कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

क्यों हरदम तलाशे ग़ैर सभी, तू बन अपना ख़ुदा

हरदम तलाशे गैर में रहते हैं सभी, डरते हैं कहीं खुद से मुलाकात ना हो जाए, ये रिश्ते तुम्हारे मेरे, देते हैं सुकून बहुत, पुराने खुद की याद मुझे दिला जाएं।

हरदम तलाशे ग़ैर में रहते हैं सभी, डरते हैं कहीं खुद से मुलाकात ना हो जाए, ये रिश्ते तुम्हारे मेरे, देते हैं सुकून बहुत, पुराने खुद की याद मुझे दिला जाएं।

हरदम तलाशे ग़ैर में रहते हैं सभी,
डरते हैं कहीं ख़ुद से मुलाकात ना हो जाए।
ये झूठे कह कहे लगते हैं भले,
टूटे दिल का सच कहीं बाहर ना छलक जाए।

ये रिश्ते तुम्हारे मेरे, देते हैं सुकून बहुत,
कुछ देर को ही सही,
पुराने ख़ुद की याद मुझे दिला जाएं।

वो रिश्ते जो थे उम्मीदों से भरे,
पढ़ सके नहीं इन लफ़्ज़ों को,
ना ही इन आंखों का दर्द समझ पाए
हालत तुम्हारी मेरी लगती है एक ही मुझे,
शायद तभी तो दिल से,
ये दिल के तार हैं जुड़ पाए।

क्यों ना फिर हों मुकम्मल हम खुद से ही,
ये ज़रूरतों के सिलसिले,
यहीं क्यों ना थम जाएं
न बना ख़ुदा, तब तक किसी को अपना,
कि जब तक वो तेरी दुआ पर ना पिघल जाए।

मूल चित्र : Unsplash 

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

Never miss real stories from India's women.

Register Now

टिप्पणी

About the Author

10 Posts | 24,576 Views
All Categories