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द पीसीओडी थायरॉइड बुक, एक जटिल चक्र को तोड़ती है रुजुता दिवेकर की ये किताब

Posted: September 30, 2019

द पीसीओडी थायरॉइड बुक में रुजुता दिवेकर एक ऐसी जटिल बीमारी पर प्रकाश डालती हैं जो महिलाओं के जीवन को शारीरिक और सामाजिक रूप से प्रभावित करती है।

अनुवाद : मानवी वाहने 

मैं यह स्वीकारना चाहूंगी कि रुजुता दिवेकर की द पीसीओडी थयरॉइड बुक पढ़ने के बाद मुझे काफी अच्छा महसूस हुआ। पीसीओडी पर एक किताब? आप कहेंगे कि क्या तुम पागल हो? सभी तरह के पागल हैं इस दुनिया में, उनको मिलाकर जो इस किताब द्वारा सुझाए गए हैं। 

पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम मेरा दोस्त है

भारत में 10 से 18 % महिलाएँ इस बीमारी को अपने हर दिन का साथी समझती हैं। पीसीओडी/पीसीओएस एक ऐसी बीमारी है जो फर्टिलिटी रेट अथवा प्रजनन दर को प्रभावित करती है, हमें मधुमेह की ओर धकेलती है और मोटापे का कारण बनती है। इसके कारण हर्सुटिस्म (शरीर पर अत्यधिक बाल) होता है लेकिन सिर के बाल कम होते चले जाते हैं। इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या, चिड़चिड़ापन और उच्च रक्तचाप भी इसकी वजह से होते हैं।

मोटापे का जवाब बस वजन काम करना नहीं

हमें कारण पता हो या नहीं, लेकिन हम यह ज़रूर जानते हैं कि जिस बीमारी के चलते मोटापा हो, उसका जवाब बस वज़न कम करना है।

यह हार्मोन्स के कारण होने वाला एक निराशाजनक चक्र है। इसके बावजूद, सभी डॉक्टर्स इसे एक जायज़ बीमारी के रूप में नहीं स्वीकार करते। हम स्त्री रोग विशेषज्ञों से भी उम्मीद नहीं रख सकते। 1935 में पहचाने गए इस सिंड्रोम का इलाज या तो पुराने ज़माने में रह गया है, या फिर डॉक्टर्स सिर्फ महिलाओं को उनके वज़न को लेकर शर्मिंदा महसूस कराते हैं।

विश्वास कीजिए, मैं जानती हूँ। अपनी किशोरावस्था और 20 की उम्र में शरीर पर कोई भी फालतू फैट न होना और एक खिलाड़ी होने से लेकर, 40 की उम्र में दो बच्चों की माँ होने पर 25 किलो अतिरिक्त फैट के होते तक, मैंने डाइट, एक्सरसाइज़ और डॉक्टर्स के पीछे काफी भागादौड़ी की है। 

मुझे पीसीओडी है

परिवार में ये बीमारी के मौजूद होने के बावजूद, मुझे पीसीओएस के सामान्य लक्षण नहीं हुए। 15 सालों तक वज़न कम करने की कोशिशों में असफल होने और ग्लानि महसूस करने के बाद, मैं एक डॉक्टर के पास गई। उन्होंने जांच करके बताया कि मुझे पीसीओडी है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं वज़न कम करने के लिए मेहनत नहीं कर रही हूँ। जितनी कैलोरीज़ हैं, उतनी ही ऊर्जा खर्च अथवा जलानी होगी और उन्होंने यह भी पूछा कि क्या मैं किसी बैरियाट्रिक सर्जन से मिलना चाहती हूँ?

चूंकि मेरी नियमित तैराकी और हर साल की दस किलोमीटर की दौड़ मुझे ये बता रहे थे कि सामान्य तौर पर मैं दूसरों से ज़्यादा मेहनत कर रही थी। लेकिन, उसके बावजूद मुझे परिणाम नहीं दिख रहे थे, इसीलिए मैंने दूसरे डॉक्टर को ढूंढने का फैसला लिया।

द पीसीओडी थायरॉइड बुक – एक समीक्षा

गूगल पर डॉक्टर के बारे में काफी रिसर्च करने के बाद, रुजुता दिवेकर की द पीसीओडी थायरॉइड बुक की समीक्षा लिखने का मौका मेरे पास इसी समय आया। द पीसीओडी थायरॉइड बुक मुझे वाकई बहुत पसंद आई और मैं इसे 5 में से 5 स्टार्स दूंगी।

इसे पढ़ना आसान है। रुजुता का तरीका बातचीत करने वाला और मज़ाकिया है जो ज़रूरी बातों को बिना पूर्वाग्रह के बताता है। पूरी किताब में सशक्तिकरण की लहर है, यह स्त्रियों को खुद को महत्व देने, अपना ध्यान रखने और प्राथमिकता देने पर ज़ोर देती है। 

हम खुद को कितनी प्राथमिकता देते हैं

हमसे कितनी स्त्रियाँ रोज़ाना घर, काम, बच्चों, सम्बन्धों, सामाजिक जीवन, यहाँ तक कि खाली समय के लिए भी ताल-मेल बिठाने की भी, भरसक कोशिश करती हैं? हाँ, हम सभी! हममें से कितनों के घर-परिवार हमारी सेहत और व्यायाम को उतनी प्राथमिकता देते हैं जितनी उन्हें देनी चाहिए ?

हम खुद कितनी प्राथमिकता देते हैं? यदि पति, या सास-ससुर को कुछ भी हो जाए तो घर की महिलाएँ अच्छे इरादों से आगे आती हैं, और तमाम कोशिशें करती हैं यह सुनिश्चित करने की कि उस व्यक्ति का बराबर ध्यान रखा जा रहा है। हमारी सेहत को उसी स्तर पर सामान्य तौर पर उतनी प्राथमिकता नहीं दी जाती, चाहे स्त्री-मुक्ति को लेकर जितनी भी हमारी उपलब्धि या स्तर हो।

मानसिक पक्षों को गंभीरता से रखती है

द पीसीओडी थायरॉइड बुक किसी भी तरह की सेहत से जुड़े गंभीर मानसिक पक्षों पर काम करने से पहले इसी विषय को शालीनता से सामने रखती है। अपना निजी आदर्श वज़न हासिल करने के लिए की जा रही कोशिशें मानसिक तनाव से प्रभावित होती है जैसे – आत्मग्लानि, खुद को लेकर नकारात्मक विचार, खुद को कम आंकना, खाने से रिश्ता, आदि।

जो भी किताब मानसिक पक्षों के बारे में चर्चा नहीं करती वह बस एक्सरसाइज़ गाइड बनकर रह जाती है जो ऐसे सुझाव देती है जिन्हें लोग अपना ही नहीं पाते।

पहला अध्याय ‘तमाशा’ उन सभी चीज़ों के बारे में बात करता है जो स्त्रियाँ अपने साथ करती हैं, जैसे खुद की आलोचना करना, नींद को लेकर समझौता करना, कपड़ों को लेकर परेशान होना और परिणामों के पीछे भागते रहना।

द पीसीओडी थायरॉइड बुक एक टेक्निकल किताब

यह किताब आश्चर्यजनक रूप से टेक्निकल है, जो कि एक पैरा-मेडिकल प्रोफेशन के हिसाब से सही है, वह भी बिना आपको बिना ज़्यादा बोर किए।

रुजुता का ह्यूमर बॉलीवुड और हालिया खबरों पर भी बात करता है और उन सभी तथ्यों से आपको आसानी से अवगत कराता है जिन्हें आपको जानने की ज़रूरत है। यह किताब स्वास्थ्य के चार स्तंभों के आसपास व्यवस्थित है : पोषण, व्यायाम, नींद और रिश्ते।

उनके पास असल ज़िंदगी के उदाहरण, केस स्टडीज़ और उनकी दवाइयाँ मिलाकर सबके लिए अलग-अलग सुझाव हैं। किताब के अंत में वास्तविक लोगों के सवाल-जवाब का भी एक सेक्शन है।

वे पुरानी मान्यताओं पर सवाल उठाती हैं, जैसे स्त्रियाँ और वेट ट्रेनिंग, व्यक्ति की ट्रेनिंग पूरे हो जाने के बाद उससे मिलने वाले लाभों के कारण वे उसका समर्थन करती हैं।

चिरकाली रोग के जवाब मिलना अच्छा लगता है

किसी चिरकाली रोग के जवाब मिलना अच्छा लगता है, खासकर तब जब इसे भारतीय स्त्रियों के तरीके से बताया गया हो। हमारी आदतों और विचारों को मन में रखकर इसकी बात करना बहुत अमूल्य है। रुजुता उन अवधारणाओं पर भी बात करती हैं जो हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है – किसानों की मंडी, मौसमी खाना, स्थानीय खाना, मौसम के साथ जो खान-पान बदलता है, इत्यादि और इन्हें हाइपोथयरॉइड और पीसीओएस के लिए तैयार की गई योजना में व्यवस्थित करती हैं।

द पीसीओडी थायरॉइड बुक की एक आलोचना – करीना कपूर द्वारा लिखा गया शुरुआती हिस्सा पढ़ने में मुश्किल है। इसको सिर्फ इसलिए पढ़ने का मन करता है क्योंकि यह अभिनेत्री द्वारा लिखा गया है। घर में मैग्निफाइंग ग्लास न होने के कारण मुझे वह हिस्सा छोड़ना पड़ा।

‘सेल्फ-इमेज’ पर काम करने के लिए काफी

द पीसीओडी थायरॉइड बुक आपके खान-पान को, फिटनेस और नींद के रूटीन को व्यवस्थित करने के लिए और आपकी ‘सेल्फ-इमेज’ पर काम करने के लिए काफी है। जितना मैं समझ सकी हूँ, अगर एक पाठक को ज़रूरत पड़े तो लेखिका खतों और सवालों का स्वागत करती हैं। 

मैं इस व्यवस्था को शुरू करने की योजना बना चुकी हूँ और साथ में जो भी ज़िंदगी में चल रहा है, वह सब जारी रखूंगी। जो भी इस किताब में मैंने पढ़ा, वह सम्भव लगता है और इसके लिए मैं कहूँगी कि यह किताब आप ज़रूर पढ़ें। 

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मूल चित्र : Google/Canva 

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Sangitha Krishnamurthi is a special educator, blogger and mother of three. Her interests include living

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