर-पिशाच अपना चेहरा झुकाए हुए थे। वह लड़का माफी पर माफ़ी मांगे जा रहा था। तनु ने दहाड़ते हुए कहा,”माफ़ी मुझसे नहीं उनसे मांग जिनको तूने अपने गंदे हाथों से छुआ है।”

वह सरकता हुआ दोनों के पास गया और माफ़ी की गुहार करने लगा। सहेली के भैया ने उसे परे धकेलते हुए कहा, “शर्म करो राक्षसों! माँ के सामने उनके ही रुप से ऐसा दुस्साहस। धार्मिकता की आड़ में ऐसा अधर्म?”

जुलूस बेरौनक से ज़्यादा बेआबरू हो चुका था। तीनों लड़कियों ने दुर्गा माँ को प्रणाम किया और सड़क पार करने लगीं।

सहेली के भैया ने तनु से कहा, “मुझे गर्व है कि तुम्हें अपने, अपनी बहन व अपनी सहेली के सम्मान को बचाने के लिए किसी पुरुष के कन्धों की कोई आवश्यकता नहीं है। तुम समर्थ हो और खुद की रक्षा के लिए किसी पर निर्भर नहीं। तनु हम माँ का विसर्जन नहीं कर सकते। वो तो नौ दिनों के बाद समा जाती हैं तुम सभी में!”

मूल चित्र : Pinterest

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