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कुछ और ज़्यादा नहीं, बस इतना ही चाहती हूँ!

Posted: नवम्बर 15, 2019

मेरे शब्द और कर्म से पहचानों मुझको, सूरत, सौंदर्य और क्षमता तो बदलेगी उम्र के साथ-साथ, मेरी भावनाओं से मेरी कद्र पहचानी जाए, बस इतना ही चाहती हूँ।

सूरत, सौंदर्य और क्षमता तो बदलेगी उम्र के साथ-साथ
मेरी भावनाओं से मेरी कद्र पहचानी जाए,
बस इतना ही चाहती हूँ।

मेरे शब्द और कर्म से पहचानों मुझको,
मेरी शख्शियत बस मेरी सूरत से ही न जानी जाए,
बस इतना ही चाहती हूँ।

कुछ आ सकूँ गर किसी के ज़रा भी कुछ काम,
चाहे उसमें मेरी सारी ज़िंदगानी जाए,
बस इतना ही चाहती हूँ।

मेरी चाहतें सारी पूरी हो कि ना हों,
मेरे सत्कर्मों की मेरे संग कहानी जाए,
बस इतना ही चाहती हूँ।

गर दुखाया हो मैंने, मन कभी आपका,
क्षमा करना, नादान है,
समझी ये मेरी नादानी जाए,
बस इतना ही चाहती हूँ।

सूरत, सौंदर्य और क्षमता तो बदलेगी उम्र के साथ-साथ,
मेरी भावनाओं से मेरी कद्र पहचानी जाए,
बस इतना ही चाहती हूँ।

मूल चित्र : Pexels 

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Samidha Naveen Varma Blogger | Writer | Translator | YouTuber • Postgraduate in English Literature. • Blogger at Women's

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