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ऐसे ऐतबार न करो, दुनिया बड़ी बेरहम है।

Posted: जुलाई 30, 2019

ये वो लोग हैं जो अपनी कायरता छुपाने के लिए, बच्चे तुम्हें ही गलत साबित करेंगे। किसी एक्सीडेंट को देखकर मोबाइल में विडियो बनाएंगे। फिर बातें बनाएंगे। 

जी हाँ! अब यही सीख हमें अपने बच्चों को देनी पड़ेगी।

जब मैं छोटी थी तब माँ अक्सर कहतीं थीं, “बेटा सुनसान रास्ते से मत जाना। भीड़ में दस में से आठ तो भले इंसान होंगे।”

पर अफसोस! आज ये दस में से आठ भले इंसान गाँधी जी के बंदरों की तरह आँख, कान बंद किए मिलेंगे। जिन्हें कोई सरोकार नहीं कि साथ चलने वाले को किसी गाड़ी ने टक्कर मारी या अपनी बेटी की उम्र की बच्ची के साथ किसी मनचले ने छेड़छाड़ कर दी। जब तक उनके खुद के घर में पत्थर नहीं पड़ते तब तक वो बगुले की तरह आँख मिंचे रहेंगे और खुद को उचित ठहराने के लिए अनाप-शनाप बातें भी बना लेंगे। जैसे लड़की की ही गलती रही होगी!

‘इतनी रात को निकलने की क्या जरूरत थी!’

‘सुनसान रास्ते से क्यों गई?’

‘कपड़े छोटे पहने थे!’

‘दुपट्टा ठीक से नहीं लिया था!’

‘लड़की ने ही इशारे किए होंगे!’

‘बिना आग के धुआं थोड़ी ना निकलता है!’

ये वो लोग हैं जो अपनी कायरता छुपाने के लिए, बच्चे तुम्हें ही गलत साबित करेंगे। किसी एक्सीडेंट को देखकर मोबाइल में विडियो बनाएंगे। फिर बातें बनाएंगे, ‘लड़का आवारा था, सारा दिन गाड़ी लेकर घुमता था, इतनी तेज गाड़ी चलाता था एक्सीडेंट तो होना ही था।’

इसलिए मेरे बच्चे अब खुद पर ऐतबार करो।

कभी आपका अपना दोस्त ही पीठ पर छुरा घोंपने के लिए तैयार रहता है। न जाने कितनी बार हमने समाचार पत्रों में पढ़ा कि किसी लड़की को उसके ही घर वालों, रिश्तेदारों अथवा दोस्तों ने हवस का शिकार बना लिया। कभी दोस्तों ने अपने ही किसी साथी का पैसों के लिए अपहरण कर लिया। कभी अपने फायदे के लिए प्रेम में उलझा लिया।

नहीं! नहीं! प्रेम करना ग़लत नहीं। मैं ये बिल्कुल नहीं कहती लेकिन बच्चे सही जीवनसाथी चुनना बहुत जरूरी है। जीवनसाथी के विचारों और आपके विचारों में समानता है कि नहीं ये जानना समझना बहुत जरूरी है।

बच्चे, मैं ये नहीं कहती कि दुनिया बुरी है, लेकिन सतर्क रहो, आँखें खुली रखो और जल्द ही किसी पर यकीन मत करो।

सबसे ज़रूरी बात कि तुम भी खुली आँखों होते हुए भी किसी की अवहेलना न करना। जब किसी को ज़रुरत हो तो सहायता करने के लिए आगे ज़रूर आना। कोई रास्ते में तुम्हें पुकारे तो उसे अनसुना मत करना। जिस संवेदनशीलता के साथ इंसान बनकर इस धरती पर आए थे उसे बरकरार रखना।

मूलचित्र : Pixabay

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