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आत्मा के प्रचारक हमारे नन्हे बच्चे-हम इनके ऋणी हैं

Posted: मार्च 11, 2019

जिस लम्हे बच्चे हमारे जीवन में आते हैं, उसी पल से वे हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन जाते हैं और हमारी सोच में और कर्मों में अंतर आने लगता है।

“Child is the father of man.

अपनी एक प्रसिद्ध कविता, “Ode to immortality” की शुरुआत कवि William Wordsworth ने इन पंक्तियों के साथ की है।

मैंने ये कविता अपनी MA इंग्लिश की कक्षा में पढ़ी थी, और ये मेरे हृदय में बस गयी। खासकर पहली पंक्ति, परंतु इस का सही अर्थ मैंने हमारे माता-पिता बनने के बाद समझा।

हाँ, मुझे ख़ुद को अपने अंदर धैर्य और शांति लानी होगी अगर मेरी नन्ही कली को मुझे उस से रूबरू करवाना है।

अगर हम दोनों पति-पत्नी उसे कुछ करने के लिए कहते हैं, तो तपाक से सवाल आता है, “आपने किया ऐसा?” हम उसके पहले रोले मॉडल हैं। वो हर पल हमें देख रही है।

माता-पिता बनने के बाद धीरज अपने आप आ जाता है। हमारे अंदर कई ऐसी शक्तियों का जन्म होता है जिससे हम अनजान थे।

बच्चे हमें कई बार ऐसे पाठ पढ़ाते हैं जो ऋषि-मुनियों ने कहे हैं। हमारा बच्चा हमें आज में रहना सिखता है। वो यदि पेंटिंग कर रहा होता है तो वो उस पल को पूर्ण रूप से जी रहा होता है। उसके लिए वर्तमान का महत्व है, ना कि भूत और भविष्य का। कई बार जब मैं बहुत जल्दी में होती हूँ और धैर्य खो रही होती हूँ, तब आठ साल की मेरी बिटिया धीरे-धीरे अपने काम कर रही होती है। शायद, मुझे उस से सिखना चाहिए कि ज़िंदगी में ठहराव का भी अपना महत्व है। हम अगर ध्यान से देखें तो हमारे बच्चे हमारे गुरु हैं। जहाँ अहम्-वश बड़ों के दिलों में दीवारें खिच जाती हैं, वहीं अपने दोस्तों से लड़ने के बाद भी हमारे बच्चे उनसे अगली बार मिलते ही दोस्त बन जाते हैं।

जिस लम्हे बच्चे हमारे जीवन में आते हैं, उसी पल से वे हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन जाते हैं। उनके जन्म लेते ही हमारी सोच में और कर्मों में अंतर आने लगता है। वे हम में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। उनकी भोली मुस्कान, अल्हड़पन, निःस्वार्थ प्रेम हमें हमारे अंदर के बच्चे से जोड़ देता है। जीवन की धारा बदलने लगती है। कौन किस को क्या सिखा रहा है, ये सोचने वाली बात है? हाँ, हम उनका मार्गदर्शन करने के लिए हैं किन्तु अगर हम दो क़दम पीछे हो जाएँ और ग़ौर से देखें, तो ये नन्ही आत्माएँ भी हमें बहुत कुछ सिखा रही होती हैं।

हमारे जागरूक बच्चे कितनी बार पर्यावरण और प्रकृति से हमारी भेंट कराते हैं। अधिकतर बार मैंने देखा है कि माता-पिता कचरा सड़क पर फेंक देंगे, लेकिन बच्चे उनके पास के कचरे के डिब्बे में डाल कर आते हैं। ऐसे में कई बार ये माता-पिता के शिक्षक की भूमिका निभा रहे होते हैं।

मेरी बेटी ने मुझे कहानियों से और लेखन से परिचित कराया। जब वो छोटी थी तब मैं उसके लिए लोरियाँ बना कर गाया करती थी और मन-घड़न कहानियाँ बना कर सुनाया करती थी। आज वो ही मेरा प्रोफ़ेशन है। हमें अपने इन नन्हे उद्धारकों का धन्यवाद करना चाहिए। कई बार ये हमें हमारे जीवन का उद्देश दिखा देते हैं।

हमारे अंदर दया, करुणा, धीरज, ईमानदारी के गुण हमारे बच्चों के होने के बाद अधिक आ जाते हैं, क्योंकि भले ही हम कितने भी असफल हो हम इन नन्ही आँखों के सामने सफल दिखना चाहते हैं।

कई बार उनको सिखाते-सिखाते हम ये भूल जाते हैं की हमारे घर में और जीवन में इनका आना कर्मों का आदान-प्रदान करने के लिए हुआ है। हम इनके ऋणी हैं।  इसी कारणवश हम इनके माता-पिता बने हैं। हमें भी इन पवित्र आत्माओं से बहुत सारा ज्ञान प्राप्त करना है।

सत्य ही कहा है, हमारे बच्चे हमारे प्रकाश पुंज हैं जो हमें आत्मीय अनुभूति का आनंद प्रदान करने के लिए आते हैं।

मूल चित्र : Unsplash 

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