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दिवाली की कहानियां जो घर की सफाई के साथ-साथ मन की सफाई करने की भी प्रेरणा देती हैं

Posted: अक्टूबर 24, 2019

दिवाली की कहानियां इस दिवाली पटाखे और मिठाइयों के साथ अपनों के साथ सुनें और सुनाएं और समझें कि घर और मन को साफ़ रखने की क्या ज़रुरत है! 

दीपावली प्रकाश का त्योहार माना जाता है। इस दिन हम घर की सफाई करते हैं और घर को दीपक रोशनी से सजाते हैं। एक दूसरे के घर व्यस्त जीवन से निकल कर आते-जाते हैं, मिठाई का आदान-प्रदान होता है। इस दिन बच्चों के लिए पटाखे बाज़र की रौनक बहुत खास होती है। दिवाली का त्यौहार दिल में उमंग और उत्साह से भरा होता है।

दिवाली का त्यौहार पाँच दिन का

धनतेरस

इस दिन समुंद्र मंथन के समय धंवंतरी औषधी का कलश लेकर प्रकट हुए थे। उनके नाम से धनतेरस मनाया जाता है। इस दिन कुछ खरीदते ज़रूर है। इस दिन हम बरतन, चाँदी के सामान, जिसकी जैसी सामर्थ हो, वैसा खरीदते हैं।

छोटी दिवाली और बड़ी दीवाली

एक दुसरे के घर जाते है, पटाखे चलाते हैं, घर में स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं

गोवर्धन पूजा

इस दिन कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत उठाया था।

भाई दोज

इस दिन बहन अपने भाई के टीका करती है और उसके शुभ की कामना करती है।

दिवाली की कहानियां 

पहली कहानी

कहते हैं राम भगवान, सीता माता और अपने भाई लक्ष्मण के साथ, लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करके, अपने घर अयोध्या आए थे। उन्हीं के स्वागत के लिए पूरा अयोध्या को दीयों की रोशनी से सजाया गया था, इसलिये यह त्योहार मनाया जाता है।

दूसरी कहानी

कहते हैं समुद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी समुद्र की बेटी के रूप में उत्पन्न हुईं और इसी दिन विष्णु भगवान ने लक्ष्मी माता के साथ विवाह किया था।

तीसरी कहानी

कहते महाबली असुरों का राजा था। उसने पृथ्वी को अपने अधिकार में लेने के लिए सबको बहुत परेशान करना शुरू कर दिया था। सभी देवता घबरा गए और विष्णु भगवान के पास पहुंचे।तब विष्णु भगवान ने वामन अवतार लेकर राजा महाबली का वध किया और इसी खुशी में ये त्यौहार मनाया जाता है।

चौथी कहानी

कहते हैं कि दिवाली के दिन कृष्ण भगवान ने नरकासुर का वध किया था इसीलिए इस त्यौहार को नरक चतुर्थी कहा जाता है।

पाँँचवी कहानी

इस दिन पांंडवो ने कौरवों पर महाभारत के युद्ध के बाद विजय प्राप्त की थी।

दीपावली पर उत्साह और उमंग नज़र आती है। इस दिन हम महालक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से करते हैं। एक-दूसरे के घर मिठाई लेकर जाते हैं। पहले की प्रथा में मिठाई का आदान-प्रदान होता था, खुशी व्यक्त करने के लिए, पर आजकल ये गलत दिशा में जा रहा है। मिठाई से ड्राई फ्रूट्स और फिर उपहार देने लगे हैं।

एक दूसरे के घर ज़रूर जाना चाहिए। बिना अपनों के दिवाली का त्यौहार फीका है। चाहे आप कितनी भी मिठाई खा लीजिए त्यौहार की रौनक सब के साथ होती है।

अपने अंदर की सफाई

आइये घर की दीवाली की सफाई के साथ मन की गंदगी भी साफ़ करें जिसने हमारे मन को एक दुसरे से ईष्या, दुसरे के अरमानों पर पैर रख आगे बढ़ने की इच्छा, और भी अनगिनत बुरे विचारों से घेर रखा है।

सबको शुभकामनाएं दें और शुभकामनाएं लें। इससे बहुत खुशी मिलती है। ज़िन्दगी में त्योहार है, तो अपनों से मिलने का समय मिल जाता है। ये त्योहार अपनों को दूर से पास ले आते है। त्योहार में अपने भाई-बहनों को मिलने से बचपन की यादें ताजा होती हैं। एक घर में कैसे खुशी से रहते थे।

दिवाली की कहानियां इस दिवाली पटाखे और मिठाइयों के साथ अपनों के साथ सुनें और सुनाएं और समझें घर और मन को साफ़ रखने की क्या ज़रुरत है!

आप सभी को शुभ दीपावली की शुभकामनाएं।

मूल चित्र : Pexels 

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