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बेटियाँ हैं तो अस्तित्व है मेरा, आपका और समस्त मानव जाति का

Posted: सितम्बर 21, 2019

पढ़िए एक माँ का भावनाएं अपनी बेटी के लिए – बेटियाँ हैं तो अस्तित्व है मेरा, आपका और समस्त मानव जाति का, और ये केवल मेरी ही नहीं, शायद हर माँ की अनुभूति होगी।

वैसे तो लड़कियाँ आजकल हर क्षेत्र में तरक्की कर रही हैं, लेकिन आज भी समाज में कई जगह उन्हें समानता नहीं मिलती। उनकी समानता को बढ़ावा देने के लिए, नेशनल डॉटर्स डे सितंबर के आखिरी रविवार को मनाया जाता है।

बेटियाँ हैं तो अस्तित्व है मेरा, आपका और समस्त मानव जाति का।
और ये केवल मेरी ही नहीं, शायद हर माँ की अनुभूति होगी।

उपकार है बिटिया तेरा मुझ पर
माँ होने का दिया एहसास।
उसी एहसास से ज़िंदा रहती मैं,
जब तू नहीं होती मेरे पास।

तेरी पहली मुस्कान ने भर दी थी,
मेरे अन्दर ज़िंदगी।
शुक्र करती हूँ ऊपर वाले का,
क्या खूब तेरी बन्दगी।

जब चलना सीखा था तुमने,
आँगन में बजती पायल।
चलते चलते गिर जाती तो,
मन हो जाता घायल।

पता नहीं चल पाया तुम
कब छोटी से बड़ी हो गई।
पता नहीं चल पाया तुम
बेटी से कब सखी हो गई।

उंगली पकड़ कर चलने वाली
डोली में विदा हो जाती है,
कैसे रहूँगी, यही सोच कर,
साँस मेरी रुक जाती है।

ईश्वर तुमको हर छोटी,
हर बड़ी खुशी दे।
भूल जाओ सारे गम,
बस हँसी, हँसी और हँसी दे।

मालविका कहते हैं उसको
फूलों से जब लद जाती बेल।
रहे तुम्हारे जीवन में,
हँसी – खुशी का मेल।

इतनी समर्थ बनो,
कि काम सभी के आओ।
औरों को भी सुख दो,
और खुद भी खुशियाँ पाओ।

दुःख अगर आता हो तुम पर,
मुझसे होकर गुज़रे।
कष्ट छोटा सा भी कोई,
तुमको छूकर ना निकले।

सृष्टि की सबसे सुन्दर
रचना होती है बेटी।
तेरे घर की, मेरे घर की,
शान होती है बेटी।
तेरे घर का, मेरे घर का,
मान होती है बेटी।
तेरे घर का, मेरे घर का,
सम्मान होती है बेटी।

कविता को मेरी आवाज़ में यहां सुनें : https://www.youtube.com/watch?v=Ivgk2zfA_e4&feature=youtu.be

मूल चित्र : Pexels

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Samidha Naveen Varma Blogger | Writer | Translator | YouTuber • Postgraduate in English Literature. • Blogger at Women's

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